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तनातनी के बीच अमेरिका-ईरान इस दिन करेंगे परमाणु वार्ता, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

इस्तांबुल में होने वाली बैठक में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे। इस वार्ता का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद को सुलझाना और पश्चिम एशिया में संभावित क्षेत्रीय संघर्ष के खतरे को टालना है।

तनातनी के बीच अमेरिका-ईरान इस दिन करेंगे परमाणु वार्ता, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
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वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच परमाणु वार्ता एक बार फिर पटरी पर लौटती दिख रही है। दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच शुक्रवार को तुर्किये के इस्तांबुल में बैठक प्रस्तावित है। इस संभावित बातचीत से क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।

इस्तांबुल में आमने-सामने होंगे शीर्ष राजनयिक

सूत्रों के अनुसार, इस्तांबुल में होने वाली बैठक में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे। इस वार्ता का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद को सुलझाना और पश्चिम एशिया में संभावित क्षेत्रीय संघर्ष के खतरे को टालना है।

अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों ने सोमवार को पुष्टि की कि वार्ता फिर से शुरू की जा रही है। एक क्षेत्रीय राजनयिक ने यह भी संकेत दिया कि सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों के प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जो मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने कहा है कि पश्चिम एशिया दोबारा किसी बड़े टकराव का जोखिम नहीं उठा सकता।

तनाव की पृष्ठभूमि

यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब पिछले महीने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई के बाद अमेरिका और ईरान के संबंध और बिगड़ गए थे। अमेरिका ने मानवाधिकारों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को उठाते हुए तेहरान की आलोचना की थी। इसके जवाब में ईरान ने इसे आंतरिक मामलों में दखल करार दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकती है, खासकर तब जब पश्चिम एशिया पहले से ही कई भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहा है।

ट्रंप की चेतावनी: ‘बुरी चीजें होंगी’

व्हाइट हाउस में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया। संभावित समझौते पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हमारे जहाज अभी ईरान की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें बड़े और सर्वश्रेष्ठ शामिल हैं। हमारी ईरान के साथ बातचीत चल रही है और हम देखेंगे कि यह कैसे काम करता है। अगर हम कुछ करते हैं तो वह बहुत शानदार होगा, और अगर नहीं कर पाते हैं तो संभवत: बुरी चीजें होंगी।” ट्रंप ने पिछले सप्ताह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान वार्ता की मेज पर नहीं आता और परमाणु समझौता नहीं करता, तो अमेरिका पहले से भी अधिक कठोर कार्रवाई कर सकता है। इस बयान को अमेरिका की ओर से दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

‘निष्पक्ष और तर्कसंगत बातचीत’

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संकेत दिया है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि उन्होंने विदेश मंत्री अब्बास अराघची को अमेरिका के साथ “तर्कसंगत और न्यायसंगत” वार्ता आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसे वाशिंगटन के साथ संवाद बहाल करने की दिशा में ईरान का अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता से समझौता किए बिना किसी समाधान की तलाश करना चाहता है।

ट्रंप की तीन शर्तें

ईरानी सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता बहाल करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:

- शून्य यूरेनियम संवर्धन – यानी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे।

- बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक या सीमितीकरण – तेहरान अपनी मिसाइल क्षमताओं को सीमित करे।

- क्षेत्रीय गतिविधियों को समर्थन बंद करना – ईरान पर आरोप है कि वह क्षेत्रीय समूहों को समर्थन देता है, जिसे अमेरिका अस्थिरता का कारण मानता है।

हालांकि ईरान लंबे समय से इन मांगों को अस्वीकार्य बताता रहा है। तेहरान का तर्क है कि परमाणु कार्यक्रम उसका वैध अधिकार है और वह इसे ऊर्जा एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए विकसित कर रहा है। ईरान का कहना है कि मिसाइल कार्यक्रम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और इसे सीमित करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन होगा।

क्षेत्रीय और वैश्विक नजरें वार्ता पर

पश्चिम एशिया में किसी भी संभावित सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि क्षेत्रीय शक्तियां और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस वार्ता पर नजरें टिकाए हुए हैं। यूएई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा कि क्षेत्र दोबारा बड़े संघर्ष की स्थिति नहीं चाहता। विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष कितनी लचीलापन दिखाते हैं। अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है तो क्षेत्रीय तनाव में कमी आ सकती है। वहीं विफलता की स्थिति में टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


ईयू राजदूत तलब


ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने बताया कि देश के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी समूह घोषित किए जाने पर विरोध जताने के लिए ईरान में यूरोपीय यूनियन के राजदूत को तलब किया गया। हालांकि, ईरान ने भी रविवार को इस कदम के विरोध में ईयू सेना को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। वहीं, ईरान पुलिस ने देश में अस्थिरता फैलाने के आरोप में चार विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। हालांकि, इनकी राष्ट्रीयता के बारे में जानकारी साझा नहीं की गई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, आरोपितों के पास से चार ग्रेनेड भी पाए गए हैं।


भरोसे की कमी


इस्तांबुल में होने वाली यह बैठक आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा तय कर सकती है। जहां एक ओर कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद है, वहीं कड़े बयानों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी गहरी है। अब सबकी नजरें शुक्रवार की वार्ता पर टिकी हैं, जो पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।


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