Top
Begin typing your search above and press return to search.

यूरोपीय संघ ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को घोषित किया आतंकी संगठन, 15 अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाया

यूरोपीय संघ का यह निर्णय ईरान में पिछले महीनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उन पर कथित दमनात्मक कार्रवाई के संदर्भ में लिया गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 6,300 से अधिक लोग मारे गए हैं।

यूरोपीय संघ ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को घोषित किया आतंकी संगठन, 15 अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाया
X
ब्रसेल्स/तेहरान। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हुई कथित हिंसक कार्रवाई के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की सेना की प्रमुख शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। 27 सदस्य देशों वाले इस समूह ने आईआरजीसी को अब आईएसआईएस और अल-कायदा जैसी श्रेणी में रखा है। इस निर्णय से ईरान पर कानूनी और आर्थिक दबाव और बढ़ने की संभावना है। ईयू ने इसके साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडरों समेत 15 ईरानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। प्रतिबंधों की सूची में ईरान में ऑनलाइन सामग्री की निगरानी करने वाले निकायों सहित छह संगठनों को भी शामिल किया गया है।

प्रदर्शन और हिंसा के आरोपों के बाद कड़ा रुख

यूरोपीय संघ का यह निर्णय ईरान में पिछले महीनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उन पर कथित दमनात्मक कार्रवाई के संदर्भ में लिया गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 6,300 से अधिक लोग मारे गए हैं। आर्थिक बदहाली और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन पहले तेहरान तक सीमित थे, लेकिन बाद में देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गए। आरोप है कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों ने सादी वर्दी में कार्रवाई की, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और इंटरनेट सेवाएं तक बंद कर दीं। अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार समूह के अनुसार, अब तक 6,373 लोगों की मौत हो चुकी है और 42,486 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

आईआरजीसी को आतंकवादी सूची में डालने के मायने

आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित करने से यूरोपीय देशों में उसके किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन, संपत्ति और गतिविधियों पर कानूनी रोक लग जाएगी। इसके साथ जुड़े व्यक्तियों की संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और यात्रा प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान के नेतृत्व के प्रति यूरोप के बदलते और कड़े रुख को दर्शाता है। पहले जहां यूरोप परमाणु समझौते को बचाने की कोशिशों में संतुलित नीति अपनाता दिखता था, वहीं अब वह सीधे तौर पर सुरक्षा और मानवाधिकार के मुद्दों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव

यूरोप का यह कदम ऐसे समय आया है, जब ईरान पहले से ही अमेरिका की कड़ी चेतावनियों और संभावित सैन्य कार्रवाई की धमकियों का सामना कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में तेहरान को सख्त संदेश दिया था, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इस बीच, अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अमेरिकी नौसेना ने एक और युद्धपोत यूएसएस डेलबर्ट डी. ब्लैक को क्षेत्र में तैनात किया है। पिछले 48 घंटों में यह युद्धपोत पश्चिम एशिया में पहुंच चुका है। अब इस क्षेत्र में अमेरिकी विध्वंसक जहाजों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जिनमें एक विमानवाहक पोत और तीन अन्य तटीय युद्धपोत शामिल हैं। इसे क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित टकराव की आशंका के रूप में देखा जा रहा है।

रूस की चेतावनी

इस घटनाक्रम के बीच रूस ने संयम बरतने की अपील की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की गुंजाइश अब भी मौजूद है। उन्होंने कहा, “हम सभी पक्षों से संयम बरतने और इस मुद्दे को सुलझाने में किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से बचने का आह्वान करते हैं। तेहरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था अस्थिर हो सकती है।” रूस की यह टिप्पणी इस ओर इशारा करती है कि वैश्विक शक्तियां सीधे सैन्य टकराव से बचने की कोशिश कर रही हैं, हालांकि जमीन पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

ईरान के सामने कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती

यूरोपीय संघ के फैसले से ईरान को न केवल आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी अलग-थलग पड़ने का खतरा है। आईआरजीसी ईरान की सुरक्षा और रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में उसे आतंकवादी संगठन घोषित किया जाना तेहरान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम परमाणु वार्ता की संभावनाओं को और जटिल बना सकता है। वहीं, ईरान समर्थक गुट इसे पश्चिमी देशों की राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रहे हैं।

स्थिति बेहद संवेदनशील


ईरान में जारी प्रदर्शनों, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियों के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यूरोप का यह कड़ा कदम संकेत देता है कि वह मानवाधिकार और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। हालांकि, रूस सहित कुछ देशों की ओर से बातचीत की अपील यह उम्मीद भी जगाती है कि कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या तनाव वार्ता की मेज तक पहुंचता है या क्षेत्र और अधिक अस्थिरता की ओर बढ़ता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it