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मोजतबा खामेनेई का सुराग पाने में छूट रहे CIA और मोसाद के पसीने, बना हुआ है सस्पेंस
ईरान में नवरोज के मौके पर उम्मीद जताई जा रही थी कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनता के सामने आएंगे और संबोधन देंगे। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। पूरे दिन के इंतजार के बाद केवल उनका एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया, जिससे उनकी मौजूदगी तो पुष्टि हुई, लेकिन स्थान को लेकर रहस्य और गहरा गया।

तेहरान/वॉशिंगटन/यरुशलम: US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की आंतरिक सत्ता संरचना को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) कहां हैं, इसे लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। स्थिति ऐसी है कि दुनिया की सबसे सक्षम मानी जाने वाली खुफिया एजेंसियां अमेरिका की सीआईए और इजरायल की मोसाद भी उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाने में असफल नजर आ रही हैं।
नवरोज पर नहीं दिखे मोजतबाईरान में नवरोज के मौके पर उम्मीद जताई जा रही थी कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनता के सामने आएंगे और संबोधन देंगे। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। पूरे दिन के इंतजार के बाद केवल उनका एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया, जिससे उनकी मौजूदगी तो पुष्टि हुई, लेकिन स्थान को लेकर रहस्य और गहरा गया। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों की सुप्रीम लीडर से मुलाकातों की सूचनाएं मिल रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि मोजतबा जीवित हैं और किसी सुरक्षित स्थान से काम कर रहे हैं।
असली सत्ता किसके हाथ में?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगातार इस मामले में खुफिया अपडेट दिए जा रहे हैं। उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस बात का आकलन करने में जुटी है कि वर्तमान में ईरान की वास्तविक सत्ता किसके हाथ में है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमारे पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि सभी आदेश मोजतबा खामेनेई ही दे रहे हैं।” इससे संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर सत्ता का संतुलन अस्थिर हो सकता है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रभाव की चर्चा
इजरायली अधिकारियों का दावा है कि मौजूदा समय में ईरान की वास्तविक शक्ति इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथों में केंद्रित हो सकती है। उनका कहना है कि देश के शीर्ष नेता अत्यधिक सुरक्षा में गुप्त ठिकानों से काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के डिजिटल संचार से बच रहे हैं, ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके। एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, “ईरान के नेता इस समय वांछित अपराधियों की तरह छिपकर काम कर रहे हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखना बेहद मुश्किल हो गया है।”
खुफिया एजेंसियों के सामने नई चुनौती
सीआईए फिलहाल मोजतबा खामेनेई की हालिया तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की जांच में जुटी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे वर्तमान की हैं या पुरानी। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने नवरोज के अवसर पर वीडियो संदेश जारी किया, जबकि रिपोर्ट्स के अनुसार वे भी संभावित निशाने पर हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरानी नेतृत्व लगातार सुरक्षा खतरों के बीच काम कर रहा है।
कमांड और कंट्रोल सिस्टम पर संकट के संकेत
सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ और डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख जनरल जेम्स एडम्स ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस की इंटेलिजेंस कमेटी के सामने पेश होकर ईरान की स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर “कमांड और कंट्रोल” का गंभीर संकट देखने को मिल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि ईरानी सत्ता पूरी तरह ध्वस्त होने के कगार पर है। अधिकारियों के अनुसार, युद्ध में हुए नुकसान और कई वरिष्ठ नेताओं की मौत के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईरान की मौजूदा व्यवस्था कितने समय तक टिकेगी।
सत्ता परिवर्तन की कोशिश
इजरायल इस स्थिति को एक अवसर के रूप में देख रहा है। कुछ इजरायली अधिकारियों का मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए केवल हवाई हमले पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि जमीनी अभियान भी जरूरी हो सकता है। एक अधिकारी ने कहा, “जितना अधिक बाहरी दबाव बढ़ेगा, सत्ता के टूटने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी।” हालांकि, इस रणनीति की आलोचना भी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्तमान नेतृत्व कमजोर होता है, तो उसकी जगह और अधिक कट्टरपंथी नेता उभर सकते हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
रहस्य, अस्थिरता और बढ़ता वैश्विक तनाव
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की लोकेशन का रहस्य और सत्ता के भीतर संभावित अस्थिरता ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। खुफिया एजेंसियों की सीमित जानकारी, नेतृत्व की गुप्त गतिविधियां और क्षेत्रीय संघर्ष ये सभी मिलकर स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान की सत्ता संरचना किस दिशा में जाती है और इसका असर पश्चिम एशिया समेत पूरी दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर किस तरह पड़ता है।
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