Top
Begin typing your search above and press return to search.

ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, अमेरिकी नाकाबंदी ना हटने पर एक्शन

ईरान ने दावा किया है कि जब तक अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा। तेहरान का कहना है कि यह कदम अमेरिकी कार्रवाई के विरोध में उठाया गया है।

ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, अमेरिकी नाकाबंदी ना हटने पर एक्शन
X

तेहरान। Strait of Hormuz Blockade: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हालात गंभीर होते नजर आ रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि जब तक अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा। तेहरान का कहना है कि यह कदम अमेरिकी कार्रवाई के विरोध में उठाया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले ईरान ने शुक्रवार को संकेत दिए थे कि सीजफायर के दौरान व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा। लेकिन अब बदले रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका का सख्त रुख और चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने बयान में स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर लगाई गई नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई बड़ा समझौता नहीं करता। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को “अपने तरीके से” हासिल करेगा। इस बयान को ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

‘समुद्री डकैती’ का आरोप

अमेरिकी नाकेबंदी के खिलाफ ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका पर “समुद्री डकैती” का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और समुद्र में लूट जैसी कार्रवाई है। ईरान के इस आरोप ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे यह भी साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

शर्तों के साथ खुला था होर्मुज

ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला नहीं है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह मार्ग केवल सीजफायर की अवधि में और कुछ शर्तों के तहत ही खोला गया था। ईरान ने साफ कहा था कि सैन्य जहाजों या उन देशों से जुड़े जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिन्हें वह अपने विरोधी के रूप में देखता है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि लेबनान में हिज्बुल्लाह पर दबाव बढ़ता है, तो इस नीति में बदलाव किया जा सकता है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसकी रणनीतिक अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर है, लेकिन जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग केवल लगभग 3-3 किलोमीटर चौड़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

समुद्री यातायात में अनिश्चितता

हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में कुछ जहाजों के इस मार्ग से गुजरने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह तय नहीं हो पा रहा कि कुल मिलाकर कितना समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है। इस अनिश्चितता के कारण कई शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं। कुछ जहाजों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक व्यापार की लागत बढ़ने की संभावना है।

सीजफायर पर भी मंडरा रहा खतरा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीजफायर की स्थिति भी अस्थिर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि तय समयसीमा तक ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ, तो सीजफायर को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका नाकेबंदी जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर दोबारा बमबारी भी शुरू की जा सकती है। इस बयान ने क्षेत्र में फिर से सैन्य टकराव की आशंका को बढ़ा दिया है।

नाजुक स्थिति में क्षेत्रीय संतुलन

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा तीनों ही मोर्चों पर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it