Top
Begin typing your search above and press return to search.

बाब-अल-मंदेब के करीब हूतियों का कब्जा, सऊदी अरब की तेल सप्लाई पर बढ़ा संकट; MBS ने ट्रंप से मांगी मदद

ईरान-अमेरिका संघर्ष और लाल सागर तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं का असर सऊदी अरब के तेल कारोबार पर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब का तेल निर्यात करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 23 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है।

बाब-अल-मंदेब के करीब हूतियों का कब्जा, सऊदी अरब की तेल सप्लाई पर बढ़ा संकट; MBS ने ट्रंप से मांगी मदद
X

अदन : यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने लाल सागर के रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह द्वीप बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में हूतियों की मौजूदगी ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल बाब-अल-मंदेब की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर सऊदी अरब के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि लाल सागर के रास्ते तेल परिवहन पहले ही प्रभावित है।

बाब-अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा

पेरिम द्वीप पर नियंत्रण मिलने के बाद हूती लड़ाके बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच गए हैं। ईरान लंबे समय से हूतियों का समर्थन करता रहा है और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच तेहरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जरूरत पड़ने पर वह बाब-अल-मंदेब जैसे दूसरे अहम समुद्री मार्गों को भी बाधित कर सकता है। पिछले दो दिनों में हूती लड़ाकों ने यमन की सरकारी सेना से लाल सागर के कई रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा किया है। तटीय शहर धुबाब भी उनके नियंत्रण में चला गया है। इससे पहले गुरुवार को हूतियों ने महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया था। शुक्रवार को सऊदी लड़ाकू विमानों ने मोचा एयरपोर्ट पर हमला किया। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को नुकसान

हूती और सऊदी समर्थित सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का असर सऊदी अरब के तेल ढांचे पर भी पड़ने लगा है। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की सूचना है। पाइपलाइन के ऊपर घना काला धुआं दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। सऊदी सरकारी मीडिया के मुताबिक, शुक्रवार देर रात इस पाइपलाइन के जरिए तेल की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको भी इसके जरिए अपने कच्चे तेल को निर्यात करती है। ऐसे में पाइपलाइन पर असर पड़ने से सऊदी तेल आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है।

30 साल के निचले स्तर पर सऊदी तेल निर्यात

ईरान-अमेरिका संघर्ष और लाल सागर तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं का असर सऊदी अरब के तेल कारोबार पर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब का तेल निर्यात करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 23 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। इसे पिछले करीब तीन दशकों के सबसे निचले स्तरों में माना जा रहा है। अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों प्रमुख समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक आवागमन बाधित रहता है, तो इसका असर सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। इन दोनों मार्गों का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार में बड़ा महत्व है। ऐसे में इनके बाधित होने से तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

ईरान ने सऊदी-हूती बातचीत पर दिया जोर

दिलचस्प बात यह है कि हूतियों की बढ़त के बीच ईरान ने सऊदी अरब और हूती नेतृत्व के बीच बातचीत की जरूरत पर जोर दिया है। ईरान का कहना है कि सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए लाल सागर का समुद्री मार्ग खुला रहना चाहिए। तेहरान का यह रुख ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। एक तरफ हूतियों का सऊदी समर्थित बलों के साथ संघर्ष तेज हुआ है, वहीं दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का असर पूरे पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है।

MBS ने ट्रंप से मांगी सैन्य मदद

हूतियों की बढ़ती ताकत और बाब-अल-मंदेब के करीब उनकी मौजूदगी ने सऊदी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत कर सैन्य सहायता की मांग की है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच दो बार बातचीत हुई। हालांकि, ट्रंप ने फिलहाल क्षेत्र में सीधे अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है। अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि ईरान के साथ पहले से चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका फिलहाल पश्चिम एशिया में एक और मोर्चा खोलने से बचना चाहता है।

लाल सागर पर दुनिया की नजर

बाब-अल-मंदेब के आसपास हूतियों की मौजूदगी ने अब लाल सागर की सुरक्षा को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है। यदि यहां जहाजों का आवागमन बड़े स्तर पर प्रभावित होता है, तो ऊर्जा बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सऊदी अरब, अमेरिका और हूती बलों के बीच घटनाक्रम यह तय करेगा कि यह संकट कितना गहराता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it