अमेरिका पर ईरान का जवाबी हमला, कुवैत में अमेरिकी एयरबेस को बनाया निशाना
कुवैत सरकार ने भी पुष्टि की कि गुरुवार को उसे भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। हमले की आहट मिलते ही कुवैत में एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत एक्टिव हो गए और पूरे इलाके में सायरन बज उठे।

तेहरान/वॉशिंगटन: US Iran War Updates: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी जुबानी जंग अब सीधे सैन्य टकराव में बदल चुकी है। पिछले तीन दिनों में अमेरिका द्वारा किए गए दो हमलों के बाद ईरान ने भी बड़ा जवाबी पलटवार किया है। इस सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में पहले से ही नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की वजह क्या है और दोनों देशों के रुख में कितनी तल्खी आ चुकी है।
अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान में की गई बमबारी के बाद ईरान ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरान का दावा है कि अमेरिकी सेना इसी ठिकाने का इस्तेमाल करके ईरान के तटीय शहर बंदर अब्बास पर हमले कर रही थी।
इस जवाबी हमले से पहले कुवैत सरकार ने भी पुष्टि की कि गुरुवार को उसे भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। हमले की आहट मिलते ही कुवैत में एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत एक्टिव हो गए और पूरे इलाके में सायरन बज उठे। इस बीच, अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बंदर अब्बास के पास ईरान के 4 ड्रोन और एक अन्य सैन्य ठिकाने को नष्ट करने का दावा किया है।
IRGC ने संभाली कमान
ईरान की इस सैन्य कार्रवाई की कमान सीधे 'ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने अपने हाथों में ली है। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी (IRIB) की रिपोर्ट के अनुसार, IRGC ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, "आज सुबह बंदर अब्बास हवाई अड्डे के बाहरी इलाके में हमलावर अमेरिकी सेना द्वारा मिसाइलों का उपयोग करके आक्रामकता दिखाई गई थी। इसी के जवाब में ठीक सुबह 4:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) उस अमेरिकी हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जहां से हमारे ऊपर हमले की साजिश रची जा रही थी।" ईरान का साफ कहना है कि उसने यह कदम केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाया है।
अमेरिका का दावा
दरअसल, अमेरिकी सेना ने पिछले 3 दिनों के भीतर दो बार दक्षिणी ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके बंदर अब्बास को निशाना बनाया है। वाशिंगटन का तर्क है कि ये हमले 'सेल्फ डिफेंस' यानी आत्मरक्षा में किए गए हैं ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी ईरानी खतरे को समय रहते टाला जा सके। दूसरी ओर, तेहरान ने अमेरिका के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच जो संघर्षविराम हुआ था, वह पहले से ही बहुत कमजोर स्थिति में था और अमेरिका ने जानबूझकर यह हमला करके उस शांति समझौते को खुली चुनौती दी है।
शांति वार्ता पर ट्रंप का सख्त रुख
सैन्य टकराव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता भी खटाई में पड़ती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कैबिनेट बैठक के बाद साफ कर दिया कि वे मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के राजनीतिक दबाव में आकर ईरान के साथ किसी भी जल्दबाजी वाले समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि चल रही बातचीत में अमेरिका की शर्तों के मुताबिक 'सही समझौता' नहीं हुआ, तो अमेरिका दोबारा बड़ी सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी वायुसेना ने बंदर अब्बास पर हमला बोल दिया, जिसने ट्रंप की इस चेतावनी को जमीन पर सच साबित कर दिया।
यूरेनियम के मुद्दे पर अड़ा अमेरिका
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ परमाणु कार्यक्रम और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का भंडार है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग में घोषणा की कि अमेरिका को किसी भी कीमत पर ईरान का संवर्धित यूरेनियम चाहिए, जबकि ईरान इसे सौंपने को कतई तैयार नहीं है। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने ईरानी मीडिया की उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें एक 'ड्राफ्ट एग्रीमेंट' का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करेगा और अपनी सेना को पीछे हटाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह झूठ है और जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करता, तब तक उसे किसी भी तरह की प्रतिबंध राहत (Sanctions Relief) नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने ओमान को दी 'उड़ाने' की धमकी
तनाव की आंच अब ईरान के पड़ोसी देशों तक भी पहुंचने लगी है। वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बेहद आक्रामक और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र (International Waterway) है और इस पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं हो सकता। दुनिया के सभी व्यापारिक और सैन्य जहाजों को यहां से स्वतंत्र रूप से गुजरने की पूरी आजादी होगी।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा पर पूरी नजर रखेगा, लेकिन किसी भी देश को इसे कंट्रोल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ईरान इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहता है, जिसे अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। इसी संदर्भ में ट्रंप ने ओमान को भी लपेटे में लेते हुए चेतावनी दी कि ओमान को भी बाकी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की तरह जिम्मेदार व्यवहार करना होगा, अन्यथा अमेरिका उसे 'उड़ाने' (सैन्य रूप से तबाह करने) से भी पीछे नहीं हटेगा।


