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PAK की हुई फजीहत?: ईरान ने मध्यस्थता की पाकिस्तान की पेशकश ठुकराई; शरीफ की कूटनीतिक कोशिशों को लगा झटका

तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा। इस रुख ने न केवल पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर किया है, बल्कि संकट के जल्द समाधान की संभावनाओं को भी पीछे धकेल दिया है।

PAK की हुई फजीहत?: ईरान ने मध्यस्थता की पाकिस्तान की पेशकश ठुकराई; शरीफ की कूटनीतिक कोशिशों को लगा झटका
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तेहरान।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा। इस रुख ने न केवल पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर किया है, बल्कि संकट के जल्द समाधान की संभावनाओं को भी पीछे धकेल दिया है।

पाकिस्तान की पहल को ईरान ने किया खारिज

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने खुद को इस संघर्ष में एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। इस्लामाबाद का दावा था कि वह ईरान और अमेरिका दोनों पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर सकता है। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। तेहरान ने संकेत दिया कि वह पाकिस्तान की जमीन पर किसी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने के पक्ष में नहीं है। इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।

अविश्वास बना बड़ी बाधा

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मौजूद अविश्वास इस फैसले की प्रमुख वजह है। ईरान को आशंका है कि पाकिस्तान की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो सकती। यही कारण है कि तेहरान किसी भी संवेदनशील बातचीत में इस्लामाबाद को शामिल करने से बच रहा है। इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय राजनीति में भरोसे की कमी कूटनीतिक प्रयासों को कितना प्रभावित कर सकती है।

कतर के जरिए बातचीत की संभावना

हालांकि, पूरी तरह निराशाजनक स्थिति नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान कतर के जरिए मध्यस्थता की संभावनाओं पर विचार कर सकता है। कतर पहले भी क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और कई मामलों में उसने सफल बातचीत का रास्ता निकाला है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि यदि कतर पहल करता है, तो बातचीत का कोई रास्ता निकल सकता है।

पाकिस्तान ने रिपोर्ट्स को बताया ‘बेबुनियाद’

दूसरी ओर, पाकिस्तान ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिनमें उसकी मध्यस्थता की कोशिशों के विफल होने का दावा किया गया था।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन खबरों को “बेबुनियाद” और “कल्पना मात्र” बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी आधिकारिक स्रोत ने ऐसी जानकारी साझा नहीं की है और मीडिया को केवल सत्यापित बयानों पर ही भरोसा करना चाहिए। अंद्राबी ने यह भी जोर दिया कि मौजूदा संवेदनशील हालात में जिम्मेदार रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है।

ईरान का जवाबी अभियान जारी

कूटनीतिक मोर्चे पर सख्त रुख अपनाने के साथ-साथ ईरान ने सैन्य स्तर पर भी अपनी गतिविधियां जारी रखी हैं। ईरानी सेना के अनुसार, उसने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपने जवाबी अभियान की 93वीं लहर पूरी कर ली है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इजरायल के भीतर कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिमी गैलिली, हाइफा, काफर कन्ना और क्रायोट जैसे क्षेत्रों में हमले किए गए, जहां सैन्य और लॉजिस्टिक गतिविधियां चल रही थीं।

बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंता

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। जहां एक ओर कूटनीतिक प्रयास विफल होते दिख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियों में तेजी से यह संकेत मिल रहा है कि संघर्ष और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह संकट व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

कूटनीति के सामने चुनौती

ईरान द्वारा पाकिस्तान की मध्यस्थता ठुकराना इस बात का संकेत है कि मौजूदा हालात में भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद अहम हो गई है। कतर जैसे देशों के सामने अब यह चुनौती है कि वे दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली कर सकें और बातचीत का रास्ता तैयार करें।


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