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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर लगी रोक, ट्रंप के नए टैरिफ विवाद के बीच अहम बैठक टली

सूत्रों के अनुसार, हाल के घटनाक्रम विशेषकर अमेरिका में टैरिफ को लेकर हुए कानूनी और राजनीतिक फैसलों के मद्देनजर दोनों पक्षों ने स्थिति का समुचित आकलन करने के लिए अतिरिक्त समय लेने का निर्णय किया है। नई तारीख पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर लगी रोक, ट्रंप के नए टैरिफ विवाद के बीच अहम बैठक टली
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड डील) पर होने वाली अहम वार्ता फिलहाल टल गई है। 23 फरवरी से वॉशिंगटन में शुरू होने वाली दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की बैठक को आपसी सहमति से आगे बढ़ा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, हाल के घटनाक्रम विशेषकर अमेरिका में टैरिफ को लेकर हुए कानूनी और राजनीतिक फैसलों के मद्देनजर दोनों पक्षों ने स्थिति का समुचित आकलन करने के लिए अतिरिक्त समय लेने का निर्णय किया है। नई तारीख पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

तीन दिन की अहम वार्ता प्रस्तावित थी

इस बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन मुख्य वार्ताकार के रूप में हिस्सा लेने वाले थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल को तीन दिनों तक अमेरिकी अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी थी। वार्ता का मुख्य उद्देश्य अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देना था, ताकि मार्च तक हस्ताक्षर और अप्रैल से लागू करने की योजना को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर बनी अनिश्चितता ने इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

ट्रंप के नए टैरिफ फैसलों से बढ़ी जटिलता

पूरा घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित नए टैरिफ फैसलों से जुड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने पहले सभी देशों पर 10% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15% तक करने की बात कही गई। इससे पहले 2025 में अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर कुल 50% तक टैरिफ लगाया था। बाद में इनमें से 25% शुल्क वापस ले लिया गया, लेकिन शेष शुल्क अब भी प्रभावी है। यदि नया 15% टैरिफ लागू होता है, तो यह पहले से लागू आयात शुल्क के ऊपर जोड़ा जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उत्पाद पर पहले 5% शुल्क लागू है, तो नया टैरिफ लागू होने पर कुल शुल्क 20% तक पहुंच सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ने और प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ने की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कानूनी अनिश्चितता

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ को अवैध करार दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) जैसे कानूनों का इस्तेमाल करते हुए अपने अधिकारों से अधिक कदम उठाए। इस फैसले के बाद अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर स्थिति जटिल हो गई है। हालांकि प्रशासन ने नए प्रावधानों जैसे ट्रेड एक्ट के सेक्शन १२२ का सहारा लेते हुए सीमित अवधि के लिए टैरिफ लगाने की बात कही है, लेकिन यह कदम भी अस्थायी माना जा रहा है और इसके लिए आगे कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है। यही कारण है कि भारत और अमेरिका दोनों ही पक्ष कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं।

मार्च तक हस्ताक्षर का लक्ष्य था

दोनों देशों ने पहले इस वर्ष मार्च तक अंतरिम ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने और अप्रैल से इसे लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। यह समझौता व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। अंतरिम समझौते का उद्देश्य कुछ प्रमुख क्षेत्रों में टैरिफ बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच को बेहतर बनाना और निवेश को प्रोत्साहित करना था। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों ने इस समय-सीमा को प्रभावित किया है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के कुल निर्यात का लगभग 18% हिस्सा अमेरिका को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 186 अरब डॉलर रहा। सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में भारत की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता उल्लेखनीय है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात शुल्क में वृद्धि स्थायी रूप लेती है, तो भारतीय कंपनियों को मूल्य निर्धारण, आपूर्ति श्रृंखला और प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में नई रणनीति बनानी पड़ेगी।

अमेरिकी घरेलू राजनीति का असर

टैरिफ मुद्दा अमेरिका की घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। ट्रंप प्रशासन ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत घरेलू उद्योगों की सुरक्षा पर जोर दे रहा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कार्यपालिका और विधायिका के अधिकारों की सीमा पर बहस को फिर से जीवित कर दिया है। इन परिस्थितियों में अमेरिका की व्यापार नीति में निरंतरता और स्पष्टता को लेकर प्रश्न बने हुए हैं। भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार इस अनिश्चितता के बीच संतुलित रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

रणनीतिक पहल

सूत्रों का कहना है कि बैठक को स्थगित करना दोनों देशों के बीच मतभेद का संकेत नहीं है, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने की रणनीतिक पहल है। आगामी हफ्तों में दोनों पक्ष नई तारीख तय कर सकते हैं। इस बीच, अधिकारी स्तर पर संवाद जारी रहेगा ताकि संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके और वार्ता के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को देखते हुए व्यापार वार्ता अंततः आगे बढ़ेगी, लेकिन मौजूदा कानूनी और नीतिगत अनिश्चितता के कारण समय-सीमा में बदलाव संभव है।

अमेरिकी नीतिगत फैसलों का व्यापक असर

भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील पर वार्ता का टलना वैश्विक व्यापार पर अमेरिकी नीतिगत फैसलों के व्यापक असर को दर्शाता है। टैरिफ से जुड़ी कानूनी चुनौतियां और राजनीतिक परिस्थितियां दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को प्रभावित कर रही हैं।

फिलहाल, दोनों देश स्थिति का आकलन कर आगे की रणनीति तय करने में जुटे हैं। व्यापारिक समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नई वार्ता कब और किन शर्तों पर आगे बढ़ेगी।


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