ईरान पर हमले के विरोध में अमेरिकी नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर का इस्तीफा, ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप
जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखे संदेश में आरोप लगाया कि अमेरिका ने यह युद्ध स्वतंत्र निर्णय के तहत नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में शुरू किया।

वॉशिंगटन: US Iran War: ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिका के भीतर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (NCTC) के डायरेक्टर जोसेफ केंट (Joseph Kent) ने अपने पद से इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी है। उन्होंने अपने इस्तीफे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह युद्ध न तो जरूरी था और न ही नैतिक रूप से उचित।
‘ट्रंप दबाव में लिए फैसले’
जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखे संदेश में आरोप लगाया कि अमेरिका ने यह युद्ध स्वतंत्र निर्णय के तहत नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में शुरू किया। उन्होंने लिखा, “यह स्पष्ट है कि हमने यह युद्ध दबाव में शुरू किया और मेरी अंतरात्मा अब इसका समर्थन करने की अनुमति नहीं देती।” केंट ने सीधे तौर पर इजरायल और अमेरिका के भीतर मौजूद प्रभावशाली ‘वॉर लॉबी’ को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप इन ताकतों के प्रभाव में आकर निर्णय ले रहे हैं।
‘ईरान से कोई तात्कालिक खतरा नहीं था’
अपने इस्तीफे में केंट ने एक अहम सवाल उठाया—क्या वास्तव में ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई खतरा था? उन्होंने साफ कहा कि उनके आकलन के अनुसार ऐसा कोई “इमिनेंट थ्रेट” (तात्कालिक खतरा) मौजूद नहीं था, जो इस स्तर की सैन्य कार्रवाई को जायज ठहरा सके। यह बयान अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक लाइन से अलग है और इसी कारण इसे बेहद गंभीर माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस की चुप्पी, प्रतिक्रिया का इंतजार
केंट के इस्तीफे के बाद व्हाइट हाउस की ओर से देर शाम तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। गौरतलब है कि जोसेफ केंट को गबार्ड का करीबी माना जाता रहा है। उन्हें जुलाई 2025 में सीनेट की मंजूरी के बाद NCTC का प्रमुख बनाया गया था। ऐसे में उनका इस्तीफा प्रशासन के भीतर मतभेदों का संकेत भी माना जा रहा है।
‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से भटकने का आरोप
केंट ने अपने पत्र में ट्रंप की चुनावी नीतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने 2016, 2020 और 2024 के चुनाव अभियानों में “अमेरिका फर्स्ट” नीति की बात कही थी, जिसमें पश्चिम एशिया के लंबे और महंगे युद्धों से दूर रहने का वादा किया गया था। उन्होंने लिखा कि जून 2025 तक ट्रंप खुद इन युद्धों को “जाल” बताते थे, जिसने अमेरिका को आर्थिक और सैन्य रूप से नुकसान पहुंचाया। केंट ने कहा, आज वही अमेरिका फिर एक नए संघर्ष में उतर गया है, जो उन सिद्धांतों के खिलाफ है।
युद्ध पूर्व माहौल बनाने का आरोप
केंट ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन के भीतर कुछ प्रभावशाली समूहों ने युद्ध के पक्ष में माहौल तैयार किया। उनके अनुसार, इजरायल से जुड़े संपर्कों और अमेरिकी मीडिया के कुछ हिस्सों ने ऐसी धारणा बनाई कि सैन्य कार्रवाई आसान और त्वरित सफलता दिलाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इतिहास में ऐसे दावे पहले भी किए गए हैं, खासकर इराक युद्ध से पहले, जिनके परिणाम बाद में बेहद जटिल और नुकसानदायक साबित हुए।
कानूनी और संवैधानिक बहस तेज
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए “इमिनेंट थ्रेट” यानी स्पष्ट और तात्कालिक खतरे का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल राजनीतिक, बल्कि कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से भी जरूरी है। केंट का इस्तीफा इसी मुद्दे को केंद्र में लाकर खड़ा कर रहा है। अगर उनके दावे सही साबित होते हैं, तो यह प्रशासन के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
राजनीतिक असर की संभावना
केंट का यह कदम अमेरिकी राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष पहले ही ईरान पर हमले को लेकर सवाल उठा रहा है, और अब एक शीर्ष खुफिया अधिकारी के इस्तीफे ने इस बहस को और तेज कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस में इस मुद्दे पर सुनवाई या जांच की मांग भी उठ सकती है।


