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ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े को नष्ट करना अमेरिका-इजरायल के लिए चुनौती

विशेषज्ञ 1991 के ‘डेजर्ट स्टॉर्म’ अभियान का हवाला देते हैं, जब अमेरिका ने इराक की ‘स्कड’ मिसाइलों को खोजने और नष्ट करने का प्रयास किया था। उस समय व्यापक हवाई बमबारी के बावजूद मोबाइल लांचरों और छिपे ठिकानों को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं हो सका था।

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े को नष्ट करना अमेरिका-इजरायल के लिए चुनौती
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वॉशिंगटन/तेहरान। Iran Ballistic Missile: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में घोषणा करते हुए कहा कि ईरान पर जारी सैन्य हमलों का मुख्य उद्देश्य उसके बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान की मिसाइल क्षमता को निर्णायक रूप से निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यह लक्ष्य अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन साबित हो सकता है। शनिवार से शुरू हुए संयुक्त हमलों के बावजूद ईरान की भूमिगत संरचनाएं, फैला हुआ उत्पादन नेटवर्क और तकनीकी आत्मनिर्भरता मित्र देशों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

भूमिगत नेटवर्क: ‘अत्यंत सुरक्षित’ ठिकाने

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने पिछले कई दशकों में पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल शस्त्रागार विकसित किया है। इस शस्त्रागार का बड़ा हिस्सा जमीन के भीतर गहरे और सुदृढ़ संरक्षित ठिकानों में रखा गया है। हाल ही में इन स्थलों को निशाना बनाते हुए अमेरिकी बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों ने दो हजार पाउंड वजनी बम गिराए। इसके बावजूद ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने स्वीकार किया कि कई सुविधाएं इतनी गहराई में स्थित हैं कि उन्हें पूरी तरह निष्क्रिय करना आसान नहीं है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने अपनी रणनीतिक संपत्तियों को पहाड़ी इलाकों और भूमिगत सुरंग नेटवर्क में स्थापित किया है, जहां पारंपरिक बमबारी सीमित प्रभाव छोड़ सकती है। ऐसे में केवल हवाई हमलों से निर्णायक सफलता मिलना संदिग्ध माना जा रहा है।

‘डिसेम्बलिंग’ रणनीति: तस्करी और पुनर्संयोजन

ईरान की एक और बड़ी रणनीतिक ताकत उसकी मिसाइलों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर भेजने की क्षमता है। विशेषज्ञ इसे ‘डिसेम्बलिंग टेक्नीक’ कहते हैं। इस तकनीक के तहत मिसाइलों को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर गुप्त मार्गों से सहयोगी समूहों तक पहुंचाया जाता है। यमन के हाउती विद्रोही और अन्य प्रॉक्सी संगठन इन हिस्सों को दोबारा जोड़कर इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जटिल तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए केवल हवाई हमले पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए जमीनी स्तर पर विशेष बलों द्वारा निरीक्षण, खुफिया नेटवर्क का विस्तार और लॉजिस्टिक चेन को बाधित करने जैसे कदम जरूरी हो सकते हैं।

मिसाइल क्षमता: विविध और दूरगामी

डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास अलग-अलग दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों का व्यापक भंडार है।

कम दूरी की मिसाइलें: 30 से 190 मील

छोटी दूरी की मिसाइलें: 190 से 620 मील

मध्यम दूरी की मिसाइलें: लगभग 1,240 मील तक

शाहब-3 जैसी मिसाइलें लगभग 1,200 मील दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम बताई जाती हैं। यह क्षमता पश्चिम एशिया के बड़े हिस्से को दायरे में ले आती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह आशंका भी जताई है कि ईरान इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार ईरान अभी इस तकनीक से कम से कम एक दशक दूर है।

ऐतिहासिक सबक: ‘डेजर्ट स्टॉर्म’ का अनुभव

विशेषज्ञ 1991 के ‘डेजर्ट स्टॉर्म’ अभियान का हवाला देते हैं, जब अमेरिका ने इराक की ‘स्कड’ मिसाइलों को खोजने और नष्ट करने का प्रयास किया था। उस समय व्यापक हवाई बमबारी के बावजूद मोबाइल लांचरों और छिपे ठिकानों को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं हो सका था। इतिहास बताता है कि केवल आसमान से मिसाइल शिकार करना अत्यंत जटिल और अक्सर सीमित सफलता वाला अभियान होता है।

इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के लगभग 200 लांचर नष्ट कर दिए हैं। बावजूद इसके, ईरान की ओर से मिसाइल प्रक्षेपण की खबरें जारी हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उसका नेटवर्क पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ है।

सैन्य और कूटनीतिक संतुलन

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि जब तक घोषित सैन्य लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक हमले जारी रहेंगे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस अभियान को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि अभियान लंबा खिंचता है तो क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है। पश्चिम एशिया पहले ही बहुस्तरीय संघर्षों और राजनीतिक असंतुलन से जूझ रहा है। ऐसे में व्यापक सैन्य कार्रवाई के दीर्घकालिक प्रभावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित

ईरान की मिसाइल क्षमता को निष्क्रिय करने का लक्ष्य तकनीकी, भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत जटिल है। भूमिगत सुरंगें, मोबाइल लांचर, उत्पादन केंद्रों का विकेंद्रीकरण और प्रॉक्सी नेटवर्क इसे और कठिन बना देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केवल सैन्य उपायों पर निर्भरता रखी गई तो यह अभियान लंबा और महंगा साबित हो सकता है। खुफिया सहयोग, आपूर्ति शृंखला पर नियंत्रण और संभावित कूटनीतिक दबाव समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अपने घोषित उद्देश्य से पीछे नहीं हटेगा। लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या यह रणनीति ईरान के व्यापक और जटिल मिसाइल नेटवर्क को वास्तव में समाप्त कर पाएगी या संघर्ष एक नए और अधिक जटिल चरण में प्रवेश करेगा।


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