फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, पेरिस से बोर्डो तक आगजनी और लूटपाट; हजारों गिरफ्तार
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के दौरान आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जबकि कई वाहनों और दुकानों को निशाना बनाया गया। मार्सेय समेत अन्य शहरों में भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। ऐतिहासिक इमारतों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

पेरिस: फ्रांस में महंगाई, बढ़ती आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाल स्थिति के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन हिंसक रूप लेता नजर आ रहा है। शनिवार को कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद रविवार को भी राजधानी पेरिस सहित कई इलाकों में तनाव बना रहा। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के दौरान आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जबकि कई वाहनों और दुकानों को निशाना बनाया गया। मार्सेय समेत अन्य शहरों में भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। ऐतिहासिक इमारतों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इन घटनाओं ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।
पेरिस में फिर भड़की हिंसा
रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को पेरिस के प्लेस डी ला रिपब्लिक में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान भीड़ ने कई वाहनों में आग लगा दी। मौके पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद थे। मार्सेय में भी कुछ लोगों ने दुकानों में घुसने की कोशिश की, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। हिंसा थमने के बाद रविवार सुबह कई शहरों में सफाई और नुकसान का आकलन शुरू किया गया। पेरिस के प्रमुख इलाकों में टूटे शीशे, उखड़े पत्थर और सड़कों पर बिखरा मलबा दिखाई दिया। सार्वजनिक संपत्तियों और दुकानों को हुए नुकसान ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है।
स्कूलों की बदहाली और महंगाई के खिलाफ आंदोलन
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में स्कूलों की स्थिति सुधारना, शिक्षकों की कमी दूर करना, महंगाई पर नियंत्रण और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश बढ़ाना शामिल है। आंदोलन में छात्र संगठनों के साथ ट्रेड यूनियनों और कर्मचारियों ने भी भाग लिया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 17 अक्टूबर को फ्रांस के करीब 140 शहरों में प्रदर्शन हुए। इनमें बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस, मार्सेय और बोर्डो सहित कई शहरों में शांतिपूर्ण विरोध के बीच हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुईं। सरकार ने हिंसा के लिए अतिवामपंथी समूहों और आपराधिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की सभी मांगों और हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका को अलग-अलग देखना जरूरी है।
143 साल पुराना सिटी हॉल आग की चपेट में
लीमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल की इमारत में आग लगने की घटना ने विशेष चिंता पैदा की। शहर के मेयर गिलाउम गेरां के मुताबिक, आग से इमारत का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऐतिहासिक भवन को निशाना बनाने की योजना पहले से तैयार की गई थी। घटना के दौरान इमारत के भीतर मौजूद लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर डर महसूस हुआ। बताया गया कि करीब 143 साल पुरानी यह इमारत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी सुरक्षित रही थी। इसके क्षतिग्रस्त होने से ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। कई अन्य शहरों में भी सार्वजनिक संपत्तियों और वाहनों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।
रोलेक्स, एपल और लुई विटन के स्टोर निशाने पर
हिंसा के दौरान कई बड़े ब्रांड के स्टोर और सुपरमार्केट भी प्रभावित हुए। बोर्डो के मेयर तोमा काजेनाव के अनुसार, शहर में लगभग 100 दुकानों में लूटपाट हुई। इनमें लुई विटन का स्टोर भी शामिल बताया गया है। लिली में एपल के एक स्टोर में तोड़फोड़ की खबर सामने आई। सुपरमार्केट कंपनी कैरफोर के सीईओ अलेक्जांद्र बोम्पार के मुताबिक, कंपनी की 50 दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं, जबकि 20 में लूटपाट की गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में हर्मेस और रोलेक्स जैसे लग्जरी ब्रांड के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के दृश्य भी सामने आए। परफ्यूम स्टोर और दवा की दुकानों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। इन घटनाओं से कारोबारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
अल्बानिया और बेल्जियम में भी प्रदर्शन उग्र
यूरोप के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव देखने को मिला। अल्बानिया की राजधानी तिराना में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्र नेतृत्व वाला आंदोलन लगातार छठे दिन हिंसक रहा। शिक्षा मंत्रालय के बाहर पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री ईडी रामा ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी। बेल्जियम के ब्रुसेल्स और लीज में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर बोतलें और अन्य वस्तुएं फेंकीं।


