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चीन ने ईरान भेजे मिसाइल वाले रसायन?: भारतीय मूल की पूर्व अमेरिकी राजदूत का दावा- कार्गो जहाज पर लदा है केमिकल

अमेरिकी राजनेता और पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि जब्त किया गया जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और उस पर मिसाइल निर्माण से जुड़े रसायन मौजूद थे।

चीन ने ईरान भेजे मिसाइल वाले रसायन?: भारतीय मूल की पूर्व अमेरिकी राजदूत का दावा- कार्गो जहाज पर लदा है केमिकल
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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी कंटेनर जहाज को कब्जे में ले लिया है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज पर ऐसे सामान लदे हो सकते थे, जिनका इस्तेमाल मिसाइल कार्यक्रम में किया जा सकता है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

निक्की हेली का दावा

अमेरिकी राजनेता और पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि जब्त किया गया जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और उस पर मिसाइल निर्माण से जुड़े रसायन मौजूद थे। हेली के अनुसार, जहाज को कई बार रुकने के निर्देश दिए गए, लेकिन उसने उनका पालन नहीं किया। उन्होंने इस घटना को चीन और ईरान के बीच संभावित सहयोग से जोड़ते हुए कहा कि यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि ईरान को बाहरी समर्थन मिल रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कौन सा जहाज हुआ जब्त?

जब्त किए गए पोत की पहचान ‘टोस्का’ के रूप में हुई है। यह एक ईरानी झंडे वाला कंटेनर जहाज है, जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (IRISL) समूह से जुड़ा बताया जा रहा है। यह वही कंपनी है जिस पर अमेरिका पहले से प्रतिबंध लगा चुका है। समुद्री ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, इस जहाज को ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह के पास रोका गया। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि यह जहाज जब्त किए जाने से पहले दक्षिणी चीन के झुहाई बंदरगाह पर दो बार गया था।

क्या होता है ‘ड्यूल-यूज’ सामान?

अमेरिका का मानना है कि जहाज पर “ड्यूल-यूज” यानी दोहरे उपयोग वाले सामान लदे थे। ऐसे सामान नागरिक और सैन्य दोनों कार्यों में इस्तेमाल हो सकते हैं। इस श्रेणी में शामिल उदाहरणों में ऐसे केमिकल्स आते हैं, जो सामान्य उद्योगों में काम आते हैं, लेकिन उनसे मिसाइल ईंधन भी तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा मशीनें और औद्योगिक उपकरण, ड्रोन के पुर्जे जैसे सेंसर और इंजन के हिस्से, तथा नेविगेशन और संचार से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी इसी श्रेणी में आते हैं।

नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश का आरोप

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज को अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश के बाद रोका गया। बताया गया कि पहले जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन जब उसने आदेशों की अनदेखी की, तो अमेरिकी बलों ने कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, चेतावनी के तौर पर की गई फायरिंग से जहाज के इंजन को निष्क्रिय किया गया, जिसके बाद अमेरिकी नौसैनिकों ने उस पर चढ़कर उसे अपने कब्जे में ले लिया।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई पर ईरान ने कड़ा विरोध जताया है। ईरानी सेना ने इसे “सशस्त्र समुद्री डकैती” करार देते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को इसके परिणाम भुगतने होंगे। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त नहीं होती, वह इस्लामाबाद में प्रस्तावित अगले दौर की वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों पर असर पड़ सकता है।

संवेदनशील स्थिति और सावधानी

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे अमेरिकी बलों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन जहाज पर चालक दल के परिवारों की मौजूदगी के कारण वे किसी भी आक्रामक कदम से बच रहे हैं। इससे साफ है कि स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और किसी भी छोटे कदम से बड़ा टकराव हो सकता है।

ड्यूल-यूज सामान को लेकर जांच जारी

रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी सुरक्षा सूत्रों ने शुरुआती जांच में जहाज पर ड्यूल-यूज सामग्री होने की संभावना जताई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) पहले भी धातु, पाइप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्रियों को इस श्रेणी में शामिल कर चुका है। सूत्रों का यह भी कहना है कि संबंधित जहाज पहले भी ऐसे सामान की ढुलाई में शामिल रहा है। हालांकि, इस बार जब्त किए गए सामान का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पुराने प्रतिबंध और बढ़ती निगरानी

अमेरिका ने 2019 में IRISL पर प्रतिबंध लगाते हुए आरोप लगाया था कि यह कंपनी ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए सामग्री पहुंचाने का प्रमुख माध्यम रही है। अमेरिका के अनुसार, यह शिपिंग नेटवर्क हथियारों से जुड़ी सप्लाई चेन का हिस्सा है।

बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य

इस ताजा घटना ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। एक ओर अमेरिका सुरक्षा के नाम पर सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह टकराव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा करता है। फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।


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