स्विस बैंकों में भारतीयों की कुल जमा राशि घटी, लेकिन सीधे खातों में 50% से ज्यादा उछाल; बदली निवेश की तस्वीर
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच वर्ष 2018 से ‘ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन’ (एईओआई) व्यवस्था लागू है। इसके तहत दोनों देशों के बीच हर साल बैंक खातों से जुड़ी जरूरी वित्तीय जानकारी साझा की जाती है।

नई दिल्ली : स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक (स्विस नेशनल बैंक-एसएनबी) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों, कंपनियों और संस्थानों से जुड़ी कुल जमा राशि में गिरावट दर्ज की गई है। भारतीयों का कुल धन 8 प्रतिशत से अधिक घटकर 3.25 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 36,793 करोड़ रुपये) रह गया। पिछले कुछ वर्षों में यह पहली बार नहीं है, जब भारतीय धन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन इस बार आंकड़ों ने एक अलग प्रवृत्ति की ओर संकेत किया है।
वित्तीय संस्थानों के जरिए रखे गए फंड में आई कमी
एसएनबी के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय धन का सबसे बड़ा हिस्सा उन फंडों का है जो अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से स्विस बैंकिंग प्रणाली में रखे गए हैं। इस श्रेणी में वर्ष 2025 के दौरान करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका आकार घटकर लगभग 2.6 अरब स्विस फ्रैंक रह गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेश के बदलते विकल्पों के कारण इस वर्ग में कमी देखी गई है।
सीधे बैंक खातों में जमा राशि में बड़ा उछाल
कुल जमा राशि में कमी के बावजूद एक अहम बदलाव सामने आया है। व्यक्तिगत और संस्थागत ग्राहकों द्वारा सीधे स्विस बैंकों में रखी गई जमा राशि यानी कस्टमर डिपॉजिट में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह राशि बढ़कर 524 मिलियन स्विस फ्रैंक (करीब 6,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय निवेशक और कारोबारी अब अधिक पारदर्शी और सीधे बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बीआईएस के आंकड़े भी दिखा रहे सकारात्मक रुझान
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) की ‘लोकेशनल बैंकिंग स्टैटिस्टिक्स’ भी इसी बदलाव की पुष्टि करती है। बीआईएस के अनुसार, भारतीय व्यक्तियों की जमा राशि में 2025 के दौरान करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 89.73 मिलियन डॉलर (लगभग 780 करोड़ रुपये) तक पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय ग्राहकों की ओर से वैध और नियमित बैंकिंग चैनलों का उपयोग बढ़ा है।
हर स्विस खाता ‘काला धन’ नहीं
स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन को लेकर लंबे समय से देश में ‘काले धन’ की बहस होती रही है। हालांकि, स्विट्जरलैंड के अधिकारी लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि वहां जमा सभी संपत्तियों को अवैध या काला धन नहीं माना जा सकता। कई कंपनियां, कारोबारी समूह और निवेशक कानूनी रूप से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए केवल जमा राशि के आधार पर किसी धन को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।
भारत-स्विट्जरलैंड समझौते से बढ़ी पारदर्शिता
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच वर्ष 2018 से ‘ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन’ (एईओआई) व्यवस्था लागू है। इसके तहत दोनों देशों के बीच हर साल बैंक खातों से जुड़ी जरूरी वित्तीय जानकारी साझा की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर चोरी और अवैध संपत्ति पर लगाम लगाना है। जानकारों का कहना है कि इस प्रणाली के लागू होने के बाद विदेशी खातों में गैरकानूनी धन छिपाना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है।
विदेशी जमा के मामले में भारत 46वें स्थान पर पहुंचा
स्विस बैंकों में विदेशी ग्राहकों की जमा राशि के आधार पर तैयार वैश्विक सूची में भारत की स्थिति में सुधार हुआ है। भारत दो स्थान ऊपर चढ़कर 46वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि, शीर्ष देशों की तुलना में भारतीय जमा राशि अभी भी काफी कम है। ब्रिटेन लगभग 192 अरब स्विस फ्रैंक के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि अमेरिका दूसरे स्थान पर है।
पड़ोसी देशों की स्थिति भी बदली
दक्षिण एशियाई देशों की बात करें तो पाकिस्तान की कुल जमा राशि घटकर 257 मिलियन स्विस फ्रैंक रह गई है। दूसरी ओर, बांग्लादेश के धन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में बांग्लादेश से जुड़े फंड में करीब 43 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जिससे वह क्षेत्र के उन देशों में शामिल हो गया जहां स्विस बैंकों में जमा राशि तेजी से बढ़ी है।
बदलते रुझान का संकेत
ताजा आंकड़े यह दर्शाते हैं कि स्विस बैंकिंग प्रणाली में भारतीयों की कुल संपत्ति भले ही कम हुई हो, लेकिन सीधे और पारदर्शी बैंकिंग चैनलों के माध्यम से जमा राशि में तेजी आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय निवेशक और कारोबारी अब अधिक वैध, व्यवस्थित और नियमों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं।


