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एलेक्सी नवलनी को ‘डार्ट मेंढक’ का जहर दिए जाने का दावा, पांच यूरोपीय देशों ने रूस पर लगाया आरोप

पांचों देशों के विदेश मंत्रालयों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि नवलनी से संबंधित जैविक नमूनों के स्वतंत्र विश्लेषण में ‘एपिबेटिडाइन’ नामक रासायनिक पदार्थ की उपस्थिति की पुष्टि हुई है।

एलेक्सी नवलनी को ‘डार्ट मेंढक’ का जहर दिए जाने का दावा, पांच यूरोपीय देशों ने रूस पर लगाया आरोप
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लंदन/पेरिस/बर्लिन। रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की मौत को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता नजर आ रहा है। शनिवार को पांच यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने संयुक्त बयान जारी कर दावा किया कि नवलनी को एक अत्यंत घातक विष दिया गया था, जो दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले ‘डार्ट मेंढक’ की त्वचा से निकाला जाता है। इन देशों ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनके पास इस जहर के प्रयोग के “साधन, मकसद और अवसर” तीनों मौजूद थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब नवलनी की फरवरी 2024 में जेल में हुई मौत को लेकर पहले से ही वैश्विक स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।

नमूनों में ‘एपिबेटिडाइन’ की पुष्टि

पांचों देशों के विदेश मंत्रालयों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि नवलनी से संबंधित जैविक नमूनों के स्वतंत्र विश्लेषण में ‘एपिबेटिडाइन’ नामक रासायनिक पदार्थ की उपस्थिति की पुष्टि हुई है। एपिबेटिडाइन एक शक्तिशाली विष है, जो दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले कुछ विशेष डार्ट मेंढकों की त्वचा में पाया जाता है। यह पदार्थ अत्यंत घातक माना जाता है और बहुत कम मात्रा में भी गंभीर तंत्रिका प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। बयान में कहा गया कि यह मेंढक रूस में प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता, जिससे इस जहर के स्रोत और उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

रूस पर सीधे आरोप

संयुक्त बयान में कहा गया, रूस के पास इस जहर का प्रयोग करने के साधन, मकसद और अवसर तीनों थे।” यूरोपीय देशों ने आरोप लगाया कि यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोध को दबाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने यह भी घोषणा की कि वे इस मामले को रासायनिक हथियार निषेध संगठन (ओपीसीडब्ल्यू) के समक्ष ले जा रहे हैं। उनका आरोप है कि रूस ने रासायनिक हथियार सम्मेलन (Chemical Weapons Convention) का उल्लंघन किया है।

ब्रिटेन और फ्रांस की कड़ी प्रतिक्रिया

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने बयान में कहा, “रूस नवलनी को एक गंभीर खतरा मानता था। इस प्रकार के जहर का प्रयोग करके रूसी सरकार ने अपने पास मौजूद घृणित हथियारों और राजनीतिक विरोध के प्रति अपने अत्यधिक भय को प्रदर्शित किया है।” फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला दिखाता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने ही नागरिकों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने को तैयार थे। इन बयानों ने यूरोप और रूस के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल बना दिया है।

नवलनी की जेल में मौत

एलेक्सी नवलनी, जो लंबे समय से राष्ट्रपति पुतिन के सबसे मुखर आलोचकों में से एक थे, की फरवरी 2024 में एक रूसी जेल में मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया था। रूसी अधिकारियों ने उस समय कहा था कि नवलनी की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई। हालांकि, पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इस दावे पर संदेह जताया था और स्वतंत्र जांच की मांग की थी।

पत्नी यूलिया नवलनाया का आरोप

नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया ने पिछले वर्ष कहा था कि दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं की जांच में यह पाया गया कि उनके पति को मृत्यु से कुछ समय पहले जहर दिया गया था। नवलनाया ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति पुतिन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम था। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें निराधार बताया।

रासायनिक हथियार निषेध संगठन की भूमिका

यूरोपीय देशों द्वारा ओपीसीडब्ल्यू से शिकायत करने की घोषणा इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायरे में ले जा सकती है। ओपीसीडब्ल्यू का उद्देश्य रासायनिक हथियारों के विकास, उत्पादन और उपयोग पर रोक लगाना है। यदि इस संगठन द्वारा जांच शुरू की जाती है और आरोपों की पुष्टि होती है, तो रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध या कूटनीतिक कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, रूस पहले भी ऐसे आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर

यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक कूटनीतिक और राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं। यूरोप और रूस के बीच संबंध पहले से ही यूक्रेन युद्ध और अन्य मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण हैं। नवलनी प्रकरण ने मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता के सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है। पश्चिमी देशों का कहना है कि राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार मानकों का गंभीर उल्लंघन है।

रूस की चुप्पी

इस ताजा आरोप पर रूस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पहले की तरह वह इन दावों को खारिज कर सकता है। फिलहाल, मामला अंतरराष्ट्रीय जांच और कूटनीतिक बहस के दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ओपीसीडब्ल्यू या अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस मामले में क्या कदम उठाती हैं। नवलनी की मौत और उससे जुड़े आरोपों ने वैश्विक राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो पाएगी, और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी।


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