Top
Begin typing your search above and press return to search.

ईरान ने अरब देशों पर शाहेद-136 ड्रोन दागकर मचाई तबाही, यूक्रेन युद्ध में भी साबित कर चुके हैं क्षमता

शाहेद-136 को अपेक्षाकृत कम लागत वाला लेकिन प्रभावी हथियार माना जाता है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 35,000 डॉलर प्रति यूनिट बताई जाती है, जो पारंपरिक गाइडेड मिसाइलों की तुलना में काफी कम है।

ईरान ने अरब देशों पर शाहेद-136 ड्रोन दागकर मचाई तबाही, यूक्रेन युद्ध में भी साबित कर चुके हैं क्षमता
X
तेहरान/दुबई | Shahed-136 Drones: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर हो गए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कथित तौर पर अपने ‘शाहेद-136’ कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले कुछ अरब देशों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें ड्रोन इमारतों से टकराते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उनका निशाना अरब देश नहीं, बल्कि उन ठिकानों पर मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधन थे। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

क्या है शाहेद-136 ड्रोन?

‘शाहेद’ फारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है “गवाह”। शाहेद-136 एक आत्मघाती या ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ श्रेणी का ड्रोन है, जिसे लक्ष्य के ऊपर मंडराने और फिर टकराकर विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी एक कंपनी ने विकसित किया है। ईरान वर्ष 2021 से इस ड्रोन का उत्पादन कर रहा है और पहले भी क्षेत्रीय संघर्षों में इसका इस्तेमाल कर चुका है।

शाहेद-136 को अपेक्षाकृत कम लागत वाला लेकिन प्रभावी हथियार माना जाता है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 35,000 डॉलर प्रति यूनिट बताई जाती है, जो पारंपरिक गाइडेड मिसाइलों की तुलना में काफी कम है। इसकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह लंबी दूरी के लक्ष्यों को भी साध सकता है।

हमले और उसके बाद की स्थिति

शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर सिलसिलेवार हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया। इसके बाद ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए पश्चिम एशिया के विभिन्न हिस्सों में जवाबी कार्रवाई की। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में शाहेद-136 ड्रोन बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात के कुछ स्थानों की ओर बढ़ते या इमारतों से टकराते नजर आए।

दुबई के जुमेराह इलाके से जारी एक वीडियो में एक ड्रोन को फेयरमोंट पाम नामक होटल के पास टकराते हुए दिखाया गया। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल है, लेकिन इनसे क्षेत्र में फैली दहशत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ईरान का पक्ष

रविवार को ईरान के वरिष्ठ अधिकारी अली लारीजानी ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान का निशाना अरब देश नहीं हैं। उनके मुताबिक, हमले उन ठिकानों पर केंद्रित थे, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी सेना द्वारा किया जा रहा था। ईरान का दावा है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ की गई कार्रवाई का जवाब दे रहा है। हालांकि इस घटनाक्रम ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी है।

पारंपरिक मिसाइलों से अलग क्यों हैं ड्रोन?

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्ध में ड्रोन पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में कई मायनों में अलग और प्रभावी साबित हो रहे हैं।

कम लागत: एक गाइडेड मिसाइल की तुलना में शाहेद-136 की लागत बेहद कम है।
बड़े पैमाने पर उत्पादन: इन्हें अपेक्षाकृत सरल तकनीक से बड़ी संख्या में बनाया जा सकता है।
लचीली तैनाती: इन्हें ट्रकों या मोबाइल लॉन्चर से छोड़ा जा सकता है।
रक्षा प्रणाली को चुनौती:
कभी-कभी ये महंगी एयर डिफेंस प्रणालियों को चकमा देने में सफल हो जाते हैं।

ड्रोन युद्ध विशेषज्ञ सेथ फ्रांत्जमैन का कहना है कि शाहेद जैसे ड्रोन “आतंक और मनोवैज्ञानिक दबाव” पैदा करने में भी सक्षम होते हैं। वे कम लागत के कारण बड़े पैमाने पर दागे जा सकते हैं, जिससे विरोधी देश की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ता है।

यूक्रेन युद्ध में भी हुआ इस्तेमाल

शाहेद-136 ड्रोन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए जब रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान इनका इस्तेमाल किया। रूस ने इन्हें ‘गेरान’ नाम से तैनात किया और बाद में अपने देश में इनके उत्पादन की व्यवस्था भी की। यूक्रेन में इन ड्रोनों का इस्तेमाल ऊर्जा संयंत्रों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए किया गया था। समय के साथ इनमें तकनीकी सुधार भी किए गए। पिछले वर्ष अमेरिका ने भी घोषणा की थी कि उसने ‘लूकास’ नामक एक हमलावर ड्रोन विकसित किया है, जिसे कथित तौर पर शाहेद ड्रोन की रिवर्स इंजीनियरिंग के आधार पर तैयार किया गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

पश्चिम एशिया पहले से ही अस्थिर भू-राजनीतिक परिस्थितियों से जूझ रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव न केवल सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा रहा है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर डाल सकता है। खाड़ी क्षेत्र विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक का तेजी से प्रसार भविष्य के युद्धों का स्वरूप बदल सकता है। कम लागत, उच्च प्रभाव और आसान उपलब्धता के कारण यह तकनीक पारंपरिक सैन्य संतुलन को चुनौती दे रही है।

निर्णायक हथियार के रूप में उभरे

फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। कई देशों ने अपने एयरस्पेस और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा कड़ी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति और संयम की अपील कर रहा है। हालात किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाले दिनों की कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि शाहेद-136 जैसे ड्रोन आधुनिक संघर्षों में एक निर्णायक हथियार के रूप में उभर चुके हैं और पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट इस बदलती सैन्य रणनीति का ताजा उदाहरण बन गया है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it