ट्रंप ने ईरान पर होने वाला हमला टाला: खाड़ी देशों के कहने पर फैसला; बोले- समझौता नहीं हुआ तो सेना बड़े हमले के लिए तैयार
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं ने उनसे आग्रह किया था कि सैन्य कार्रवाई से पहले बातचीत का रास्ता खुला रखा जाए।

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। ट्रंप के मुताबिक, खाड़ी देशों के नेताओं के अनुरोध पर अमेरिका ने बातचीत के लिए कुछ समय देने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिकी सेना किसी भी समय कार्रवाई के लिए तैयार है।
खाड़ी देशों की अपील के बाद टला हमला
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं ने उनसे आग्रह किया था कि सैन्य कार्रवाई से पहले बातचीत का रास्ता खुला रखा जाए। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को प्रस्तावित हमले को रोकने का निर्णय लिया। ट्रंप ने कहा कि इस समय गंभीर स्तर की बातचीत चल रही है और उम्मीद की जा रही है कि ऐसा समझौता सामने आ सकता है जिसे अमेरिका और पश्चिम एशिया के कई देश स्वीकार कर सकें। उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल कूटनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।
अमेरिकी सेना को दिए गए नए निर्देश
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डेनियल केन और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रस्तावित हमला फिलहाल नहीं किया जाएगा। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क है और अगर हालात बिगड़ते हैं या बातचीत असफल रहती है, तो अमेरिका किसी भी समय बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उनके अनुसार, अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
ट्रंप की चेतावनी
हमले को टालने की घोषणा से पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि समय तेजी से निकल रहा है और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। ट्रम्प ने अपने बयान में संकेत दिया कि अमेरिका अब ज्यादा लंबा इंतजार करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान को यह समझना होगा कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
अमेरिका और इजराइल की बढ़ी सैन्य गतिविधियां
इसी बीच अमेरिका और इजराइल की सैन्य तैयारियों को लेकर भी कई रिपोर्ट सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जर्मनी में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों से हथियार और सैन्य उपकरण लेकर कई कार्गो विमान इजराइल पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच संभावित सैन्य विकल्पों को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर किसी संयुक्त सैन्य अभियान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से तनाव और गहरा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट
ईरान से जुड़े तनाव का असर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ते खतरे और संभावित समुद्री नाकेबंदी के कारण करीब 1,500 कारोबारी जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर 20 हजार से अधिक नाविक मौजूद बताए जा रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अगर तनाव और बढ़ा तो मिसाइल या ड्रोन हमलों का खतरा भी पैदा हो सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।
ईरान में बढ़ी सैन्य तैयारियां
अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान के भीतर भी सैन्य तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें युवा लड़कियों को AK-47 असॉल्ट राइफल को चलाने, जोड़ने और अलग करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इन वीडियो के वायरल होने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। हालांकि ईरानी अधिकारियों की ओर से इन वीडियो पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान द्वारा अपने नागरिकों को संभावित संघर्ष के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।
दुनिया की नजरें कूटनीतिक प्रयासों पर
पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात को देखते हुए दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं। कई देशों का मानना है कि सैन्य टकराव की स्थिति वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक और सुरक्षा संकट पैदा कर सकती है। फिलहाल ट्रम्प प्रशासन ने हमले को टालकर बातचीत का रास्ता खुला रखा है, लेकिन आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ताओं पर निर्भर करेगा।


