भारत बनेगा विश्व का आकर्षक विनिर्माण केन्द्र : भाजपा
श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज घोषित किया है। उसमें सुधार एवं सहायता दोनों ही पहलू शामिल हैं।

नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को माना कि प्रवासी मजदूरों के देशव्यापी घरवापसी से कोरोना विषाणु के संक्रमण फैलने तथा उद्योगों के पुन: चालू होने की राह में चुनौती आयेगी लेकिन सरकार के उपायों से देश इन चुनौतियों से आगे बढ़ेगा और विश्व में एक आकर्षक विनिर्माण केन्द्र के रूप में उभरेगा।
भाजपा के आर्थिक मामलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने यहां संवाददाताओं से एक संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। श्री अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने के लिए मार्च से ही लगातार अनेक कदम उठाये हैं और तेजी से बदल रही परिस्थितियों की दिन-प्रतिदिन के हिसाब से समीक्षा करके चरणबद्ध ढंग से नये नये फैसले तुरंत कर रही है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज घोषित किया है। उसमें सुधार एवं सहायता दोनों ही पहलू शामिल हैं। सरकार के कदमों में अर्थव्यवस्था में सुधार, स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने, गरीबों के कल्याण और प्रवासी श्रमिकों की सहायता शामिल है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, डेमोग्राफी और डिमांड के बिन्दुओं पर काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चीन से जो भी विनिर्माण की इकाइयां अपने विनिर्माण के काम को विकेन्द्रीकृत करने की इच्छुक हैं, उन्हें भारत लाने के लिए नियमों एवं कानूनों को एक समान और आकर्षक बनाना होगा। सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए लिक्विडिटी की समस्या को दूर करेगी। श्रम सुधार करके 93 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र के कामगारों को औपचारिक प्रणाली में लाया जाएगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या करीब 10 से 12 प्रतिशत के आसपास है।
उन्होंने कहा कि चूंकि केन्द्र ने अनेक कदम ऐसे उठाये हैं जिनका क्रियान्वयन राज्यों की मशीनरी के माध्यम से होता है तो राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्यों को राजनीति छोड़ कर इस दिशा में सकारात्मक योगदान देना चाहिए।
लॉकडाउन के बीच देशभर से लाखों मजदूरों के घर की ओर वापसी को लेकर पूछे गये एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इन मजदूरों को राह में शिविरों में भोजन आदि के प्रबंध का पैसा केन्द्र द्वारा मुहैया कराया जा रहा है। ट्रेनों के परिचालन में 85 प्रतिशत व्यय केन्द्र सरकार वहन कर रही है। गांवाें में इन श्रमिकों को मनरेगा के तहत पंचायत के माध्यम से पैसा दिया जा रहा है। ऐसे मजदूरों की संख्या के बारे में उन्होंने कहा कि करीब चार से साढ़े चार करोड़ श्रमिक लौटे हैं या लौट रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन मजदूरों के जल्द ही वापस उन्हीं राज्यों पर काम पर लौटने की आशा कम है। पर फिर भी अर्थव्यवस्था खोलने के लिए पर्याप्त संख्या में मजदूर अपने कार्यक्षेत्र में उपस्थित हैं।
एक सवाल पर श्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार श्रमिकों को वेतन के एवज में कोई सब्सिडी या मदद नहीं दे रही है लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी यदि 15 हजार रुपए से कम वेतन पर हैं, तो उनके भविष्य निधि खातों में नियोक्ता एवं कर्मचारी दोनों का योगदान केन्द्र सरकार देगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजना से देश में 41 करोड़ लोगों को विभिन्न मदों में उनके खाते में पैसा डाला गया है। इनमें बहुत से श्रमिक भी शामिल हैं। विभिन्न योजनाओं में लाभ पाने वालों को 11 से 13 हजार रुपए का फायदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एकाग्रता के साथ स्टार्ट अप्स ईको सिस्टम को बढ़ावा देने के बारे में कदम बढ़ाये हैं। आर्टिफीशियल इन्टेलीजेंस, हाईटैक्नोलॉजी आधारित समाधान वाले चौथी पीढ़ी के उद्यमों को बढ़ावा दिया जाएगा। एक सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि इस समय होटल एवं पर्यटन उद्योग को फिलहाल कोई पैकेज नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों को लाभ देने के लिए केन्द्र सरकार ने रबी की फसल की खरीद को लेकर गंभीर है। रबी की बंपर फसल हुई है। भंडार गृहों में जगह नहीं है। केन्द्र ने राज्यों से कहा है कि वे भारतीय खाद्य निगम के गोदामों को जितना चाहे अनाज उठा लें। केन्द्र सरकार नया अनाज खरीद लेगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में उत्तर प्रदेश में बेहतर काम हो रहा है जबकि पश्चिम बंगाल में स्थिति खराब है।
लॉकडाउन के बारे में एक सवाल पर श्री अग्रवाल ने कहा कि जिस वक्त लॉकडाउन की घोषणा हुई थी, उस समय देश में एक भी पीपीई किट, मास्क आदि नहीं बनते थे लेकिन आज 800 से अधिक इकाइयों में इनका निर्माण हो रहा है। 474 प्रयोगशालाओं में एक लाख टेस्ट करने की प्रतिदिन की क्षमता निर्मित हुई है। देश में 50 हजार वेंटीलेटर हैं और 80 हजार अन्य वेंटीलेटरों की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। 4500 से अधिक कोविड अस्पतालों में लाखों बेड उपलब्ध हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने माना कि प्रवासी श्रमिकों के घर वापसी के कारण कोरोना संक्रमण की त्रासदी बढ़ेगी लेकिन आज रिकवरी की दर 34 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और देश में इससे निपटने के लिए ढांचागत सुविधायें भी मजबूत हो गयीं हैं। सरकार बहुत दिनों को देश को बंद करके नहीं रख सकती है। इसलिए लॉकडाउन को खोलना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने आठ से 10 लाख करोड़ रुपए का ऋण बाजार में सुलभ कराया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए ऋण में मूलधन एवं ब्याज पर जोखिम की जिम्मेदारी केन्द्र ने स्वयं उठायी है। इससे इस क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका और जापान की सैकड़ों कंपनियों ने चीन से अपनी विनिर्माण इकाइयों को विकेन्द्रीकृत कर भारत में भी उत्पादन करने की इच्छा व्यक्त की है लेकिन इसके लिए उनकी शर्तें हैं। सरकार इस बारे में आवश्यक सुधार करेगी। स्थानीयता को बढ़ावा देने के लिए तीसरे स्तर की सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि स्थानीयकरण के अभियान में विदेशी उत्पादों के बहिष्कार का निर्णय लेने की कोई गुुंजाइश नहीं है।


