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अमेरिका के रक्षा बजट में भारी वृद्धि करेंगे ट्रंप, जानें भारत और चीन के बजट से कितना अधिक होगा

ट्रंप ने बुधवार को अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, 'हमारा सैन्य बजट वर्ष 2027 के लिए एक ट्रिलियन डालर (एक हजार अरब डालर) नहीं बल्कि 1.5 ट्रिलियन डालर होना चाहिए।

अमेरिका के रक्षा बजट में भारी वृद्धि करेंगे ट्रंप, जानें  भारत और चीन के बजट से कितना अधिक होगा
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वाशिंगटन। वेनेजुएला पर हालिया अप्रत्याशित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक मंच पर अमेरिका की ताकत और प्रभाव को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। इसी कड़ी में ट्रंप ने वर्ष 2027 के लिए रिकॉर्ड 1500 अरब डॉलर (1.5 ट्रिलियन डॉलर) के रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है। यह मौजूदा रक्षा खर्च की तुलना में करीब डेढ़ गुना से भी अधिक है और अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े सैन्य बजट प्रस्तावों में से एक माना जा रहा है।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की घोषणा
राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस प्रस्ताव का एलान किया। उन्होंने लिखा, “हमारा सैन्य बजट वर्ष 2027 के लिए एक ट्रिलियन डॉलर नहीं, बल्कि 1.5 ट्रिलियन डॉलर होना चाहिए। इससे हम ऐसी सेना खड़ी कर सकेंगे, जो लंबे समय तक हमें सुरक्षित रखेगी, चाहे दुश्मन कोई भी हो।” ट्रंप के इस बयान को केवल बजटीय घोषणा नहीं, बल्कि अमेरिका की आक्रामक वैश्विक नीति और सैन्य वर्चस्व के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

मौजूदा बजट से तुलना: कितनी बड़ी छलांग?
अमेरिकी संसद पहले ही वर्ष 2026 के लिए 901 अरब डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी है। इसके मुकाबले 2027 के लिए प्रस्तावित 1500 अरब डॉलर का बजट लगभग 600 अरब डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्शाता है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में प्रस्तावित की गई है, जब अमेरिका पहले से ही दुनिया का सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाला देश है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बजट न केवल हथियारों और तकनीक में निवेश बढ़ाएगा, बल्कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को दुनिया के कई हिस्सों में और मजबूत कर सकता है।

संसद की मंजूरी जरूरी, रिपब्लिकन को मामूली बहुमत

हालांकि ट्रंप का यह प्रस्ताव अंतिम नहीं है। अमेरिकी संविधान के तहत सैन्य खर्च में किसी भी तरह की बढ़ोतरी के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है। फिलहाल संसद के दोनों सदनों सीनेट और प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को मामूली बहुमत हासिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिपब्लिकन सांसदों का एक बड़ा वर्ग सैन्य खर्च बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन इतनी बड़ी राशि पर डेमोक्रेटिक पार्टी और कुछ रिपब्लिकन सांसदों की आपत्तियां सामने आ सकती हैं। आने वाले महीनों में इस प्रस्ताव पर तीखी बहस होने की संभावना है।

वेनेजुएला से ग्रीनलैंड तक: सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

ट्रंप द्वारा बजट में 600 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की मांग ऐसे समय की गई है, जब उनका प्रशासन वैश्विक स्तर पर सैन्य शक्ति का खुला प्रदर्शन कर रहा है। पिछले सप्ताह अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ एक अप्रत्याशित सैन्य अभियान चलाया। इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर अमेरिका लाया गया, जिससे लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ट्रंप ने डेनमार्क के नियंत्रण वाले ग्रीनलैंड को बलपूर्वक अमेरिका के कब्जे में लेने की धमकी भी दी, जिसने यूरोप में चिंता और नाराजगी पैदा कर दी।

किन हथियार कार्यक्रमों को मिलेगा फायदा?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रक्षा बजट में प्रस्तावित इस भारी बढ़ोतरी से किन हथियार प्रणालियों, सैन्य इकाइयों या तकनीकी कार्यक्रमों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली, नौसेना का विस्तार, अंतरिक्ष और साइबर युद्ध क्षमता, तथा अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन तकनीक पर बड़ा निवेश हो सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी सैन्य अड्डों के विस्तार और विदेशी तैनाती पर भी खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

चीन और भारत से तुलना: कितना बड़ा अंतर?

अगर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो अमेरिका का प्रस्तावित रक्षा बजट अन्य देशों की तुलना में बेहद विशाल है। चीन का मौजूदा रक्षा बजट लगभग 245 अरब डॉलर है, जो दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा है। भारत का रक्षा बजट 81 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है। इस तुलना में अमेरिका का प्रस्तावित 1500 अरब डॉलर का रक्षा बजट चीन से लगभग चार गुना और भारत से दस गुना से भी ज्यादा होगा। यह अंतर दर्शाता है कि अमेरिका सैन्य क्षमता के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों से कितनी आगे निकलना चाहता है।

आलोचना और समर्थन दोनों की तैयारी
ट्रंप के इस कदम को उनके समर्थक अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने वाला बता रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ते वैश्विक संघर्षों और प्रतिस्पर्धी शक्तियों के बीच अमेरिका को मजबूत सेना की जरूरत है। वहीं आलोचक इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद” को बढ़ावा देने वाला कदम बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इतनी बड़ी सैन्य राशि का इस्तेमाल घरेलू बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए।

आगे की राह
अब सबकी नजर अमेरिकी कांग्रेस पर टिकी है, जहां यह प्रस्ताव पेश किया जाएगा। यदि यह बजट किसी रूप में पारित होता है, तो यह न केवल अमेरिकी सैन्य इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। ट्रंप का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में अमेरिका सैन्य ताकत के दम पर अपनी भूमिका और प्रभाव को और आक्रामक रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।


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