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Operation Absolute Resolve: वेनेजुएला में फिल्मी अंदाज में हुई मादुरो की गिरफ्तारी, अगस्त से ही साए की तरह मादुरो के पीछे थी CIA

अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ जनरल ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि जिस तरह से इस ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी, उतनी ही गहन तैयारी और बार-बार रिहर्सल भी की गई।

Operation Absolute Resolve: वेनेजुएला में फिल्मी अंदाज में हुई मादुरो की गिरफ्तारी, अगस्त से ही साए की तरह मादुरो के पीछे थी CIA
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वाशिंगटन: वेनेजुएला में अमेरिका द्वारा चलाया गया असाधारण सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ (Operation Absolute Resolve) किसी हाई-बजट हॉलीवुड फिल्म की पटकथा जैसा प्रतीत हो रहा है। शनिवार को इस अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया मादुरो को भारी सुरक्षा व्यवस्था से लैस उनके सुरक्षित आवास से कब्जे में लेकर सुरक्षित ठिकाने की ओर ले जाया गया। अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों की इस संयुक्त कार्रवाई ने पूरी दुनिया का ध्यान वेनेजुएला संकट की ओर खींच लिया है।

‘मजबूत पटकथा, उतनी ही सख्त रिहर्सल’

अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ जनरल ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि जिस तरह से इस ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी, उतनी ही गहन तैयारी और बार-बार रिहर्सल भी की गई। उन्होंने कहा कि मजबूत पटकथा और सटीक अभ्यास का ही नतीजा है कि यह अभियान बिल्कुल तय योजना के अनुसार अंजाम दिया गया। अमेरिकी बलों ने पहले चरण में वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम को पंगु बना दिया। इसके साथ ही साइबर हमलों के जरिए देश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे जमीनी कार्रवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो सकीं।

पांच महीने से सीआइए की गुप्त निगरानी

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए पिछले पांच महीनों से निकोलस मादुरो की गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए थी। मादुरो की दिनचर्या, सुरक्षा व्यवस्था, आवाजाही और ठिकानों की लगातार निगरानी की जा रही थी। यह भी जानकारी सामने आई है कि अभियान से पहले मादुरो को सत्ता छोड़ने और देश छोड़ने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का दावा

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने इस अभियान को अमेरिकी सेना की असाधारण क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह का ऑपरेशन केवल अमेरिकी सेना ही अंजाम दे सकती है। जनरल केन के अनुसार, इस अभियान में वायुसेना, नौसेना और इंटेलिजेंस यूनिट्स के साथ-साथ साइबर कमांड और स्पेस कमांड की भी अहम भूमिका रही। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी सैन्य और खुफिया इकाइयों की ‘अद्भुत भागीदारी’ की जमकर सराहना की।

न्याय विभाग के समर्थन में चलाया गया अभियान

जनरल केन ने बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिकी न्याय विभाग के समर्थन में चलाया गया था। न्याय विभाग दो आरोपित व्यक्तियों—निकोलस मादुरो और सिलिया मादुरो की तलाश कर रहा था। इस अभियान में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सैन्य बलों की सभी शाखाओं ने मिलकर काम किया।

150 से ज्यादा लड़ाकू विमानों की तैनाती

ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व के तहत 150 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात किए गए। इन विमानों ने 20 अलग-अलग जमीनी और समुद्री ठिकानों से उड़ान भरी। इसमें बॉम्बर, फाइटर जेट, खुफिया, टोही और सर्विलांस विमान के साथ-साथ रोटरी विंग एयरक्राफ्ट भी शामिल थे। इसके अलावा, रिमोट से संचालित ड्रोन के जरिए अतिरिक्त निगरानी और कवरेज प्रदान की गई।

लादेन मिशन की ‘नाइट स्टॉकर’ यूनिट भी शामिल

मादुरो को पकड़ने के अभियान में अमेरिकी सेना की एलीट ‘नाइट स्टॉकर’ हेलीकॉप्टर यूनिट भी शामिल थी। यह वही यूनिट है, जिसने 2011 में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाए गए अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। इस यूनिट की तैनाती ने ऑपरेशन की संवेदनशीलता और गंभीरता को और रेखांकित कर दिया।

रडार से बचने के लिए बेहद नीची उड़ान

जब बचाव और कब्जा करने वाला दल वेनेजुएला की ओर बढ़ रहा था, तब हेलीकॉप्टरों ने रडार से बचने के लिए अत्यंत नीची उड़ान भरी। जनरल केन के मुताबिक, हेलीकॉप्टर समुद्र की सतह से महज 100 फीट ऊपर उड़ते हुए वेनेजुएला में दाखिल हुए। इस दौरान स्पेस कमांड और साइबर कमांड की मदद से काराकास तक एक सुरक्षित हवाई गलियारा तैयार किया गया।

ऊपर से लड़ाकू विमानों की सुरक्षा

हेलीकॉप्टरों और जमीनी बलों की सुरक्षा के लिए ऊपर से नौसेना, वायुसेना, मरीन कॉर्प्स और एयर नेशनल गार्ड के लड़ाकू विमान तैनात रहे। जैसे ही अभियान दल काराकास के नजदीक पहुंचा, संयुक्त वायु इकाई ने वेनेजुएला की वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय करना शुरू कर दिया। इसका उद्देश्य हेलीकॉप्टरों और जमीनी बलों की सुरक्षित आवाजाही और वापसी सुनिश्चित करना था।

अगस्त से ही शुरू हो गई थी खुफिया तैयारी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो के खिलाफ खुफिया अभियान की शुरुआत पिछले साल अगस्त में ही कर दी गई थी। अमेरिकी तैयारियों को शीत युद्ध काल के गुप्त अभियानों की याद दिलाने वाला बताया जा रहा है। सुरक्षा कारणों से मादुरो छह से आठ अलग-अलग ठिकानों पर रहते थे। अक्सर यह तय ही नहीं होता था कि वह रात कहां बिताएंगे, जिससे उनकी सुरक्षा और जटिल हो जाती थी।

सेफ हाउस की बनाई गई प्रतिकृति

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीआइए और अन्य खुफिया एजेंसियों ने मादुरो की दिनचर्या, खान-पान और यहां तक कि उनके पालतू जानवरों तक की जानकारी जुटाई। खुफिया एजेंटों ने मादुरो के सेफ हाउस के चप्पे-चप्पे का अध्ययन किया आने-जाने के रास्तों से लेकर बेडरूम तक। इसके आधार पर सेफ हाउस की एक प्रतिकृति तैयार की गई, जहां बार-बार रिहर्सल कराई गई।





दो घंटे 20 मिनट में पूरा हुआ अभियान

पूरी तैयारी के बाद क्रिसमस और नए साल के आसपास ऑपरेशन चलाने की योजना थी। अंततः दो घंटे 20 मिनट चले इस अभियान में अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने बिजली की रफ्तार से मादुरो को अपने कब्जे में ले लिया। सेना को यह भी जानकारी थी कि मादुरो के आवास में स्टील के दरवाजे हैं, जिन्हें काटने के लिए ब्लोटॉर्च की आवश्यकता पड़ सकती है।

देश छोड़ने का विकल्प भी दिया गया था

खुफिया कार्रवाई के समानांतर अमेरिका ने मादुरो पर कूटनीतिक दबाव भी बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 23 दिसंबर को मादुरो को सत्ता छोड़कर तुर्किये चले जाने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।

ट्रंप के पहले कार्यकाल से चल रही थी योजना

सीएनएन से बातचीत में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने दावा किया कि वेनेजुएला पर कार्रवाई की योजना डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही तैयार कर ली गई थी। उस समय यह योजना ट्रंप के सामने रखी गई थी, लेकिन तब उस पर आगे काम नहीं हो पाया।

भारी तबाही और जानमाल का नुकसान

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व में एफ-18, एफ-22, एफ-35 और बी-1 बॉम्बर जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान वेनेजुएला का एक प्रमुख सैन्य अड्डा तबाह हो गया। वहीं चार शहरों में सात स्थानों पर हुई बमबारी में करीब 40 लोगों की मौत होने की भी खबर है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए मोड़ के संकेत

मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप ने न केवल वेनेजुएला की राजनीति, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी नए मोड़ के संकेत दे दिए हैं। आने वाले दिनों में इस अभियान के राजनीतिक, कूटनीतिक और मानवीय प्रभावों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।


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