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भारत से लौट रहे ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले में 87 लोग मारे गए, श्रीलंका के समुद्री तट के पास हुई घटना

श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में अब तक 87 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। अभी भी 148 अन्य नाविक अभी भी लापता हैं और उनके बचने उम्मीद बहुत कम है।

भारत से लौट रहे ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले में 87 लोग मारे गए, श्रीलंका के समुद्री तट के पास हुई घटना
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कोलंबो/वॉशिंगटन/तेहरान। हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास बुधवार को एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया, जब ईरानी नौसेना का फ्रिगेट ‘आईरिस देना’ कथित पनडुब्बी हमले के बाद डूब गया। श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में अब तक 87 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। अभी भी 148 अन्य नाविक अभी भी लापता हैं और उनके बचने उम्मीद बहुत कम है। हालांकि, घटना को लेकर आधिकारिक स्तर पर कई बिंदुओं पर स्पष्टता अभी बाकी है। जहाज पर सवार कुल कर्मियों की संख्या, हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष और घटना की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। अमेरिका ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है।


कैसे हुई घटना?

श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय और नौसेना सूत्रों के अनुसार, यह घटना बुधवार को तटवर्ती अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। बताया जा रहा है कि जहाज की ओर से आपातकालीन संदेश (डिस्ट्रेस सिग्नल) भेजा गया, जिसके बाद श्रीलंकाई नौसेना ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया। ‘आईरिस देना’ मौदगे श्रेणी का फ्रिगेट बताया जा रहा है, जो हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित ‘मिलान 2026’ बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद ईरान लौट रहा था। इसी दौरान उस पर पनडुब्बी से हमला हुआ। नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती संकेतों से जहाज को गंभीर क्षति पहुंचने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद वह तेजी से डूबने लगा।


बचाव अभियान की विस्तृत कार्रवाई

आपात संकेत मिलते ही श्रीलंकाई नौसेना ने अपने कई जहाज और हेलीकॉप्टर घटनास्थल की ओर रवाना किए। बचाव दलों ने समुद्र में तैरते और मलबे के बीच फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया। अब तक 32 घायल कर्मियों को सुरक्षित निकालकर तट पर लाया गया है। उन्हें स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने पुष्टि की कि बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने संसद में कहा कि सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा करने से परहेज किया।

लापता लोगों को लेकर चिंता

नौसेना सूत्रों का कहना है कि 148 लोग अब भी लापता हैं। समुद्र में तेज धाराओं और रात के समय सीमित दृश्यता के कारण खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जब तक अंतिम पुष्टि नहीं हो जाती, मृतकों की संख्या को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। फिलहाल 80 लोगों के मारे जाने की खबर है।

अमेरिका का बड़ा दावा

इस घटना को और संवेदनशील बनाते हुए अमेरिका की ओर से एक अहम दावा सामने आया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया। उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुश्मन के खिलाफ ऐसा पहला बड़ा समुद्री हमला बताया।

बचाव अभियान तेज

घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को और जटिल बना दिया है। हिंद महासागर पहले से ही रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यदि अमेरिकी दावे की पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है। श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कहा कि देश इस घटना पर “उचित कदम” उठाएगा, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इसका आशय कूटनीतिक कार्रवाई से है या सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से। फिलहाल प्राथमिकता बचाव अभियान को तेज करना और लापता लोगों का पता लगाना है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा

घटना के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया पर भी नजर बनी हुई है। चूंकि जहाज हाल ही में एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में शामिल होकर लौट रहा था, इसलिए कई देशों के लिए यह घटना संवेदनशील महत्व रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हमला पुष्टि के साथ किसी देश की सैन्य कार्रवाई के रूप में सामने आता है तो इसके व्यापक कूटनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

गंभीर समुद्री घटना

श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरानी फ्रिगेट ‘आईरिस देना’ का डूबना हिंद महासागर क्षेत्र में हाल के वर्षों की सबसे गंभीर समुद्री घटनाओं में से एक माना जा रहा है। अब सबकी नजर श्रीलंका और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं तथा बचाव अभियान के अंतिम परिणाम पर टिकी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घटना के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


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