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भारत में शेख हसीना के भाषण से तिलमिलाई बांग्लादेश सरकार, चुनाव से पहले राजनीतिक अस्थिरता की चेतावनी

ढाका का कहना है कि शेख हसीना की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब देश में आगामी संसदीय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इससे राजनीतिक अस्थिरता, तनाव तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत में शेख हसीना के भाषण से तिलमिलाई बांग्लादेश सरकार, चुनाव से पहले राजनीतिक अस्थिरता की चेतावनी
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ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा भारत में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किए जाने पर गहरी चिंता जताई है। ढाका का कहना है कि शेख हसीना की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब देश में आगामी संसदीय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इससे राजनीतिक अस्थिरता, तनाव तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को प्रस्तावित आम चुनावों के मद्देनज़र इस घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि शेख हसीना को नई दिल्ली में एक सार्वजनिक मंच से बोलने की अनुमति दिया जाना “चौंकाने वाला और चिंता पैदा करने वाला” है। मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम में हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार के खिलाफ खुलकर राजनीतिक टिप्पणियां कीं, जिससे देश में लोकतांत्रिक बदलाव की प्रक्रिया, शांति और सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ है।

आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप

बयान में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि किसी अन्य देश की धरती से बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी करना, खासकर चुनावी माहौल में, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां “एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने” और “अच्छे पड़ोसी संबंध बनाए रखने” की नीति के विपरीत हैं। ढाका का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से घनिष्ठ और सहयोगपूर्ण संबंध रहे हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं द्विपक्षीय विश्वास को नुकसान पहुंचा सकती हैं। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरती जाएगी।

भारत में शरण और प्रत्यर्पण का मुद्दा

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2024 में देशव्यापी छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना सत्ता से बेदखल हुई थीं। इसके बाद उन्होंने भारत में शरण ली थी और तब से वहीं रह रही हैं। मंत्रालय ने इस संदर्भ में भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूद द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि का भी उल्लेख किया। बयान में कहा गया कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण से जुड़ा मामला अभी लंबित है और ऐसे में उनका राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहना तथा सार्वजनिक मंचों से बयान देना और भी अधिक चिंता का विषय है। ढाका का तर्क है कि जब कोई पूर्व नेता किसी अन्य देश में शरण लेकर वहीं से अपने देश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो यह न केवल कूटनीतिक संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि संबंधित देश के आंतरिक हालात को भी अस्थिर कर सकता है।

अवामी लीग पर प्रतिबंध का बचाव

बयान में बांग्लादेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अवामी लीग और उसके नेतृत्व से जुड़ी गतिविधियों पर अंतरिम सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को इसी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अवामी लीग के शीर्ष नेतृत्व की ओर से लगातार “उकसावे वाली गतिविधियां” यह साबित करती हैं कि पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला क्यों जरूरी था। मंत्रालय ने कहा कि अंतरिम सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है, ताकि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिल सके। ऐसे में किसी भी तरह के भड़काऊ बयान या बाहरी हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जा रहा है।

दिल्ली के कार्यक्रम में क्या कहा गया था

गौरतलब है कि शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शेख हसीना का एक रिकॉर्डेड ऑडियो क्लिप चलाया गया था। इसी कार्यक्रम को लेकर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस ऑडियो संदेश में शेख हसीना ने बांग्लादेश के लोगों से अपील की थी कि यदि वे “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव” चाहते हैं, तो उन्हें मौजूदा अंतरिम सरकार को हटाना होगा। हसीना ने विशेष रूप से नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा था कि मौजूदा व्यवस्था लोकतंत्र के रास्ते में बाधा बन रही है। उन्होंने लोगों से संविधान की रक्षा करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए आगे आने का आह्वान भी किया।

संयुक्त राष्ट्र से जांच की मांग

अपने संदेश में शेख हसीना ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान बांग्लादेश में हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच संयुक्त राष्ट्र से कराई जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों का हनन हुआ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच जरूरी है। उनके इस बयान को अंतरिम सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि ढाका ने इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम बताया है।

चुनावी समय और बयान का महत्व

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। शेख हसीना का यह ऑडियो संदेश ठीक उसके एक दिन बाद सामने आया, जिसे ढाका बेहद संवेदनशील मान रहा है। सरकार का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के बयान देश में भ्रम, असंतोष और टकराव को बढ़ावा दे सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में किसी पूर्व प्रधानमंत्री का विदेश से दिया गया बयान समर्थकों और विरोधियों दोनों को उकसा सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर?

इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर पड़ेगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, जल-साझेदारी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर लंबे समय से साझेदारी रही है। हालांकि भारत की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि नई दिल्ली इस संवेदनशील स्थिति को संभालने की कोशिश करेगी, ताकि द्विपक्षीय संबंधों में कोई बड़ी दरार न आए।

अंतरिम सरकार का रुख

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसका मुख्य लक्ष्य शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है। सरकार का कहना है कि वह किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं है और केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए काम कर रही है। शेख हसीना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अंतरिम सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेश से दिए गए ऐसे संदेश चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आगे की राह

फिलहाल बांग्लादेश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरमाता जा रहा है। शेख हसीना के भारत से दिए गए संदेश ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। ढाका की ओर से कड़ा बयान यह संकेत देता है कि अंतरिम सरकार किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप या दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत इस आपत्ति पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोनों देश इस मुद्दे को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझा पाते हैं। वहीं, बांग्लादेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी प्रक्रिया बिना किसी हिंसा या अस्थिरता के पूरी हो सके। कुल मिलाकर, शेख हसीना के बयान ने न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति में भी एक नया संवेदनशील अध्याय खोल दिया है।


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