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ईरान का अमेरिका से सीधी बातचीत से इंकार, मध्यस्थों की भूमिका पर उठाए सवाल, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

ईरानी प्रवक्ता ने पाकिस्तान की भूमिका पर विशेष रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी तटस्थता संदिग्ध है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का मंच उनका अपना है और ईरान ने उसमें भाग नहीं लिया। हम शांति की अपील का स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि इस संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।”

ईरान का अमेरिका से सीधी बातचीत से इंकार, मध्यस्थों की भूमिका पर उठाए सवाल, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
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तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिरोध और गहरा होता नजर आ रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई हमानेह ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अब तक केवल मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, जिन्हें ईरान “अव्यवहारिक और अत्यधिक मांगों” के रूप में देखता है।

प्रत्यक्ष वार्ता से साफ इनकार

हमानेह ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका की ओर से लगातार बदलती कूटनीति के चलते भरोसे का माहौल नहीं बन पा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा रुख पूरी तरह स्पष्ट है। हम ऐसी किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसमें वास्तविकता और संतुलन की कमी हो।” ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

मध्यस्थ देशों की पहल पर भी संदेह

पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों के प्रतिनिधि हाल के दिनों में सक्रिय हुए हैं और वे ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, ईरान ने इन प्रयासों को लेकर भी सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी प्रवक्ता ने पाकिस्तान की भूमिका पर विशेष रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी तटस्थता संदिग्ध है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का मंच उनका अपना है और ईरान ने उसमें भाग नहीं लिया। हम शांति की अपील का स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि इस संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।” इस बयान से साफ है कि ईरान फिलहाल किसी भी बाहरी मध्यस्थ पर पूरी तरह भरोसा करने को तैयार नहीं है।

क्षेत्रीय शांति की अपील, लेकिन शर्तों के साथ

हालांकि ईरान ने यह भी संकेत दिया कि वह क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के खिलाफ नहीं है। हमानेह ने कहा कि युद्ध खत्म करने की अपील “स्वागत योग्य” है, लेकिन इसके लिए निष्पक्षता और वास्तविकता जरूरी है। ईरान का मानना है कि जब तक संघर्ष की जड़ और जिम्मेदार पक्षों को स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ईरान को सीधी चेतावनी दी। ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका ईरान में “एक अधिक समझदार शासन” के साथ गंभीर बातचीत कर रहा है और इस दिशा में “काफी प्रगति” हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते की संभावना अभी भी अनिश्चित है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह जलडमरूमध्य व्यापार के लिए खुला नहीं रहता, तो अमेरिका कठोर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं होता और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो हम ईरान के बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर देंगे।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने अब तक इन लक्ष्यों को “जानबूझकर नहीं छुआ” है।

‘बदले’ की भाषा ने बढ़ाई चिंता

ट्रंप के बयान का सबसे विवादास्पद हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने संभावित हमले को “बदला” बताया। उन्होंने कहा कि यह उन सैनिकों और लोगों के लिए जवाब होगा, जिन्हें ईरान ने पिछले 47 वर्षों में मारा है। इस तरह की भाषा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि स्थिति और अधिक सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकती है।

वैश्विक असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है, और किसी भी तरह की बाधा से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक ओर जहां कई देश मध्यस्थता के जरिए बातचीत शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों के सख्त बयान इस प्रक्रिया को मुश्किल बना रहे हैं।
ईरान का प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार और अमेरिका की सैन्य चेतावनी—दोनों ही संकेत देते हैं कि निकट भविष्य में तनाव कम होने की संभावना सीमित है।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं पर भारी पड़ पाएगी या नहीं।


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