अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : ट्विटर पर छाई मोदी की एनिमेटिड योग क्लास
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में कुछ ही दिन शेष बचे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन को सही मायनों में खास बनाने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में कुछ ही दिन शेष बचे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन को सही मायनों में खास बनाने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं। मोदी के आग्रह और प्रयासों पर ही 2015 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। इन दिनों उनका ऑधिकारिक ट्विटर हैंडल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वह लोगों को योग विधा और विभिन्न योगासनों के लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए रोचक और जानकारीवर्धक एनिमेटिड योग वीडियोज पोस्ट कर रहे हैं। वीडियोज को खूब शेयर और लाइक्स मिल रहे हैं।
राजनीति के मोर्चे के साथ ही सोशल मीडिया पर भी बेहद सक्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एनिमेटिड वर्जन किसी एक योगासन या प्राणायाम को करने के तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी देने के साथ ही उसके लाभ भी बता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी अब तक वज्रासन, वक्रासन, अर्धचक्रासन, पादहस्तासन, ताड़ासन, भद्रासन, उष्ट्रासन, वृक्षासन, त्रिकोणासान के एनिमेटिड वीडियो शेयर कर चुके हैं।
उनके इन वीडियोज को हजारों बार रीट्वीट किया जा चुका है और इन्हें हजारों लाइक्स भी मिल चुके हैं।
Better blood circulation and digestive system are two of the many benefits of Vajrasana.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 13, 2019
Do you practice this Asana?
If not, what are you waiting for! #YogaDay2019 pic.twitter.com/vqd3rKs3bW
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह पर ही 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस स्वीकार किया गया था और दुनियाभर के 170 देशों ने इस दिन को योग दिवस के रूप में मनाए जाने पर अपनी मुहर लगाई थी।
प्रधानमंत्री मोदी योग के लिए अन्य लोगों को ही प्रेरित नहीं करते, बल्कि इसके लाभ को जानते हुए खुद भी योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं।
योग के स्वास्थ्य लाभ को कई शोध भी स्वीकार कर चुके हैं और इस प्राचीन विधा की ताकत को दुनियाभर में स्वीकारा जा चुका है।
आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के निदेशक, डॉ. ईश्वर वी. बासवारड्डी कहते हैं, "योग एक ऐसा विज्ञान है, जो प्रयोगशालाओं की सीमाओं से परे है, और यह एक अनुभव और महसूस किया जाने वाला विज्ञान है। यह ऐसी विधा है, जिसे हर व्यक्ति अपने खास अनुभव के अनुसार महसूस करता है और इसका प्रभाव भी हर व्यक्ति पर अलग होता है।"
डॉ. बासवारड्डी पिछले चार साल भारत में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर राजपथ पर प्रधानमंत्री मोदी समेत 40 हजार से अधिक लोगों को योग निर्देश देने वाले मास्टर ऑफ सेरेमनी रह चुके हैं।
आज के समय में जब पॉवर योग, वॉटर योग, एरियल योग जैसे योग के कई नए और आधुनिक स्वरूप सामने आ रहे हैं, ऐसे में वह कहते हैं कि पारंपरिक तौर पर मुख्य रूप से योग के 6-9 प्रकार हैं, जिनमें ज्ञान योग, हठ योग, ध्यान योग, जैन योग, बौद्ध योग, कर्म योग, पातंजलि योग आदि शामिल हैं और अपने अनुभव और कौशल के आधार पर आधुनिक योग मास्टर इन्हीं मूल प्रकारों में ही कुछ तब्दीली करके इसे नए स्वरूपों में सामने ला रहे हैं।
पुरानी पीढ़ी के साथ ही नई पीढ़ी को भी फिटनेस के प्रति जागरूक करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पहले भी प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग करते रहे हैं। इससे पहले उनके 'हम फिट तो इंडिया फिट' चैलेंज को भी सेलेब्रिटीज समेत युवाओं ने भी बढ़-चढ़ कर स्वीकार किया था।
योग के साथ नई पीढ़ी कितना जुड़ रही है? इस बारे में एक अन्य योग विशेषज्ञ अक्षर ने कहा कि "नई पीढ़ी भी योग को काफी पसंद कर रही है। वह बहुत अच्छी तरह इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रही है। यहां तक कि वे अपने पूरे दिन को इस तरह से प्लैन करते हैं कि वे हर रोज अपने योगाभ्यास को समय दे पाएं। युवा पीढ़ी के लिए यह आज केवल स्वस्थ रहने का ही जरिया नहीं रहा, बल्कि यह उनके लिए एक अच्छा करियर विकल्प भी बन गया है। खुद योग के फायदों को महसूस करने के बाद वे इसके लाभ को अब और लोगों तक भी पहुंचाना चाहते हैं।"
ग्रैंड मास्टर अक्षर दुनिया भर में खासतौर से पॉवर योग, अक्षर व्हील, एरियल योग का प्रशिक्षण देने के लिए जाने जाते हैं।
मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन, क्रिकेट लेजेंड सुनील गावस्कर, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मैथ्यू हेडन, भारतीय रेसलर्स गीता और बबीता फोगाट समेत कई सेबेब्रिटीज को योग का प्रशिक्षण दे चुके ग्रैंड मास्टर अक्षर का कहना है कि योग केवल शरीर को ही स्वस्थ नहीं रखता, बल्कि यह आज की तेज भागती जिंदगी से जुड़े तनाव को दूर करने में भी बेहद कारगर है।
वह कहते हैं, "इंसान का शरीर एक गाड़ी की तरह है। उसकी रफ्तार कितनी भी तेज क्यों न हो, उसे दुरुस्त करने और उसकी मरम्मत करने के लिए उसके बीच में ठहराव और शांति के पल होने भी जरूरी हैं, ताकि वह आज के दौर की चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह तैयार हो पाए। योग वह पद्धति है जो आसनों, प्राणायाम और ध्यान की तकनीकों के जरिए शरीर को फिर से अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार करता है।"
इस साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कायक्र्रम आयोजित करने के लिए पांच शहरों दिल्ली, शिमला, मैसूर, रांची और अहमदाबाद को चुना गया है। प्रधानमंत्री रांची में होने वाले योगाभ्यास कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे।


