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ट्रंप की खुली तेहरान को चेतावनी-डील नहीं तो रास्ता अलग होगा, 10 दिन में लेंगे फैसला
ट्रंप के बयान को तेहरान के लिए खुली चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर मतभेद बढ़े हुए हैं।

वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी विमानवाहक पोतों की गतिविधियों में तेजी और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त संदेश दिया है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को अमेरिका द्वारा प्रस्तावित रास्ते पर चलना होगा, अन्यथा “एक बहुत अलग रास्ता” अपनाया जाएगा। ट्रंप के बयान को तेहरान के लिए खुली चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर मतभेद बढ़े हुए हैं।
“उन्हें समझौता करना ही होगा”: ट्रंप
कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, “अब ईरान के लिए हमारे साथ उस रास्ते पर चलने का समय है जो हम बना रहे हैं। अगर वे हमारे साथ आते हैं तो बहुत अच्छा होगा। अगर वे साथ नहीं आते हैं, तब भी बहुत अच्छा होगा, लेकिन यह एक बहुत अलग रास्ता होगा।” उन्होंने आगे जोड़ा, “वे पूरे इलाके की स्थिरता को खतरे में नहीं डाल सकते। उन्हें एक समझौता करना ही होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो बुरी चीजें होंगी।” ट्रंप के इस बयान को सख्त कूटनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सैन्य कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया, लेकिन “अलग रास्ता” और “बुरी चीजें” जैसे शब्दों ने संभावित सख्ती की आशंका को बढ़ा दिया है।
10 दिनों में तस्वीर साफ होने का संकेत
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने कहा, “आपको अगले शायद 10 दिनों में पता चल जाएगा। शायद हम एक डील करने जा रहे हैं, या शायद नहीं।” उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रंप ने कहा, “अगर उनके पास परमाणु हथियार हैं, तो आप मिडिल ईस्ट में शांति नहीं ला सकते”। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार चिंता जता रहा है। अमेरिका पहले भी कह चुका है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्पों पर विचार करेगा।
सैन्य गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता
हाल के दिनों में अमेरिकी विमानवाहक पोतों की खाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैन्य उपस्थिति एक रणनीतिक दबाव का हिस्सा हो सकती है, जिसका उद्देश्य ईरान को वार्ता की मेज पर लाना है। हालांकि पेंटागन की ओर से इस पर आधिकारिक बयान सीमित रहा है, लेकिन सैन्य गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईरान की ओर से अब तक ट्रंप के ताजा बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन तेहरान पहले भी अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव की नीति की आलोचना करता रहा है।
कूटनीतिक प्रयासों की चर्चा
ट्रंप ने अपने संबोधन में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के कूटनीतिक प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों के ईरानी प्रतिनिधियों के साथ “अच्छे रिश्ते” हैं और बातचीत “सही दिशा में” आगे बढ़ रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि “पिछले कुछ वर्षों में यह साबित हुआ है कि ईरान के साथ डील करना आसान नहीं है।” विश्लेषकों के अनुसार, यह संकेत देता है कि पर्दे के पीछे बातचीत जारी हो सकती है, भले ही सार्वजनिक बयान सख्त नजर आ रहे हों।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ और संयुक्त राष्ट्र पर नजर
ट्रंप ने अपने संबोधन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक पहल की भी चर्चा की। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका इस पहल के लिए 10 अरब डॉलर का योगदान देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेगा और उसे “मजबूत” बनाने में मदद करेगा। ट्रंप के मुताबिक, “बोर्ड ऑफ पीस लगभग संयुक्त राष्ट्र पर नजर रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वह ठीक से काम करे।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय जरूरतों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका आर्थिक मदद के जरिए उसकी क्षमताओं को मजबूत करेगा। हालांकि, इस पहल की संरचना और अधिकारों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय गठबंधनों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। यदि वार्ता सफल होती है, तो यह क्षेत्र में स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। ले किन अगर बातचीत विफल होती है और तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।
अनिश्चितता बढ़ी
डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने अमेरिका-ईरान संबंधों में एक बार फिर अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। जहां एक ओर उन्होंने समझौते की संभावना जताई, वहीं दूसरी ओर सख्त चेतावनी भी दी। अब नजर आने वाले दिनों पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि दोनों देश बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव का रास्ता चुनते हैं। फिलहाल, मध्य पूर्व की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है।
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