भारत में है ट्रंप के असर को झेलने की क्षमता : सुबीर गोकर्ण
नई दिल्ली ! भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गर्वनर सुबीर गोकर्ण ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पद पर डोनाल्ड ट्रंप की नियुक्ति के बाद देश से पूंजी बाहर जाने, व्यापारिक

नई दिल्ली ! भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गर्वनर सुबीर गोकर्ण ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पद पर डोनाल्ड ट्रंप की नियुक्ति के बाद देश से पूंजी बाहर जाने, व्यापारिक लड़ाई और एच1बी वीजा पर प्रतिबंध जैसी आशंकाएं समय से पहले जाहिर की गई हैं और भारत में इन सबको झेलने की क्षमता है। गोकर्ण फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बोर्ड के कार्यकारी निदेशक है। उन्होंने बीटीवीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "अगर पूंजी का प्रवाह होता है, तो अन्य देशों की मुद्रा विनिमय दर पर असर होगा, जिससे उन देशों का जोखिम भी बढ़ जाएगा। लेकिन, भारत में इस असर को झेलने की क्षमता है। मुझे लगता है कि अगर भारत से पूंजी बाहर जाती है तो भी इसका रुपये की चाल पर बहुत अधिक असर नहीं होगा, क्योंकि चालू खाते का घाटा 5 फीसदी से घटकर 1 फीसदी हो चुका है।"
उन्होंने कहा, "भारत में अब इतनी क्षमता आ चुकी है कि वह संसाधनों के एक जगह से दूसरी जगह जाने को झेल सकता है।"
आईएमएफ ने हाल ही वित्त वर्ष 2017-18 का नवीनतम अग्रिम अनुमान जारी किया है, जिसमें अमेरिका की विकास दर में बढ़ोतरी की गई है। साल 2017 के आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार 2.3 फीसदी रहेगी, जबकि साल 2016 में यह 1.6 फीसदी रही। आगे 2018 का अनुमान 2.5 फीसदी लगाया गया है।
गोकर्ण ने कहा, "यह बढ़ोतरी ट्रंप की वित्तीय बातों के संदर्भ में है जिसमें ट्रंप घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को उबारने पर जोर देने जैसी बातें कह रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका की विकास दर ट्रंप के अनुमान के मुताबिक बढ़ती है, तो इसका अनिवार्य नतीजा ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी।
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि अभी नीतियों को लेकर कोई ठोस बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए अभी से अनुमान लगाना थोड़ी जल्दी होगी। हालांकि जोखिमों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।"
उन्होंने कहा, "सभी देश विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य हैं जो देशों के बीच व्यापार को लेकर नियम बनाता है। इसलिए अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध एक मुश्किल संभावना है। यह बेहद जल्दीबाजी में लगाया गया अनुमान है और डब्ल्यूटीओ के प्रोटोकॉल के मुताबिक कदम उठाया जा सकता है।"
गोकर्ण ने यह भी कहा कि नीति निर्धारण को लेकर ट्रंप का कोई पिछला इतिहास नहीं है। इसलिए आगे वे क्या कदम उठाएंगे, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
एच1बी वीजा में कटौती के अनुमान पर उन्होंने कहा, "अल्प अवधि में बाहर के लोगों की संख्या में कटौती करने पर पूरा कारोबार प्रभावित होगा, जिसकी आईटी कंपनियों को चिंता है। इसके असर के बारे में बढ़ा चढ़ाकर अनुमान लगाया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि आईटी क्षेत्र के अलावा फार्मास्युटिकल क्षेत्र पर ज्यादा असर होगा, क्योंकि यह अमेरिका को काफी अधिक निर्यात करता है।


