फलस्तीनियों के लिए खाना ले जा रहीं 15 विदेशी महिलाओं से दुष्कर्म, इजरायली सैनिकों पर गंभीर आरोप; दुनिया में हड़कंप
रिहा हुईं 15 महिला कार्यकर्ताओं ने हिरासत के दौरान यौन दुर्व्यवहार और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें बंद कमरों में रखा गया और मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना दी गई।

रोम : गाजा में फलस्तीनी नागरिकों के लिए खाद्य सामग्री और राहत सहायता लेकर जा रहे अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विभिन्न देशों से जुड़े इन कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इजरायली हिरासत के दौरान उनके साथ अपमानजनक व्यवहार, मारपीट और गंभीर दुर्व्यवहार किया गया। बताया गया है कि करीब 430 लोग 50 छोटे जहाजों के जरिए समुद्री मार्ग से गाजा की ओर जा रहे थे। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में इजरायली नौसेना ने इन जहाजों को रोक लिया और सभी लोगों को हिरासत में ले लिया। रिहा होने के बाद कई स्वयंसेवकों ने मीडिया और अपने-अपने देशों की सरकारों के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।
महिलाओं ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप
रिहा हुईं 15 महिला कार्यकर्ताओं ने हिरासत के दौरान यौन दुर्व्यवहार और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें बंद कमरों में रखा गया और मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना दी गई। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें धमकाया गया। हालांकि, जिस इजरायली जेल में इन कार्यकर्ताओं को रखा गया था, वहां के अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। जेल प्रशासन का कहना है कि हिरासत के दौरान किसी भी तरह का यौन अपराध नहीं हुआ।
मारपीट और चोटों के आरोप
कई पुरुष और महिला कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि हिरासत के दौरान उन्हें पीटा गया, गाली-गलौज की गई और घंटों तक कठोर परिस्थितियों में रखा गया। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कंटेनर जैसे बंद कमरों में रखा गया और वहां शारीरिक हिंसा की गई। रिहा होने के बाद कई कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों की हड्डियों में फ्रैक्चर पाया गया है, जबकि कई अन्य घायल बताए गए हैं।
वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले में उस समय और विवाद बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए। इन वीडियो में कथित तौर पर कार्यकर्ताओं को हथकड़ी लगाकर जमीन पर घुटनों के बल बैठाया गया दिखाया गया। वीडियो में इजरायल के आंतरिक सुरक्षा मंत्री इतमार बेन गिविर को कथित तौर पर इन लोगों का मजाक उड़ाते हुए भी देखा गया। वीडियो वायरल होने के बाद कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इजरायल की कार्रवाई की आलोचना की।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद रिहाई
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और आलोचना के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को सभी हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं को तुर्किये, इटली, जर्मनी और अन्य देशों में भेजा गया। रिहा होकर अपने देशों पहुंचे कई स्वयंसेवकों ने मीडिया के सामने अपने अनुभव साझा किए, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।
जर्मनी और इटली ने जताई चिंता
जर्मनी सरकार ने अपने नागरिकों की शिकायतों को गंभीर मामला बताया है। जर्मन अधिकारियों ने कहा कि कई नागरिक घायल हालत में लौटे हैं और उन्होंने मारपीट, अपहरण और यौन अपराधों जैसे आरोप लगाए हैं। जर्मनी ने संकेत दिया है कि मामले की कानूनी जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। वहीं इटली सरकार ने भी आरोपों की जांच की बात कही है। साथ ही इजरायल के मंत्री इतमार बेन गिविर पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
इस घटना के बाद कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इजरायल की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राहत सामग्री लेकर जा रहे नागरिक स्वयंसेवकों के साथ इस तरह का व्यवहार अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के खिलाफ हो सकता है। संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ।


