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पृथ्वी के लिए ‘अदृश्य खतरा’: नासा ने 25,000 अज्ञात एस्टेरॉयड्स को लेकर दी चेतावनी

अनुमान है कि ऐसे लगभग 25,000 एस्टेरॉयड पृथ्वी की कक्षा के पास मौजूद हैं। इनमें से केवल करीब 40 प्रतिशत की ही पहचान हो पाई है। यानी 60 प्रतिशत से अधिक अब भी वैज्ञानिकों की निगाह से बाहर हैं।

पृथ्वी के लिए ‘अदृश्य खतरा’: नासा ने 25,000 अज्ञात एस्टेरॉयड्स को लेकर दी चेतावनी
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वॉशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पृथ्वी के पास मंडरा रहे हजारों एस्टेरॉयड्स को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसी के अनुसार, करीब 25,000 ऐसे मध्यम आकार के क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) हैं, जिनकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। ये आकार में इतने बड़े हैं कि यदि पृथ्वी से टकराएं तो किसी शहर या पूरे क्षेत्र को भारी तबाही पहुंचा सकते हैं।

नासा में प्लैनेटरी डिफेंस (ग्रह रक्षा) कार्यक्रम की प्रमुख केली फास्ट ने अमेरिकी एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस (AAAS) में बोलते हुए कहा, “जो चीज मुझे रात में सोने नहीं देती, वह हैं वे एस्टेरॉयड जिनके बारे में हम जानते ही नहीं हैं।” उनका यह बयान वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है।

किस आकार के एस्टेरॉयड हैं सबसे बड़ी चिंता?

केली फास्ट के अनुसार, वैज्ञानिक या तो बहुत छोटे क्षुद्रग्रहों को ट्रैक कर लेते हैं या फिर बेहद बड़े, जिनकी गतिविधियां दूर से भी नजर आ जाती हैं। लेकिन लगभग 140 मीटर आकार वाले एस्टेरॉयड सबसे बड़ी चुनौती हैं। इस आकार के एस्टेरॉयड को वैज्ञानिक ‘सिटी-किलर्स’ की श्रेणी में रखते हैं। ये वैश्विक स्तर पर डायनासोर जैसी तबाही तो नहीं मचाते, लेकिन यदि किसी आबादी वाले क्षेत्र में गिरें तो बड़े शहर को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। विस्फोट और झटकों से आसपास के सैकड़ों किलोमीटर क्षेत्र में विनाश हो सकता है।

अनुमान है कि ऐसे लगभग 25,000 एस्टेरॉयड पृथ्वी की कक्षा के पास मौजूद हैं। इनमें से केवल करीब 40 प्रतिशत की ही पहचान हो पाई है। यानी 60 प्रतिशत से अधिक अब भी वैज्ञानिकों की निगाह से बाहर हैं।

50 प्रतिशत से अधिक का ठिकाना अज्ञात

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की डॉ. नैन्सी चाबोट ने भी इस खतरे की पुष्टि की है। वे 2022 में नासा के ऐतिहासिक डार्ट (DART) मिशन का नेतृत्व कर चुकी हैं। डार्ट मिशन के तहत एक स्पेसक्राफ्ट को जानबूझकर एक एस्टेरॉयड से टकराया गया था, ताकि उसकी कक्षा में बदलाव लाया जा सके। यह मानव इतिहास में पहली बार था जब किसी क्षुद्रग्रह की दिशा बदलने का प्रयोग सफल रहा। डॉ. चाबोट के मुताबिक, “हमारी खोज अभी अधूरी है। 140 मीटर आकार के 50 प्रतिशत से ज्यादा एस्टेरॉयड्स का अभी तक कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं है।” इसका मतलब है कि यदि इनमें से कोई अचानक पृथ्वी की ओर बढ़े, तो उसे समय रहते पहचानना मुश्किल हो सकता है।

क्या है प्लैनेटरी डिफेंस कार्यक्रम?

प्लैनेटरी डिफेंस का उद्देश्य पृथ्वी को संभावित खगोलीय टक्करों से सुरक्षित रखना है। इसके तहत वैज्ञानिक अंतरिक्ष में ऐसे पिंडों की पहचान, ट्रैकिंग और संभावित जोखिम का आकलन करते हैं। नासा और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां टेलीस्कोप, रडार और स्पेस ऑब्जर्वेटरी के माध्यम से इन क्षुद्रग्रहों की निगरानी करती हैं। लेकिन अंतरिक्ष का विशाल विस्तार और सीमित संसाधनों के कारण हर एस्टेरॉयड की समय पर पहचान संभव नहीं हो पाती।

अचानक खतरे से निपटने की तैयारी अधूरी

नासा ने स्वीकार किया है कि फिलहाल किसी अचानक पृथ्वी की ओर बढ़ते एस्टेरॉयड को मोड़ने या नष्ट करने की सक्रिय और तैयार प्रणाली उपलब्ध नहीं है। डार्ट मिशन ने यह दिखाया कि दिशा बदली जा सकती है, लेकिन ऐसा करने के लिए पहले से खतरे की पहचान और पर्याप्त तैयारी जरूरी है। डॉ. नैन्सी चाबोट ने कहा कि हमारे पास कोई ऐसा स्पेसक्राफ्ट स्टैंडबाय पर नहीं है, जिसे तुरंत लॉन्च किया जा सके। यदि अचानक खतरा सामने आए, तो मिशन तैयार करने, परीक्षण और लॉन्च में समय लगेगा। ऐसे में समय ही सबसे बड़ा कारक बन जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रह रक्षा कार्यक्रम में निवेश की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी आपात स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

एस्टेरॉयड क्या होते हैं?

एस्टेरॉयड या क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा करने वाले चट्टानी पिंड होते हैं। ये मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच स्थित एस्टेरॉयड बेल्ट में पाए जाते हैं, लेकिन कई एस्टेरॉयड अपनी कक्षा के कारण पृथ्वी के पास से भी गुजरते हैं। इन्हें ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स’ (NEOs) कहा जाता है। ज्यादातर छोटे एस्टेरॉयड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर नष्ट हो जाते हैं। लेकिन बड़े और मध्यम आकार के पिंड सतह तक पहुंच सकते हैं और भारी ऊर्जा के साथ टकरा सकते हैं। 1908 में रूस के तुंगुस्का क्षेत्र में हुए विस्फोट को एक मध्यम आकार के एस्टेरॉयड या धूमकेतु के टकराने का परिणाम माना जाता है। उस घटना में हजारों वर्ग किलोमीटर जंगल नष्ट हो गया था, हालांकि वह आबादी वाला क्षेत्र नहीं था।

क्या तत्काल खतरा है?

नासा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी ज्ञात एस्टेरॉयड से तत्काल वैश्विक खतरा नहीं है। एजेंसी लगातार निगरानी कर रही है और जिन एस्टेरॉयड्स की पहचान हो चुकी है, उनके संभावित मार्ग का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। फिर भी वैज्ञानिकों का कहना है कि “अज्ञात” एस्टेरॉयड सबसे बड़ी चिंता हैं। यदि कोई ऐसा पिंड, जिसका पहले पता न हो, पृथ्वी की ओर बढ़े तो प्रतिक्रिया का समय बहुत कम हो सकता है।

आगे की रणनीति क्या?

विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान दो स्तरों पर है-पहला, ज्यादा उन्नत और संवेदनशील टेलीस्कोप के जरिए अधिक से अधिक एस्टेरॉयड्स की पहचान; दूसरा, संभावित टक्कर की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना। नासा आने वाले वर्षों में नए स्पेस टेलीस्कोप लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है, जो इंफ्रारेड तकनीक के जरिए ऐसे पिंडों की पहचान करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि डेटा साझा कर जोखिम का सटीक आकलन किया जा सके।

अदृश्य जोखिम, बढ़ती तैयारी की जरूरत

नासा की चेतावनी यह संकेत देती है कि पृथ्वी के लिए खतरा केवल विज्ञान कथा का विषय नहीं है, बल्कि एक वास्तविक वैज्ञानिक चुनौती है। हालांकि अभी कोई तात्कालिक संकट नहीं है, लेकिन हजारों अज्ञात एस्टेरॉयड्स का अस्तित्व ग्रह रक्षा तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समय रहते पहचान और तैयारी ही इस खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। पृथ्वी की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष पर नजर रखना अब केवल खोज का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।


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