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भारतीय रेल ने पुराने डिब्बों का किया रचनात्मक इस्तेमाल

भारतीय रेल ने पुराने और बेकार पड़े डिब्बों का रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया

भारतीय रेल ने पुराने डिब्बों का किया रचनात्मक इस्तेमाल
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नयी दिल्ली। भारतीय रेल ने पुराने और बेकार पड़े डिब्बों का रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया है। भारतीय रेल ने शिक्षा को बढ़ावा देने और स्कूल के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिये रेलवे के पुराने डिब्बों को कचड़ा बनाने की बजाय उसमें नये क्लासरूम खोले हैं।


भारतीय रेल मंत्रालय ने ट्वीट किया, “भारतीय रेल पुराने डिब्बों में मामूली बदलाव कर उनको कार्य उपयोगी बना रही है। इन डिब्बों से मैसूर के एक स्कूल में सुंदर क्लास रूम बनाया गया है, वहीं बिहार के दानापुर में स्टाफ कैंटीन तथा राष्ट्रीय रेल संग्रहालय नयी दिल्ली में ऑफिस बनाकर इनको उपयोग में लाया जा रहा है।”


भारतीय रेल ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस अनोखी पहल के बारे में जानकारी है और कहा है कि पुराने कर्नाटक के मैसूर में भारतीय रेल ने एक पुराने डिब्बे को एक क्लास रूम में तब्दील कर दिया है। इस ट्रेन कोच का नाम ‘नली-कली’ रखा गया है, जिसका अर्थ होता है, खुशी से सीखना। इस क्लास रूम में कई कार्टून, जानवर और शिक्षा से जुड़ी कई चीजें लगायी गयी हैं।


भारतीय रेल के मुताबिक पूर्व मध्य रेल के दानापुर कोचिंग डिपो के एक कोच को कर्मचारी कैंटीन में तब्दील कर दिया गया है। इस कैंटीन का निर्माण रेलवे के उपयोग में नहीं लाये जाने वाले कोच से हुआ है। इस कैंटीन में भोजन का इंतजाम होने के अलावा रेल से जुड़ी कई तस्वीरें लगायी गयी हैं।


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