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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने कहा, तैयार कर रहे व्यापार समझौते का मसौदा, कृषि में सीमित सुरक्षा बरकरार
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में भारत ने अभी तक अमेरिकी मानकों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, जबकि अमेरिका का मानना है कि उसके उत्पाद सुरक्षित और वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। इस दिशा में एक मान्यता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके तहत भारत को अपनी घरेलू राजनीतिक और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन भारत के साथ घोषित व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटा है। इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों पर लगाए जाने वाले 13.5 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर शून्य करने पर सहमत हुआ है। हालांकि, भारत को अपने कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों में आयात सुरक्षा बनाए रखने की अनुमति मिलेगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने एक साक्षात्कार में इस समझौते के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी और इसे दोनों देशों के लिए “रोमांचक अवसर” बताया।
औद्योगिक सामानों पर टैरिफ शून्य
ग्रीर के अनुसार, भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त करेगा। इससे मशीनरी, विनिर्माण उपकरण और अन्य औद्योगिक वस्तुओं के व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत ने व्यापार में मौजूद कई तकनीकी बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनाई है। ग्रीर ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में भारत ने अभी तक अमेरिकी मानकों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, जबकि अमेरिका का मानना है कि उसके उत्पाद सुरक्षित और वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। इस दिशा में एक मान्यता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके तहत भारत को अपनी घरेलू राजनीतिक और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
कृषि क्षेत्र में सीमित रियायतें
हालांकि भारत औद्योगिक क्षेत्र में व्यापक रियायतें दे रहा है, लेकिन कृषि क्षेत्र के कुछ संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा बरकरार रहेगी। ग्रीर ने बताया कि मेवे, शराब, स्पिरिट, फल और सब्जियों जैसी कई वस्तुओं पर भारत के टैरिफ शून्य हो जाएंगे। हालांकि, उन्होंने चावल, बीफ, सोयाबीन, चीनी और डेयरी उत्पादों का उल्लेख नहीं किया। ये वही कृषि उत्पाद हैं जिन्हें भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ अपने व्यापार समझौते से भी बाहर रखा था। इससे संकेत मिलता है कि भारत ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा नीति को जारी रखा है।
रूसी तेल आयात पर भी चर्चा
समझौते के संदर्भ में भारत के रूसी तेल आयात में कमी के मुद्दे पर भी बात हुई। ग्रीर ने कहा कि भारत पिछले वर्ष के अंत से ही रूसी तेल के आयात में कटौती पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा खरीद में विविधता लाने के लिए अमेरिका और वेनेजुएला को विकल्प के रूप में देख रहा है और इसे “सही चुनाव” बताया। हालांकि, टैरिफ दरों में बदलाव की प्रभावी तिथि के बारे में ग्रीर ने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा कि समझौते को आधिकारिक रूप देने की प्रक्रिया अभी जारी है।
भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ बरकरार
अमेरिका भारत पर कुछ श्रेणियों में 18 प्रतिशत टैरिफ कायम रखेगा। ग्रीर के अनुसार, इसका कारण दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन का मुद्दा है। उन्होंने कहा, “हमारा भारत के साथ बड़ा व्यापार घाटा है, इसलिए कुछ टैरिफ जारी रहेंगे।” इसके बावजूद, इस समझौते के बाद भारत उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन पर ट्रंप प्रशासन ने अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगाए हैं।
कम टैरिफ वाले देशों में भारत
नई व्यवस्था के तहत भारत पर लागू टैरिफ चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसी अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम हैं। भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ अब ब्रिटेन (10 प्रतिशत), यूरोपीय संघ (15 प्रतिशत), स्विट्जरलैंड (15 प्रतिशत), जापान (15 प्रतिशत) और दक्षिण कोरिया (15 प्रतिशत) जैसे अमेरिका के करीबी सहयोगियों के बराबर या उनके आसपास हैं। इसके विपरीत, ब्राजील (50 प्रतिशत), म्यांमार (40 प्रतिशत), लाओस (40 प्रतिशत), चीन (37 प्रतिशत) और दक्षिण अफ्रीका (30 प्रतिशत) जैसे देशों पर अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ लागू हैं।
अमेरिकी सीनेटर का बयान
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस समझौते को रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों पर कार्रवाई करके रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है। भारत पर टैरिफ इसका उदाहरण है कि हालात कैसे बदल सकते हैं।” ग्राहम ने दावा किया कि भारत अब रूस से कम तेल खरीद रहा है और यदि अन्य बड़े खरीदार भी ऐसा करें, तो यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने में मदद मिल सकती है।
दोनों देशों के लिए अवसर
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देगा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा। भारत के लिए कम टैरिफ व्यवस्था निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकती है, जबकि अमेरिकी उद्योगों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। हालांकि, समझौते के सभी प्रावधानों के सार्वजनिक होने और लागू होने के बाद ही इसके वास्तविक आर्थिक प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल, मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है और दोनों देश इसे औपचारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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