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चीनी सैन्य अधिकारियों को CIA ने दिया खुलेआम मुखबिरी का आफर, चीन आग बबूला
राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है। इस अभियान के तहत पार्टी और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में कई वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई हुई है।

वॉशिंगटन/बीजिंग: चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा सत्ता संभालने के बाद से सेना और पार्टी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक कार्रवाई जारी है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए ने एक असामान्य कदम उठाते हुए चीन के अधिकारियों और सैन्य कर्मियों को खुला संदेश दिया है कि वे एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं। सीआइए ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी कर यह संकेत दिया कि असंतुष्ट या जोखिम में पड़े अधिकारी “सुरक्षित तरीके” से संपर्क कर सकते हैं। इस कदम पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ शी की मुहिम राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है। इस अभियान के तहत पार्टी और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में कई वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई हुई है। बीते वर्षों में रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों के हटाए जाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की खबरें अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रही हैं। बीजिंग का दावा है कि यह अभियान सेना की पेशेवर क्षमता और अनुशासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। हालांकि, पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रक्रिया में सत्ता संरचना को पुनर्गठित करने और वफादारी सुनिश्चित करने का तत्व भी शामिल है। इसी माहौल को ध्यान में रखते हुए सीआइए ने अपना संदेश तैयार किया है।
सीआइए का वीडियो
सीआइए द्वारा जारी वीडियो में एक काल्पनिक चीनी मध्यम स्तर के सैन्य अधिकारी को दिखाया गया है, जो मंदारिन भाषा में अपनी निराशा व्यक्त करता है। वीडियो में वह कहता है, “नेतृत्व क्षमता रखने वाला कोई भी व्यक्ति संदेह के घेरे में आ जाता है और उसे बेरहमी से खत्म कर दिया जाता है।” इस कथन के माध्यम से एजेंसी ने संकेत देने की कोशिश की है कि जो अधिकारी खुद को असुरक्षित या उपेक्षित महसूस करते हैं, वे वैकल्पिक रास्ता चुन सकते हैं। वीडियो का उद्देश्य स्पष्ट रूप से चीनी भाषा बोलने वाले दर्शकों तक पहुंचना है। इससे पहले भी सीआइए ने एक अन्य वीडियो जारी कर चीनी नागरिकों और अधिकारियों को सुरक्षित संचार माध्यमों के बारे में जानकारी दी थी। उस वीडियो में बताया गया था कि किस प्रकार डिजिटल सुरक्षा उपायों के जरिए एजेंसी से संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
सीआइए का दावा: “लाखों लोगों तक पहुंच” सीआइए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने बयान में कहा कि एजेंसी के वीडियो कई चीनी नागरिकों तक पहुंच चुके हैं। उनके अनुसार, यह पहल उन लोगों के लिए “उज्ज्वल भविष्य” की दिशा में सहयोग का अवसर प्रदान करती है जो मौजूदा व्यवस्था से निराश हैं या जोखिम में हैं। एक वरिष्ठ सीआइए अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे पिछले वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचे और नए लोगों को प्रेरित किया।” हालांकि, एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने लोगों ने वास्तव में संपर्क साधा या कोई ठोस परिणाम सामने आया है।
चीन की कड़ी प्रतिक्रिया सीआइए के इस कदम पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने पहले भी ऐसे प्रयासों को “उकसावे” और “राज्य की संप्रभुता में हस्तक्षेप” करार दिया है। बीजिंग का कहना है कि बाहरी शक्तियां चीन की आंतरिक स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, सार्वजनिक मंच पर इस तरह का खुला संदेश देना असामान्य है, क्योंकि पारंपरिक रूप से खुफिया एजेंसियां गुप्त तरीकों से संपर्क स्थापित करती रही हैं। सीआइए का यह सार्वजनिक अभियान संकेत देता है कि वह चीन के भीतर सूचना नेटवर्क को फिर से मजबूत करने के लिए नए और आक्रामक तरीकों का सहारा ले रही है।
2010-2012 की पृष्ठभूमि और नेटवर्क का कमजोर होना जानकारों के मुताबिक, 2010 से 2012 के बीच चीन ने कई अमेरिकी एजेंटों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार या निष्क्रिय कर दिया था। उस दौर में अमेरिकी खुफिया नेटवर्क को भारी झटका लगा था। इसके बाद से सीआइए चीन में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। वॉशिंगटन के रणनीतिक हलकों में चीन को अमेरिका का प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। व्यापार, तकनीक, सैन्य शक्ति और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है। ऐसे में खुफिया सूचनाएं दोनों पक्षों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खुफिया जंग सीआइए का यूट्यूब जैसे सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल करना इस बात का संकेत है कि आधुनिक खुफिया गतिविधियां डिजिटल युग में नई दिशा ले रही हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब केवल जनसंपर्क या प्रचार के माध्यम नहीं रहे, बल्कि संभावित संपर्क स्थापित करने का माध्यम भी बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति जोखिम भरी भी हो सकती है, क्योंकि चीन जैसे देश में इंटरनेट और डिजिटल गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रहती है। ऐसे में किसी भी अधिकारी द्वारा संपर्क साधने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है।
तनाव और बढ़ सकता है सीआइए की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और चीन के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। ताइवान, दक्षिण चीन सागर, व्यापार नीतियों और तकनीकी प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव जारी है। ऐसे में खुफिया मोर्चे पर खुली अपील ने विवाद को और हवा दे दी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस अभियान से सीआइए को वास्तविक रूप से कितनी सफलता मिलती है। लेकिन इतना तय है कि यह कदम अमेरिका-चीन संबंधों में एक और संवेदनशील अध्याय जोड़ रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच खुफिया और कूटनीतिक स्तर पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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