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ईरान-अमेरिका तनाव कम करने की कोशिशें तेज, पाकिस्तान ने वार्ता स्थल बनने की पेशकश की

टनीतिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान में वार्ता के प्रस्ताव को “सैद्धांतिक रूप से” स्वीकार कर लिया है। हालांकि, अब तक ईरान की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं मिली है।

ईरान-अमेरिका तनाव कम करने की कोशिशें तेज, पाकिस्तान ने वार्ता स्थल बनने की पेशकश की
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इस्लामाबाद : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत के लिए अपने देश को एक मंच के रूप में पेश किया है। शहबाज शरीफ ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान “सार्थक और निर्णायक” वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान हर तरह के संवाद का समर्थन करता है।

अमेरिका की ‘सैद्धांतिक सहमति’

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान में वार्ता के प्रस्ताव को “सैद्धांतिक रूप से” स्वीकार कर लिया है। हालांकि, अब तक ईरान की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं मिली है। मध्यस्थ देश और राजनयिक लगातार ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच, पाकिस्तान, मिस्र और खाड़ी क्षेत्र के कुछ अन्य देशों की सक्रिय भूमिका भी सामने आ रही है।

‘गुप्त कूटनीति’ के लीक होने से बढ़ी जटिलता

पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस संभावित वार्ता की खबर सार्वजनिक हो जाने से बैकचैनल डिप्लोमेसी और जटिल हो गई है। कूटनीति के ऐसे संवेदनशील मामलों में गोपनीयता अहम होती है, लेकिन जानकारी लीक होने से अब सभी पक्षों के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

ट्रंप ने साझा किया शरीफ का संदेश

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा किया। हालांकि उन्होंने इस पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की। ट्रंप द्वारा इस संदेश को साझा किए जाने के बाद बैकडोर डिप्लोमेसी और संभावित वार्ता को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पर सतर्क रुख अपनाया है। प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि स्थिति बेहद संवेदनशील और लगातार बदल रही है, इसलिए किसी भी अनौपचारिक रिपोर्ट को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।

पाकिस्तान सरकार ने भी बरती सावधानी


पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी मीडिया से अपील की है कि वार्ता स्थल को लेकर अटकलों से बचा जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही उचित होगा। इस बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान फिलहाल कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

सेना प्रमुख की ट्रंप से बातचीत

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने मध्यस्थता की इच्छा जताई। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के लिए अपनी 15 बिंदुओं वाली अपेक्षाएं पाकिस्तान के माध्यम से पहुंचाई हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक भी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

कतर, ओमान और अन्य देशों की भी भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में कई अन्य देश भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, कतर ने साफ किया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर मध्यस्थ नहीं है, लेकिन युद्ध समाप्त करने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने कहा कि दोहा लगातार ट्रंप प्रशासन के संपर्क में है और क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन कर रहा है।

ओमान और मिस्र की कूटनीतिक पहल
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल बुसैदी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने ईरान, सऊदी अरब, इराक और फ्रांस सहित 18 देशों के शीर्ष नेताओं और राजनयिकों से बातचीत की है।

वहीं, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने भी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से फोन पर चर्चा की है। इसके अलावा उन्होंने तुर्किये, पाकिस्तान, ओमान, सऊदी अरब, यूएई, फ्रांस और साइप्रस के विदेश मंत्रियों से भी संपर्क किया है।


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