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ईरान में दो हफ्ते की उथल-पुथल के बाद हालात शांत, प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या पांच हजार हुई
ईरान में विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए थे। शुरुआती दिनों में ये प्रदर्शन सीमित और शांतिपूर्ण थे, लेकिन कुछ ही समय में इनका स्वरूप बदल गया और नारे सीधे इस्लामिक शासन के खिलाफ लगने लगे।

तेहरान/वाशिंगटन। ईरान में इंटरनेट सेवा और संचार माध्यम धीरे-धीरे बहाल होने के साथ ही बीते दो हफ्तों तक चले व्यापक विरोध प्रदर्शनों की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक इन प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर करीब पांच हजार हो गई है। इनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 24 हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक कोई अंतिम आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
इस बीच ईरान के सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि हिंसक प्रदर्शनों, हत्या और मस्जिदों में आगजनी के मामलों में शामिल लोगों को फांसी की सजा दी जा सकती है। इसी मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। जवाब में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट कहा है कि ईरान पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो उसका “करारा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।
ईरान में विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए थे। शुरुआती दिनों में ये प्रदर्शन सीमित और शांतिपूर्ण थे, लेकिन कुछ ही समय में इनका स्वरूप बदल गया और नारे सीधे इस्लामिक शासन के खिलाफ लगने लगे। कई शहरों में सरकारी इमारतों, पुलिस चौकियों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया।
सरकार का कहना है कि हालात बिगड़ने के पीछे “आतंकियों और हथियारबंद दंगाइयों” की भूमिका रही, जिन्होंने आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की हत्या की। ईरानी अधिकारियों ने हिंसा के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि बाहरी ताकतों ने सोशल मीडिया और गुप्त नेटवर्क के जरिए अशांति को हवा दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनों के शुरुआती दिनों में खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए ईरानी जनता से “आगे बढ़ने” का आह्वान किया और कहा कि अमेरिकी मदद “रास्ते में है।” हालांकि किसी भी स्तर पर अमेरिकी सैनिक ईरान नहीं पहुंचे। इसके बावजूद हजारों लोगों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को राजनीतिक पत्रिका पोलिटिको को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान में “नए नेतृत्व की जरूरत” बताई। इस बयान को तेहरान ने सीधे तौर पर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।
ईरान के सर्वोच्च न्यायालय के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने कहा है कि ईरानी कानून के तहत हत्या, सशस्त्र हिंसा और मस्जिदों में आगजनी जैसे मामलों को “अल्लाह के खिलाफ युद्ध” यानी मुहरेब माना जाता है। इस अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान है और इसे सबसे गंभीर अपराधों में गिना जाता है। प्रदर्शनों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में दर्जनों मस्जिदों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। सरकार का दावा है कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर माहौल को और भड़काने की कोशिश की गई।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि ईरान किसी भी हाल में देश को युद्ध में नहीं झोंकना चाहता, लेकिन हिंसा के लिए जिम्मेदार “देशी और विदेशी अपराधियों” को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने हजारों मौतों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। खामेनेई ने कहा, “हमारे देश में निर्दोष लोगों का खून बहाया गया है। जो इसके पीछे हैं, उन्हें सजा जरूर मिलेगी।”
अमेरिका की मानवाधिकारों पर नजर रखने वाली एजेंसी एचआरएएनए के अनुसार अब तक की जानकारी में करीब पांच हजार लोगों की मौत और 24 हजार से अधिक गिरफ्तारियां दर्ज की गई हैं। संगठन का कहना है कि वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई इलाकों से सूचनाएं अभी पूरी तरह सामने नहीं आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुर्द बहुल क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा हिंसक रहे। इन इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सबसे अधिक टकराव हुआ, जिससे मृतकों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा रही।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अब देश के अधिकांश शहरों में हालात सामान्य हो चुके हैं। बाजार खुल गए हैं, परिवहन सेवाएं बहाल हैं और जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। हालांकि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता बयानबाजी का युद्ध क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच ईरान ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि ईरानी बल अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की योजना बना रहे हैं। तेहरान ने इसे “बेहुदा और भ्रामक आरोप” बताया है।
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सड़कों पर शांति भले ही लौट आई हो, लेकिन ईरान के भीतर सामाजिक-आर्थिक असंतोष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता दबाव आने वाले समय में नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
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