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ईरान शांति समझौते से बढ़ी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अहमियत, 2028 की राष्ट्रपति दौड़ में मजबूत दावेदार

ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर अमेरिका में बहस तेज है, लेकिन जेडी वेंस लगातार इसके पक्ष में खुलकर सामने आ रहे हैं। वे टीवी इंटरव्यू, सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक मंचों पर इस समझौते का बचाव कर रहे हैं।

ईरान शांति समझौते से बढ़ी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अहमियत, 2028 की राष्ट्रपति दौड़ में मजबूत दावेदार
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वॉशिंगटन : अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) इन दिनों केवल अपनी नई किताब को लेकर नहीं, बल्कि ईरान के साथ हुए अस्थायी शांति समझौते में निभाई गई अपनी भूमिका के कारण भी चर्चा के केंद्र में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तेहरान के बीच हुए इस समझौते के बाद वेंस प्रशासन का सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। विदेशों में लंबे सैन्य हस्तक्षेप के आलोचक रहे वेंस अब कूटनीतिक समाधान के पक्षधर नेता के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते का भविष्य केवल ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि जेडी वेंस के राजनीतिक करियर और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावनाओं पर भी गहरा असर डाल सकता है।

समझौते के समर्थन में लगातार सामने आ रहे हैं वेंस

ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर अमेरिका में बहस तेज है, लेकिन जेडी वेंस लगातार इसके पक्ष में खुलकर सामने आ रहे हैं। वे टीवी इंटरव्यू, सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक मंचों पर इस समझौते का बचाव कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले दिनों में उनके स्विट्जरलैंड जाकर ईरान के साथ होने वाली वार्ता के अगले चरण में भाग लेने की भी संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो वेंस को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाएगा जिसने लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

असफलता की स्थिति में राजनीतिक जोखिम भी बड़ा

जहां समझौते की सफलता जेडी वेंस को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नेता के रूप में स्थापित कर सकती है, वहीं इसकी विफलता उनके लिए राजनीतिक चुनौती भी बन सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि समझौता सफल रहा तो उसका श्रेय वे लेंगे, लेकिन अगर यह विफल हुआ तो जिम्मेदारी जेडी वेंस पर आ सकती है। इस बयान को राजनीतिक हलकों में मजाक से ज्यादा एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि ट्रंप ने इस पूरे प्रयास में वेंस को अग्रिम पंक्ति में रखा है।

अमेरिका में समझौते को लेकर बढ़ी बहस

ईरान समझौते का प्रारूप सार्वजनिक होने के बाद अमेरिका में इसके पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के अलावा इजरायल समर्थक समूहों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि शुरुआती चरण में ईरान को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिल रहा है, जबकि उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों का समाधान अभी बाकी है। कुछ सांसदों का मानना है कि भविष्य में यह समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।

वेंस बोले- कूटनीति ही बेहतर विकल्प

जेडी वेंस ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि समझौते का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब ईरान अपनी सभी शर्तों और प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य किसी नए सैन्य संघर्ष में फंसना नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। वेंस ने कहा कि यह स्थिति इराक युद्ध जैसी नहीं बनने दी जाएगी और अमेरिका किसी लंबे सैन्य दलदल से बचते हुए कूटनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। कुछ नेता समझौते को लेकर चिंतित हैं, जबकि कुछ का मानना है कि बातचीत के जरिये समाधान तलाशना सही दिशा है।

बैक-चैनल वार्ता में निभाई अहम भूमिका

व्हाइट हाउस के अनुसार, जेडी वेंस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हैं। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर उन्होंने ईरान के साथ बैक-चैनल बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित 60 दिनों की तकनीकी वार्ताओं की निगरानी का जिम्मा भी वेंस को सौंपा गया है। इससे साफ है कि ट्रंप प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया में उन पर विशेष भरोसा कर रहा है।

2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए बन रही मजबूत जमीन

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह शांति प्रक्रिया सफल रहती है और पश्चिम एशिया में स्थिरता कायम होती है, तो जेडी वेंस 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में खुद को एक प्रभावी कूटनीतिक नेता और वैश्विक स्तर पर संकटों को सुलझाने वाले राजनेता के रूप में पेश कर सकेंगे। उनकी छवि ऐसे नेता की बन सकती है, जिसने युद्ध की जगह बातचीत को प्राथमिकता दी और संघर्ष को कम करने में योगदान दिया। यह छवि उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के भीतर अन्य संभावित दावेदारों के मुकाबले बढ़त दिला सकती है।

नई किताब को भी 2028 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा

16 जून को जेडी वेंस की नई पुस्तक ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टू फेथ’ प्रकाशित हुई है। अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक इस किताब की टाइमिंग को भी उनके भविष्य की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। इस पुस्तक में वेंस ने अपने धार्मिक और आध्यात्मिक सफर का उल्लेख किया है। 2019 में नास्तिक विचारधारा छोड़कर कैथोलिक ईसाई धर्म अपनाने वाले वेंस ने अपनी व्यक्तिगत आस्था और विश्वास को विस्तार से साझा किया है।

जिमी कार्टर की रणनीति से की जा रही तुलना

अमेरिकी राजनीतिक इतिहास के जानकार वेंस की इस किताब की तुलना पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर की 1975 में प्रकाशित पुस्तक ‘व्हाई नॉट द बेस्ट?’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव से पहले अपनी धार्मिक मान्यताओं और मूल्यों पर आधारित पुस्तक लिखी थी, जिसने उन्हें धार्मिक मतदाताओं के बीच एक विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित किया था। इसी तरह जेडी वेंस भी अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय व्यक्तिगत मूल्यों, परिवार और धार्मिक विश्वास को सामने रखकर खुद को एक गंभीर, जिम्मेदार और भरोसेमंद नेता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के धार्मिक आधार को मजबूत करने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि वेंस की यह रणनीति रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक और धार्मिक वोट बैंक को आकर्षित करने में मदद कर सकती है। 2028 के प्राइमरी चुनावों में उन्हें मार्को रुबियो जैसे अन्य संभावित उम्मीदवारों से चुनौती मिल सकती है, लेकिन धार्मिक और रूढ़िवादी मतदाताओं के बीच उनकी बढ़ती स्वीकार्यता उन्हें मजबूत स्थिति में ला सकती है। कुल मिलाकर, ईरान के साथ शांति प्रक्रिया और नई किताब दोनों ने जेडी वेंस को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले वर्षों में इन दोनों पहलुओं की सफलता या असफलता ही यह तय करेगी कि क्या वह 2028 में व्हाइट हाउस की दौड़ के सबसे मजबूत दावेदार बन पाते हैं या नहीं।


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