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होर्मुज पर अब ट्रंप-जिनपिंग आमने-सामने, चीन की अमेरिका को दो टूक- हमारे मामलों में न दे दखल

चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने अमेरिका को चेतावनी जारी की। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ चीन के द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा समझौतों में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

होर्मुज पर अब ट्रंप-जिनपिंग आमने-सामने, चीन की अमेरिका को दो टूक- हमारे मामलों में न दे दखल
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बीजिंग। Strait of Hormuz Naval Blockade: मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान द्वारा पहले से लगाए गए नियंत्रण के बीच, अमेरिका ने भी इस अहम जलमार्ग के बाहर से गुजरने वाले जहाजों को रोकने के लिए नेवल ब्लॉकेड लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, खासकर चीन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोमवार शाम करीब 7:30 बजे (IST) अमेरिका ने अपने नेवल ब्लॉकेड की शुरुआत की, जिसके तुरंत बाद चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने अमेरिका को चेतावनी जारी की। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ चीन के द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा समझौतों में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

चीन की कड़ी प्रतिक्रिया

एडमिरल डोंग जून ने बयान में कहा, “ईरान के साथ हमारे ट्रेड और एनर्जी एग्रीमेंट हैं। हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे देश हमारे आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट चीन के लिए खुला है और वहां से गुजरने वाले उसके जहाजों को रोकने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। चीन की यह प्रतिक्रिया इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि वह अभी भी ईरान से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीद रहा है, जबकि क्षेत्र में संघर्ष जारी है। अमेरिकी ब्लॉकेड से चीन की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।

चीन के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। चीन के लिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, चीन अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत और LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की करीब 30 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से प्राप्त करता है। ऐसे में अगर इस मार्ग में कोई बाधा आती है, तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि चीन लगातार इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित नेविगेशन की वकालत कर रहा है। वहीं आइआरजीसी ने चेताया है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी गलत कदम का दुश्मन को घातक परिणाम भुगतना पड़ेगा । इस नाकेबंदी में ब्रिटेन ने अमेरिका का साथ नहीं देने का ऐलान किया है।

क्या है अमेरिका की रणनीति?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम सिर्फ ईरान पर दबाव बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे चीन को आर्थिक रूप से घेरने की रणनीति भी हो सकती है। खासतौर पर यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका चीनी युआन को टारगेट कर सकता है। दरअसल, हाल के वर्षों में कुछ जहाजों ने तेल व्यापार के लिए डॉलर के बजाय युआन का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसे “पेट्रो-युआन” मॉडल कहा जा रहा है। यह दशकों से चले आ रहे “पेट्रो-डॉलर” सिस्टम के लिए चुनौती माना जाता है। अमेरिका का ब्लॉकेड इस वैकल्पिक सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

चीन का सीजफायर पर जोर

चीन ने इस पूरे मामले में सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान की बात कही है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में बाधा की असली वजह ईरान से जुड़ा संघर्ष है, और इसका समाधान केवल सीजफायर और बातचीत के जरिए ही संभव है। उन्होंने कहा, “इस जलमार्ग की सुरक्षा, स्थिरता और निर्बाध आवाजाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हित में है।” साथ ही चीन ने यह भी संकेत दिया कि वह मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।

वैश्विक असर और आगे की स्थिति

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अगर यह जलमार्ग बाधित होता है, तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। अमेरिका और चीन के बीच इस मुद्दे पर बढ़ती टकराव की स्थिति भी चिंता का विषय है, क्योंकि यह प्रतिस्पर्धा अब सीधे रणनीतिक और आर्थिक हितों से जुड़ गई है।


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