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ओमान पर हमला हमारी मर्जी से नहीं, खामेनेई की मौत के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अब 'स्वतंत्र' : अराघची

अराघची ने कहा, “हमने अपने सशस्त्र बलों को पहले ही सामान्य निर्देश दे दिए हैं कि वे चुने गए लक्ष्यों के प्रति सतर्क रहें। हमारी सैन्य इकाइयां अब वास्तव में स्वतंत्र हैं और पहले से तय सामान्य दिशानिर्देशों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।”

ओमान पर हमला हमारी मर्जी से नहीं, खामेनेई की मौत के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अब स्वतंत्र : अराघची
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तेहरान/यरुशलम। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी हमलों का नेतृत्व कर रहा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) “स्वतंत्र रूप से” कार्रवाई कर रहा है और ओमान पर हुआ हमला ईरान सरकार की सीधी मर्जी से नहीं हुआ। ‘द यरुशलम पोस्ट’ के मुताबिक, अराघची ने कहा, “हमने अपने सशस्त्र बलों को पहले ही सामान्य निर्देश दे दिए हैं कि वे चुने गए लक्ष्यों के प्रति सतर्क रहें। हमारी सैन्य इकाइयां अब वास्तव में स्वतंत्र हैं और पहले से तय सामान्य दिशानिर्देशों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल हमले में मौत की खबर के बाद देश की सत्ता संरचना और सैन्य कमान को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता

आईआरजीसी सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करता है। यह पद लंबे समय तक अयातुल्ला अली खामेनेई के पास था। उनके निधन की खबर के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इस शक्तिशाली सैन्य संगठन की कमान फिलहाल किसके हाथ में है। विश्लेषकों का मानना है कि औपचारिक रूप से नए सर्वोच्च नेता के चयन तक आईआरजीसी अपने आंतरिक कमांड ढांचे के तहत काम कर सकता है। दुनिया की अधिकांश सेनाएं आकस्मिक योजनाएं तैयार रखती हैं, जिनमें यह भी शामिल होता है कि यदि केंद्रीय नेतृत्व प्रभावित हो जाए तो संचालन कैसे जारी रखा जाएगा।

हालांकि, ईरान का मामला इसलिए अलग है क्योंकि आईआरजीसी देश के विशाल बैलिस्टिक मिसाइल भंडार और ड्रोन क्षमता के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसका “स्वतंत्र” संचालन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

क्या है आईआरजीसी?

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की स्थापना मई 1979 में ईरानी क्रांति के बाद रुहोल्लाह खुमैनी ने की थी। इसका उद्देश्य नवस्थापित इस्लामी गणराज्य की रक्षा करना और संभावित तख्तापलट या आंतरिक अस्थिरता से निपटना था। ईरान की पारंपरिक सेना (आर्टेश) से अलग, आईआरजीसी एक समानांतर सैन्य संरचना के रूप में विकसित हुआ। अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, पारंपरिक सशस्त्र बलों पर अविश्वास के चलते धर्मगुरु नेतृत्व ने आईआरजीसी को संतुलन और सुरक्षा के उपकरण के रूप में स्थापित किया था। आज यह संगठन सीधे सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करता है और समय के साथ इसका आकार, संसाधन और अधिकार दोनों काफी बढ़ चुके हैं।

संरचना और सैन्य क्षमता

-आईआरजीसी के पास अपनी थल, वायु और नौसेना इकाइयां हैं। अनुमान है कि इससे जुड़े कुल कर्मियों की संख्या लगभग 1,90,000 है। थल बल: -देश के 31 प्रांतों में फैला नेटवर्क, जिसमें लगभग डेढ़ लाख से अधिक सैनिक तैनात हैं।

-नौसैनिक शाखा: लगभग 20,000 कर्मी, जो खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की निगरानी करते हैं।

-वायु शाखा: करीब 15,000 सैन्यकर्मी, जो मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम का संचालन करते हैं।

इसके अतिरिक्त, आईआरजीसी से संबद्ध अर्धसैनिक संगठन ‘बैसिज मिलिशिया’ है, जो दावा करता है कि वह लगभग छह लाख स्वयंसेवकों को संगठित कर सकता है। यह विंग घरेलू विरोध प्रदर्शनों से निपटने में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम में भूमिका

आईआरजीसी ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य ड्रोन नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इसे देश की सामरिक शक्ति का केंद्र बताया गया है। हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम आधिकारिक रूप से नागरिक उद्देश्यों के लिए बताया जाता है, पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि आईआरजीसी इससे जुड़े रणनीतिक पहलुओं में भूमिका निभाता है। यही कारण है कि यह संगठन लंबे समय से अमेरिका और कुछ अन्य देशों के प्रतिबंधों के दायरे में है।

आर्थिक साम्राज्य और संसाधन

आईआरजीसी केवल सैन्य संगठन नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक समूह भी है। खामेनेई के कार्यकाल में इसे निजी उद्यमों में विस्तार की व्यापक शक्तियां मिलीं। यह संगठन निर्माण कंपनियां, इंजीनियरिंग परियोजनाएं, बंदरगाह संचालन, दूरसंचार नेटवर्क और यहां तक कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थान भी संचालित करता है। कुछ आकलनों के अनुसार, ईरान की अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई तक हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही आर्थिक ताकत इसे संसाधन-संपन्न और अपेक्षाकृत स्वायत्त बनाती है।

विदेशों में भूमिका: कुद्स फोर्स

आईआरजीसी की सबसे चर्चित शाखा ‘कुद्स फोर्स’ है, जो विदेशों में ईरान की रणनीतिक गतिविधियों का संचालन करती है। मध्य पूर्व में यह लेबनान के हिजबुल्लाह, इराक के शिया मिलिशिया और सीरिया सरकार समर्थक बलों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और हथियार उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है। विश्लेषकों के मुताबिक, कुद्स फोर्स का उद्देश्य उन क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाना है जहां शक्ति संतुलन ईरान के पक्ष में किया जा सके।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

अराघची के बयान कि आईआरजीसी “स्वतंत्र” रूप से कार्रवाई कर रहा है, ने कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। यदि सैन्य इकाइयां केंद्रीय राजनीतिक नियंत्रण से अलग होकर काम कर रही हैं, तो इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि ईरानी सरकार का कहना है कि सामान्य दिशानिर्देश पहले ही तय किए जा चुके हैं और सैन्य कार्रवाइयां उन्हीं के अनुरूप हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि नया सर्वोच्च नेता कब और कैसे चुना जाएगा, और क्या आईआरजीसी की भूमिका में कोई बदलाव होगा।


आईआरजीसी पर सवाल

आईआरजीसी ईरान की शक्ति संरचना का एक केंद्रीय स्तंभ है—सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक तीनों स्तरों पर। खामेनेई की मौत के बाद इसकी स्वायत्तता और कार्रवाई की प्रकृति को लेकर उठे सवाल पश्चिम एशिया की अस्थिरता को और जटिल बना रहे हैं। अराघची का बयान संकेत देता है कि ईरान की सैन्य मशीनरी पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की घड़ी में यह “स्वतंत्रता” आने वाले दिनों में क्षेत्रीय समीकरणों को किस दिशा में ले जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


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