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भारत-EU की डील पर विश्व की नजर में रणनीतिक विजेता बना भारत, अंतरराष्ट्रीय मीडिया व वैश्विक नेताओं ने की तारीफ

भारत-EU की डील पर विश्व की नजर में रणनीतिक विजेता बना भारत, अंतरराष्ट्रीय मीडिया व वैश्विक नेताओं ने की तारीफ
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नई दिल्ली/ब्रसेल्स। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिल रही है। जिस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ की संज्ञा दी गई, उसे अब वैश्विक मीडिया, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूरोपीय नेताओं ने आर्थिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से ऐतिहासिक करार दिया है। कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को इस समझौते का “रणनीतिक विजेता” बताया है। यह समझौता न केवल व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है, बल्कि इसे बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका का संकेत भी माना जा रहा है।

ब्रिटिश मीडिया ने कहा- मोदी असली विजेता

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द टेलीग्राफ में जेम्स क्रिस्प के लेख का शीर्षक ही इस समझौते की महत्ता को दर्शाता है— “यूरोपीय संघ के साथ ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ में मोदी असली विजेता हैं।” लेख में तर्क दिया गया है कि इस समझौते से भारत ने रणनीतिक रूप से बड़ी बढ़त हासिल की है। लेख के अनुसार, ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित है, भारत ने संतुलित और दूरदर्शी कूटनीति के जरिए खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है।

ब्लूमबर्ग: ‘दुनिया के रास्ते मोदी की ओर’

ब्लूमबर्ग के डैन स्ट्रंपफ ने अपने विश्लेषणात्मक लेख “ट्रंप से बचाव के लिए दुनिया के सभी रास्ते मोदी की ओर” में इस समझौते को एक उभरते वैश्विक रुझान का संकेत बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत और ईयू के बीच हुआ यह व्यापक समझौता दर्शाता है कि नई दिल्ली वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में केंद्रीय भूमिका निभाने को तैयार है। भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक स्थिर और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। ब्लूमबर्ग ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका-यूरोप संबंधों में बदलते समीकरणों के बीच भारत एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रहा है।

अमेरिकी मीडिया ने भी सराहा समझौता

वाल स्ट्रीट जर्नल, न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन और बीबीसी जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी इस समझौते के व्यापक प्रभावों पर प्रकाश डाला है। इन प्रकाशनों ने इसे वैश्विक व्यापार के नए अध्याय की शुरुआत बताते हुए कहा कि यह समझौता यूरोप और एशिया के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा। विश्लेषकों के मुताबिक, यह एफटीए आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण, प्रौद्योगिकी सहयोग और बाजार पहुंच को बढ़ावा देगा।

पाकिस्तानी विश्लेषक की स्वीकारोक्ति

इस समझौते की गूंज पाकिस्तान तक भी सुनाई दी। फॉक्स न्यूज पर चर्चा के दौरान पाकिस्तानी पत्रकार कमर चीमा ने स्वीकार किया कि इस समझौते से भारत को बड़ा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कई प्रमुख क्षेत्रों में टैरिफ शून्य होने से भारतीय उत्पादों की यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बढ़ेगी। उनके अनुसार, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश अब यूरोपीय बाजार में भारत से प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई महसूस करेंगे। यह टिप्पणी दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय व्यापारिक समीकरणों में संभावित बदलाव की ओर भी संकेत करती है।

यूरोपीय नेताओं ने बताया ऐतिहासिक कदम

इस समझौते को यूरोपीय नेतृत्व ने भी सकारात्मक और रणनीतिक कदम बताया है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टाकर, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन, फ्रांस के विदेश व्यापार एवं आर्थिक मामलों के मंत्री निकोलस फोरिसियर और यूरोपीय संसद सदस्य सैंड्रो गोजी सहित कई नेताओं ने इसे भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। इन नेताओं का मानना है कि यह समझौता न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत-ईयू संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देगा।

आर्थिक और भू-राजनीतिक संतुलन का संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, यह एफटीए ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था अनिश्चितताओं से गुजर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला संकटों के बीच भारत और ईयू का यह समझौता स्थिरता और सहयोग का संदेश देता है। भारत के लिए यह समझौता विनिर्माण, कृषि, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और आईटी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। वहीं, यूरोप को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के साथ गहरा आर्थिक जुड़ाव मिलेगा।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते ने भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है, जो वैश्विक व्यापार और कूटनीति दोनों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व शैली को कई अंतरराष्ट्रीय लेखों में व्यावहारिक, संतुलित और दीर्घकालिक रणनीति पर आधारित बताया गया है। भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और संतुलनकारी रुख ने उसे पश्चिम और वैश्विक दक्षिण दोनों के लिए एक विश्वसनीय साझेदार बनाया है।

व्यापार से आगे की साझेदारी

भारत-ईयू एफटीए को केवल एक व्यापारिक दस्तावेज के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति संरचना में भारत की बढ़ती भूमिका के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।


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