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एक और देश में बच्चों के इंटरनेट मीडिया के उपयोग पर सख्ती: 15 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के तहत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट और यूट्यूब जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

एक और देश में बच्चों के इंटरनेट मीडिया के उपयोग पर सख्ती: 15 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध की तैयारी
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पेरिस: फ्रांस में बच्चों और किशोरों पर इंटरनेट मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर सरकार अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। फ्रांसीसी सरकार सितंबर 2026 से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया साइटों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही हाई स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। यह कदम ऑनलाइन सामग्री के बच्चों के मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर बढ़ती सार्वजनिक चिंता के बीच उठाया जा रहा है।

सरकार की प्रस्तावित योजना
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के तहत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट और यूट्यूब जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, हाई स्कूल परिसरों में मोबाइल फोन ले जाने और इस्तेमाल पर भी सख्त प्रतिबंध लगाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित होगा और ऑनलाइन प्लेटफार्मों से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकेगा।

बढ़ती चिंता और हिंसा का मुद्दा
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल के महीनों में बच्चों और किशोरों के बीच बढ़ती हिंसा, आक्रामक व्यवहार और असंवेदनशीलता के लिए इंटरनेट मीडिया को जिम्मेदार कारकों में से एक बताया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद हिंसक, भड़काऊ और भ्रामक सामग्री बच्चों के मनोविज्ञान को प्रभावित कर रही है। मैक्रों ने कई मंचों पर यह चिंता जाहिर की है कि डिजिटल दुनिया बच्चों के लिए “बिना नियंत्रण का प्रयोगशाला” बनती जा रही है।

आस्ट्रेलिया मॉडल से प्रेरणा
राष्ट्रपति मैक्रों ने संकेत दिए हैं कि फ्रांस, इस मामले में आस्ट्रेलिया के मॉडल का अनुसरण कर सकता है। आस्ट्रेलिया में दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्रमुख इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लागू किया गया है। फ्रांसीसी सरकार का मानना है कि इस तरह के कदम से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है और डिजिटल लत पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।

शिक्षा और अभिभावकों की भूमिका
फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध से कक्षा के माहौल में सुधार होगा। पहले से ही कई प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर आंशिक रोक है, लेकिन अब इसे हाई स्कूल स्तर तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार यह भी चाहती है कि अभिभावक बच्चों की डिजिटल आदतों पर अधिक निगरानी रखें और इंटरनेट मीडिया के सुरक्षित उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाएं।

आलोचना और बहस
हालांकि, प्रस्तावित प्रतिबंधों को लेकर देश में बहस भी तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि पूर्ण प्रतिबंध व्यावहारिक रूप से लागू करना मुश्किल होगा और इससे बच्चों के डिजिटल कौशल के विकास पर असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध के बजाय बेहतर डिजिटल शिक्षा, सख्त कंटेंट मॉडरेशन और अभिभावकीय नियंत्रण जैसे उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

आगे की राह
फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि अंतिम निर्णय से पहले तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और इंटरनेट मीडिया कंपनियों से परामर्श किया जाएगा। यदि यह योजना लागू होती है, तो फ्रांस यूरोप के उन अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा जो बच्चों के इंटरनेट मीडिया उपयोग को लेकर कठोर नियम अपना रहे हैं। स्पष्ट है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को लेकर फ्रांस एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि प्रस्तावित प्रतिबंध किस हद तक लागू हो पाते हैं और उनका बच्चों, शिक्षा व्यवस्था और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।


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