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बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों के सामने अपाहिज सा महसूस कर रहा पाकिस्‍तान, आधुनिक हथियार होने का दावा

ख्वाजा आसिफ ने संसद में कहा कि बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। उन्होंने तर्क दिया कि इतने विशाल और कम आबादी वाले, पहाड़ी व रेगिस्तानी क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना किसी घनी आबादी वाले शहर की तुलना में कहीं अधिक कठिन है।

बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों के सामने अपाहिज सा महसूस कर रहा पाकिस्‍तान, आधुनिक हथियार होने का दावा
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इस्‍लमाबाद। पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति को लेकर वहां के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान चर्चा में है। नेशनल असेंबली में उन्होंने स्वीकार किया कि विशाल और दुर्गम भूभाग के कारण बलूच विद्रोहियों के खिलाफ अभियान में पाकिस्तानी सुरक्षा बल खुद को “अक्षम” महसूस कर रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हाल ही में ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ शुरू कर कई शहरों और कस्बों में समन्वित हमले किए। ‘हेरोफ’ शब्द बलूची भाषा में ‘काला तूफान’ के अर्थ में प्रयुक्त होता है। बीएलए ने दावा किया है कि उसके हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 80 से अधिक जवान मारे गए।

नेशनल असेंबली में क्या बोले रक्षा मंत्री?

ख्वाजा आसिफ ने संसद में कहा कि बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। उन्होंने तर्क दिया कि इतने विशाल और कम आबादी वाले, पहाड़ी व रेगिस्तानी क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना किसी घनी आबादी वाले शहर की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। उन्होंने कहा, “हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े क्षेत्र की सुरक्षा और नियमित गश्त करने में उन्हें भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए बहुत बड़ी संख्या में बलों की जरूरत होती है।” आसिफ ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बीएलए के साथ किसी प्रकार की बातचीत नहीं करेगी। उनका कहना था कि महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार समूह से वार्ता संभव नहीं है।

‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ और समन्वित हमले

हालिया घटनाक्रम में बीएलए ने ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ के तहत कई स्थानों पर एक साथ हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार, स्कूलों, बैंकों, बाजारों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के कारण दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ और कई इलाकों में गतिविधियां ठप पड़ गईं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया। अधिकारियों का दावा है कि तीन दिन की मुठभेड़ और तलाशी अभियानों के बाद एक प्रमुख शहर को विद्रोहियों के कब्जे से मुक्त करा लिया गया है। हालांकि जमीनी हालात को लेकर विभिन्न पक्षों के दावों में अंतर है।

आधुनिक हथियारों को लेकर दावा

रक्षा मंत्री के एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि बलूच विद्रोहियों के पास अत्याधुनिक और महंगे हथियार हैं। उनके अनुसार, विद्रोहियों के पास लाखों रुपये की राइफलें और हजारों डॉलर कीमत के थर्मल वेपन साइट्स (रात्रि दृष्टि उपकरण) मौजूद हैं। आसिफ ने दावा किया कि विद्रोही अमेरिकी निर्मित राइफलों और नाइट विजन उपकरणों से लैस हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास मौजूद कुल साजो-सामान की कीमत हजारों डॉलर में है, जबकि पाकिस्तानी बलों के पास ऐसे उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसे हथियार विद्रोहियों तक कैसे पहुंचे।

भूगोल बना सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान की भौगोलिक परिस्थितियां पहाड़ी क्षेत्र, विस्तृत रेगिस्तान, सीमित सड़क नेटवर्क और कम जनसंख्या घनत्व सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती हैं। कई इलाके दूरदराज और दुर्गम हैं, जहां स्थायी निगरानी बनाए रखना कठिन है। यही कारण है कि सुरक्षा बलों को व्यापक क्षेत्र में फैले विद्रोही नेटवर्क से निपटने के लिए अतिरिक्त संसाधन और तकनीकी सहायता की आवश्यकता पड़ती है। ड्रोन और हवाई निगरानी का इस्तेमाल इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बातचीत से इनकार, सख्त रुख बरकरार

ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्पष्ट किया कि सरकार बीएलए के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता के पक्ष में नहीं है। उनका कहना था कि नागरिकों को निशाना बनाने वाले समूह के साथ संवाद संभव नहीं है। पाकिस्तान सरकार लंबे समय से बलूचिस्तान में सशस्त्र गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताती रही है। वहीं, बलूच समूह इन अभियानों को अपने अधिकारों और संसाधनों के मुद्दों से जोड़ते रहे हैं।

बलूच नेतृत्व का पलटवार

बलूच स्वतंत्रता समर्थक नेता हुरबैर मर्री ने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर बलूच आंदोलन को बदनाम करने के लिए “बार-बार नया नैरेटिव गढ़ने” का आरोप लगाया है। मर्री का दावा है कि पहले बलूच संघर्ष को सोवियत संघ समर्थित आंदोलन के रूप में चित्रित किया गया। बाद में इसे “तीन सरदारों के मिथक” से जोड़कर कुछ कबायली नेताओं तक सीमित दिखाने की कोशिश की गई। अब, उनके अनुसार, पाकिस्तान यह आरोप लगा रहा है कि बलूच स्वतंत्रता समर्थक भारत के एजेंट हैं। उन्होंने इन आरोपों को “झूठा और क्षणभंगुर” बताया और कहा कि इससे मूल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

प्रांत में अस्थिरता और व्यापक असर

बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालिया हमलों ने न केवल सुरक्षा बलों को चुनौती दी है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाला है। लगातार हमलों और जवाबी अभियानों से स्थानीय आबादी पर भी दबाव बढ़ा है। कई क्षेत्रों में संचार और आवाजाही प्रभावित होने की खबरें हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।


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