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भारतीय सेना स्कीइंग अभियान से करेगी चीन के मंसूबों को विफल

भारतीय सेना ने उत्तरी सीमाओं पर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विस्तारवादी चीन की घुसपैठ की कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए पर्वतारोहण अभियान, स्कीइंग अभियान और शोध-अध्ययन शुरू करने की योजना बनाई है

भारतीय सेना स्कीइंग अभियान से करेगी चीन के मंसूबों को विफल
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नई दिल्ली। भारतीय सेना ने उत्तरी सीमाओं पर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विस्तारवादी चीन की घुसपैठ की कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए पर्वतारोहण अभियान, स्कीइंग अभियान और शोध-अध्ययन शुरू करने की योजना बनाई है। भारतीय सेना लद्दाख के संवेदनशील माने जाने वाले काराकोरम र्दे से उत्तराखंड में लिपुलेख र्दे तक एरमेक्स-21 नामक बड़े स्की अभियान का आयोजन करेगी। यह स्कीइंग अभियान लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के क्षेत्रों को कवर करेगा। इसके साथ ही जम्मू एवं कश्मीर में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी स्कीइंग अभियान चलाया जाएगा।

भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सेना, नागरिक और विदेशी व्यक्ति भी विभिन्न आगामी स्कीइंग अभियानों में भाग लेंगे।"

स्कीइंग अभियान में हिस्सा लेने वाले लोग 14,000 फीट से लेकर 19,000 फीट की ऊंचाई वाली पर्वतीय चोटियों, ग्लेशियर और कई दर्रो से होकर गुजरेंगे।

यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में विवादित पैंगोंग झील पर तैनात सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर सहमत हुए हैं। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई स्थानों पर 10 महीने से अधिक समय से गतिरोध बना हुआ है। पिछले साल मई की शुरुआत में चीनी घुसपैठ बढ़ गई थी और दोनों देशों की सेना कई स्थानों पर आमने-सामने आ गई थी।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 24 फरवरी को कहा था कि चीन की ये आदत है कि वह अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे बदलाव की कोशिश करता है, मगर उसकी यह रणनीति भारत के साथ काम नहीं करेगी।

पब्लिक पॉलिसी थिंक-टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए, नरवणे ने कहा, "चीन की ये आदत है कि वह बहुत छोटे-छोटे बदलाव की कोशिश करता है, जो देखने में बहुत बड़ा नहीं होता है या बहुत मजबूत प्रतिक्रिया के योग्य नहीं होता है।"

सेना प्रमुख ने कहा कि चीन बिना गोली चलाए या फिर सैनिकों के नुकसान के बिना अपने मकसद में कामयाब हो जाता था, लेकिन थलसेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की हरकत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बर्दाश्त नहीं की जाएगाी।

नरवणे ने दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी रणनीति का हवाला दिया और कहा कि भारत ऐसा नहीं होने देगा।

लद्दाख में भारत के संकल्प का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि किसी भी चीज से ज्यादा, जो हमने हासिल किया है, वह यह दर्शाता है कि यह रणनीति हमारे साथ काम नहीं करेगी और उनकी हर चाल से सख्ती से निपटा जाएगा।"

हाल ही में पैंगोग झील क्षेत्र से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को एक जीत की स्थिति बताते हुए साथ ही सेना प्रमुख ने पूर्वी लद्दाख में अन्य क्षेत्रों के बारे में चेताया।

उन्होंने कहा कि अभी भी कुछ मुद्दे हैं, जो डेपसांग के क्षेत्रों में बने हुए हैं। नरवणे ने कहा, "रक्षा मंत्री ने खुद संसद में अपने उल्लेख में इसके बारे में बताया है। पूर्वी लद्दाख के क्षेत्रों और वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ अन्य क्षेत्रों में कुछ मुद्दे लंबित हैं। लेकिन हमारे पास इसके लिए हमारी रणनीतियां हैं।"

लद्दाख में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए सेना प्रमुख ने भारतीय सैनिकों की प्रशंसा भी की।

सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद सेना प्रमुख ने अभी भी पूरी तरह से चीन पर विश्वास नहीं जताया है। उन्होंने सावधानी बरतने की बात कही है।

नरवणे ने कहा, "हम जो कुछ भी कर रहे हैं, मगर फिर भी हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमें सावधान रहना होगा। हमें विश्वास की कमी के कारण बहुत सतर्क रहना होगा। जब तक कि विश्वास की कमी को दूर नहीं किया जाता, हम बहुत सावधान रहेंगे और जो भी कदम उठाए जाते हैं, उन्हें देखते रहना चाहिए।"


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