बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत: 13वें संसदीय चुनाव में दो-तिहाई बहुमत, तारिक रहमान बनेंगे PM
चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह चुनाव देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बीएनपी को बांग्लादेश चुनावों में जीत की बधाई दी है।

ढाका: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सत्ता की ओर निर्णायक बढ़त बना ली है। 300 सदस्यीय संसद में बीएनपी ने 209 से अधिक सीटें जीत ली हैं, जबकि कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह आंकड़ा 211 तक पहुंच गया है। इसके साथ ही पार्टी दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई है। बीएनपी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6, दोनों सीटों से जीत दर्ज की है। चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह चुनाव देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बीएनपी को बांग्लादेश चुनावों में जीत की बधाई दी है।
बीएनपी समर्थकों से संयम की अपील
चुनाव परिणामों के बाद बीएनपी ने आधिकारिक तौर पर जीत का दावा किया और देशवासियों को धन्यवाद दिया। हालांकि पार्टी ने अपने समर्थकों से जश्न नहीं मनाने और शांति बनाए रखने की अपील की। बीएनपी नेतृत्व ने कहा कि जीत का उत्सव मनाने के बजाय समर्थक शुक्रवार की नमाज में शामिल होकर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें। 30 दिसंबर को लंबी बीमारी के बाद खालिदा जिया का निधन हो गया था। पार्टी का यह संदेश राजनीतिक संयम और शिष्टाचार का संकेत माना जा रहा है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भी चुनाव परिणामों को स्वीकार करने और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने का संकेत दिया है।
सीटों का गणित: बीएनपी आगे, जमात गठबंधन पीछे
प्रारंभिक नतीजों के अनुसार बीएनपी ने 300 में से 209 से 211 सीटें जीती हैं। वहीं जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन करीब 70 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान राजधानी की एक सीट से आगे चल रहे हैं, जबकि पार्टी के महासचिव मिया गोलाम पोर्वार को खुलना क्षेत्र में बीएनपी उम्मीदवार अली असगर लाबी से हार का सामना करना पड़ा। एक निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान रद्द कर दिया गया।
एनसीपी को सीमित सफलता
इस चुनाव में छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। पार्टी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल पांच सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। एनसीपी उन युवा कार्यकर्ताओं द्वारा गठित की गई थी, जिन्होंने पिछले वर्ष सरकार विरोधी आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई थी और खुद को पारंपरिक दो-दलीय राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया था।
महिला नेतृत्व का युग समाप्त?
यह चुनाव कई दशकों में पहला ऐसा संसदीय चुनाव रहा, जिसमें कोई प्रमुख महिला नेता मैदान में नहीं थी। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था, जबकि उनकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी और बीएनपी की पूर्व प्रमुख खालिदा जिया का दिसंबर 2024 में निधन हो गया। पिछले लगभग चार दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति पर इन दोनों नेताओं का वर्चस्व रहा। इस चुनाव के साथ देश में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।
अवामी लीग का ‘नाव’ चिह्न पहली बार अनुपस्थित
करीब 30 वर्षों में पहली बार मतपत्र पर अवामी लीग का चुनाव चिन्ह ‘नाव’ दिखाई नहीं दिया। अगस्त 2024 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया था। अंतरिम सरकार ने 12 मई को अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण निलंबित कर दिया। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियों में शामिल अवामी लीग अतीत में दो बार चुनावों का बहिष्कार कर चुकी है, लेकिन इस बार वह चुनाव लड़ने में पूरी तरह असमर्थ रही।
मतदान प्रक्रिया और मतदाताओं की भागीदारी
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद के अनुसार, दोपहर दो बजे तक 47.91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं ने इस ऐतिहासिक चुनाव में हिस्सा लिया। देशभर में 42,779 मतदान केंद्रों पर सुबह साढ़े सात बजे से शाम साढ़े चार बजे तक मतदान हुआ। चुनाव में 50 राजनीतिक दलों के 1755 उम्मीदवारों और 273 निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई। इस बार चुनाव के साथ एक 84-सूत्रीय संवैधानिक सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया, जो देश की भविष्य की संवैधानिक दिशा तय करेगा।
चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं
हालांकि चुनाव परिणाम स्पष्ट रहे, लेकिन मतदान के दौरान कई स्थानों से हिंसा की खबरें भी आईं। गोपालगंज में एक मतदान केंद्र पर बम हमले में 13 वर्षीय लड़की सहित तीन लोग घायल हो गए। खुलना में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में बीएनपी के एक स्थानीय नेता की मौत हो गई। मुंशीगंज में भी बम धमाकों के कारण कुछ समय के लिए मतदान बाधित हुआ। प्रशासन ने इन घटनाओं की जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
तारिक रहमान: निर्वासन से सत्ता की दहलीज
तारिक रहमान का राजनीतिक सफर इस चुनाव का सबसे उल्लेखनीय पहलू रहा। लगभग 17 वर्षों तक स्व-निर्वासन में रहने के बाद उन्होंने 2025 के अंत में देश वापसी की। उन्होंने बीएनपी को 10-दलीय गठबंधन के साथ संगठित किया और स्थिरता, आर्थिक सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली को अपने अभियान का केंद्र बनाया। दो सीटों से जीत दर्ज कर उन्होंने यह संकेत दिया है कि वे प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं।
लोकतांत्रिक संक्रमण का नया चरण
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीएनपी की स्पष्ट बढ़त के साथ अब देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो-तिहाई बहुमत के साथ बीएनपी को संवैधानिक और नीतिगत सुधारों को लागू करने में आसानी हो सकती है, खासकर जब जनमत संग्रह के माध्यम से व्यापक सुधारों पर जनता की राय भी ली गई है।
नई सरकार के गठन पर टिकी निगाहें
अब निगाहें आधिकारिक परिणामों की घोषणा और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं। यदि अंतिम परिणाम भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं, तो बीएनपी एक मजबूत जनादेश के साथ सत्ता संभालेगी। हालांकि विपक्षी दलों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस बात पर रहेंगी कि नई सरकार राजनीतिक स्थिरता, संस्थागत सुधार और कानून-व्यवस्था को किस तरह संभालती है। बांग्लादेश की राजनीति एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां पुराने नेतृत्व का युग समाप्त हो चुका है और नई पीढ़ी के नेता सत्ता की कमान संभालने को तैयार हैं। 13वां संसदीय चुनाव देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है।


