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'मिनी इंडिया' क्यों कहा जाता है इजरायल का परमाणु शहर डिमोना? भारत की चाट, जलेबी और क्रिकेट का है दीवाना
डिमोना शहर इजरायल के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक माना जाता है। यह शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु केंद्र से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इजरायल इस केंद्र को एक अनुसंधान सुविधा बताता है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जाती रही हैं।

तेल अबीब : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष और तेज हो गया है। नतान्ज परमाणु संवर्धन केंद्र पर हुए हमले के जवाब में ईरान ने शनिवार को दक्षिण इजरायल के डिमोना शहर पर मिसाइलों से हमला किया। इजरायली सेना के अनुसार, इन मिसाइलों को इंटरसेप्ट नहीं किया जा सका, जिसके चलते शहर को भारी नुकसान हुआ। इस हमले में कम से कम 33 लोग घायल हुए हैं और कई इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही देखी गई है।
परमाणु केंद्र के पास स्थित है डिमोना
डिमोना शहर इजरायल के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक माना जाता है। यह शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु केंद्र से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इजरायल इस केंद्र को एक अनुसंधान सुविधा बताता है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जाती रही हैं। रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को निशाना बनाना ईरान की तरफ से एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
‘लिटिल इंडिया’ के नाम से मशहूर है डिमोना
डिमोना की एक खास पहचान यह भी है कि यहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के यहूदी रहते हैं। शहर में करीब 7,500 भारतीय-यहूदी समुदाय के लोग बसे हुए हैं, जो कुल आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हैं। इसी वजह से इसे “लिटिल इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है। यहां की गलियों में मराठी और हिंदी सुनना आम बात है। भारतीय संस्कृति की झलक यहां के खान-पान, त्योहारों और सामाजिक जीवन में साफ नजर आती है।
हमले के बाद भारतीय मूल के लोगों में चिंता
मिसाइल हमले के बाद डिमोना में रहने वाले भारतीय मूल के समुदाय में भी चिंता का माहौल है। हालांकि अब तक किसी भारतीय मूल के व्यक्ति के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हमले की तीव्रता को देखते हुए लोग सहमे हुए हैं। शहर के कई हिस्सों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है और मलबे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां स्थिति को संभालने में जुटी हुई हैं।
भारतीय संस्कृति की झलक
डिमोना में भारतीय मूल के लोग अपनी परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं। यहां दुकानों पर जलेबी, चाट, सोनपापड़ी, गुलाब जामुन और भेलपूरी जैसे भारतीय व्यंजन आसानी से मिल जाते हैं। सिर्फ खान-पान ही नहीं, बल्कि त्योहारों के माध्यम से भी यह समुदाय अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। कोचिनी यहूदी जहां ओणम मनाते हैं, वहीं बेने इजरायली और बगदादी यहूदी दीपावली जैसे त्योहार मिलकर मनाते हैं। चाय के साथ रस्क का आनंद लेना यहां की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, और ये चीजें इजरायल के सुपरमार्केट में आसानी से उपलब्ध हैं।
भारत से इजरायल तक का प्रवास
तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत से इजरायल में बड़े पैमाने पर प्रवास पिछली सदी के 1950 और 1960 के दशक में हुआ था। इनमें सबसे ज्यादा लोग महाराष्ट्र के बेने इजरायली समुदाय से थे। इसके अलावा केरल के कोचिनी यहूदी और कोलकाता के बगदादी यहूदी भी यहां आकर बसे। हाल के वर्षों में मिजोरम और मणिपुर के बनेई मेनाशे समुदाय के लोग भी इजरायल में बस रहे हैं। यह समुदाय आज विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय है, जिनमें हीरा व्यापार, आईटी सेक्टर और केयरगिविंग प्रमुख हैं।
सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका
डिमोना और अन्य शहरों में रहने वाला भारतीय मूल का समुदाय सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। नवंबर 2025 में आयोजित ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ के दौरान सिनेमाघरों में भारी भीड़ उमड़ी थी। इसके अलावा हाल ही में आयोजित ‘इंडियन म्यूजिक फेस्टिवल’ भी पूरी तरह हाउसफुल रहा, जो इस समुदाय की सांस्कृतिक सक्रियता को दर्शाता है।
अन्य शहरों में भी भारतीय मूल की मौजूदगी
डिमोना के अलावा हाइफा, तेल अवीव, अराद, नेतन्या और अफुला जैसे शहरों में भी भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। ये लोग इजरायल के सामाजिक और आर्थिक ढांचे का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
तनाव के बीच बढ़ी चिंता, हालात पर नजर
ईरान द्वारा डिमोना जैसे संवेदनशील शहर को निशाना बनाए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। खासकर वहां रह रहे भारतीय मूल के लोगों को लेकर भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां आगे के संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए सतर्क हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस हमले के बाद क्षेत्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं।
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