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ममता बनर्जी की हार से हैरान और सुवेंदु अधिकारी की जीत से खुश है बांग्लादेश, नई सरकार से जताई ये उम्मीदें

बीएनपी नेता ने भाजपा की जीत पर खुशी जताते हुए सुवेंदु अधिकारी को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में नई सरकार प्रभावी ढंग से काम करेगी। हेलाल ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में और मजबूती आ सकती है।

ममता बनर्जी की हार से हैरान और सुवेंदु अधिकारी की जीत से खुश है बांग्लादेश, नई सरकार से जताई ये उम्मीदें
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ढाका। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल भारत की राजनीति में हलचल पैदा की है, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी इस पर खास प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने चुनाव परिणामों पर आश्चर्य जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत का स्वागत किया है। उन्होंने खासतौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताई है।

टीएमसी की हार पर जताई हैरानी

अजीजुल बारी हेलाल ने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC), जो लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता में थी, इस बार चुनाव हार गई। उनके मुताबिक, इतने वर्षों तक शासन करने के बाद इस तरह का परिणाम अप्रत्याशित है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक बदलाव लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन बंगाल जैसे राज्य में इस तरह का बड़ा उलटफेर निश्चित रूप से ध्यान आकर्षित करता है।

सुवेंदु अधिकारी को बधाई

बीएनपी नेता ने भाजपा की जीत पर खुशी जताते हुए सुवेंदु अधिकारी को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में नई सरकार प्रभावी ढंग से काम करेगी। हेलाल ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में और मजबूती आ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद का दायरा और बढ़ेगा।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर सकारात्मक संकेत

हेलाल के अनुसार, पश्चिम बंगाल की राजनीति का सीधा असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ता है, क्योंकि यह राज्य दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और सांस्कृतिक कड़ी है। उन्होंने कहा कि नई राजनीतिक परिस्थिति में दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने में तेजी आ सकती है। खासकर ऐसे मुद्दे, जो वर्षों से अटके हुए हैं, अब आगे बढ़ सकते हैं।

तीस्ता जल समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीद

बीएनपी नेता ने विशेष रूप से तीस्ता जल समझौते का जिक्र किया, जो लंबे समय से भारत और बांग्लादेश के बीच चर्चा का विषय रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पश्चिम बंगाल की तत्कालीन सरकार इस समझौते में बाधा बन रही थी। हेलाल ने उम्मीद जताई कि नई सरकार के आने के बाद इस समझौते का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता खासकर बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या है तीस्ता जल समझौता

तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच साझा संसाधन है। यह नदी सिक्किम के हिमालयी क्षेत्र से निकलती है, पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। बांग्लादेश में यह नदी कृषि और आजीविका के लिए बेहद अहम मानी जाती है। वहां के लाखों किसानों की निर्भरता इस नदी के पानी पर है।

पुराने समझौते और विवाद

साल 1983 में भारत और बांग्लादेश के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत को 39 प्रतिशत और बांग्लादेश को 36 प्रतिशत पानी देने की बात तय हुई थी, जबकि शेष 25 प्रतिशत पानी के बंटवारे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया था। बाद में 2011 में एक नए समझौते का प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें सर्दियों के महीनों (दिसंबर से मार्च) के दौरान भारत को 42.5 प्रतिशत और बांग्लादेश को 37.5 प्रतिशत पानी देने की योजना थी। हालांकि, उस समय पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण यह समझौता लागू नहीं हो सका।

राजनीतिक विचारधारा अलग, लेकिन मुद्दे पर समान सोच

अजीजुल बारी हेलाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और भाजपा की विचारधारा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों और तीस्ता जल समझौते जैसे मुद्दों पर दोनों की सोच में समानता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग और शांति बनाए रखना दोनों देशों के हित में है, और इसके लिए जरूरी है कि लंबित मुद्दों को आपसी सहमति से हल किया जाए।

नए राजनीतिक समीकरणों से बढ़ी उम्मीद

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने न केवल राज्य की राजनीति को बदला है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी इसके प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। बांग्लादेश की ओर से आई सकारात्मक प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि नई सरकार से कई लंबित मुद्दों के समाधान की उम्मीद की जा रही है।

अब यह देखना अहम होगा कि नई सरकार इन अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है और भारत-बांग्लादेश संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।


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