कवर्धा में महिला अत्याचार की घटनाएं बढ़ी
कवर्धा ! वर्ष 2016 के दौरान जिले में अपराधों की संख्या घटी है, लेकिन दूसरी ओर महिलाओं पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं। हत्या जैसे गंभीर अपराध मेें कमी आयी है,लेकिन समाज को कलंकित करने

कवर्धा ! वर्ष 2016 के दौरान जिले में अपराधों की संख्या घटी है, लेकिन दूसरी ओर महिलाओं पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं। हत्या जैसे गंभीर अपराध मेें कमी आयी है,लेकिन समाज को कलंकित करने वाले दुष्कर्म के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई। माना जाए तो वर्ष 2016 महिलाओं की सुरक्षित नहीं रहा। अपराधियों में भय और आम जनता का मित्र इसी आदर्श वाक्य के सहारे पुलिस की कार्यप्रणाली होनी चाहिए। इसमेें कबीरधाम पुलिस की कोशिश जारी है। लेकिन इस बीच महिलाओं पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं। जी हां, बीते वर्ष की बात करें तो वर्ष 2016 में 2015 की अपेक्षा महिला संबंधी अपराधों में बढ़ोत्तरी हुई है। दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध में एकाएक वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 में बच्ची से लेकर 40 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुई। यह काफी गंभीर घटना व विचारणीय बिंदु है क्योंकि वर्ष 2015 में 29 घटनाएं हुई थी। मतलब वर्ष 2016 में महिलाएं अधिक सुरक्षित रहीं। या इसे इस तरह भी कहा जा सकता है। कि अपराधियों में पुलिस का डर नहीं है। जिसके कारण इस तरह के मामलों में इतना इजाफा हुआ है। हालांकि अधिकतर मामलों में पुलिस ने आरोपियों केा धर दबोचा और जेल भेज दिया। समाज आज 21वीं सदी में जी रहा है। बावजूद कुछ लोग दहेज के नाम पर महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। दहेज प्रताडऩा आज भी एक गंभीर बीमारी समाज में मौजूद है, जिसके कारण महिलाओं की जीवनलीला ही समाप्त हो जाती है। वर्ष 2016 दहेज प्रताडऩा के चलते तीन महिलाओं की मृत्यु हो गई। जिले में प्रेम प्रसंग के चलते भागने का दौर बढ़ चुका है। लेकिन अब यह गंभीर अपराध बन चुका है। इसमें नाबालिग बालिकाओं को प्रेम जाल में फंसा और शादी का प्रलोभन देकर भगा ले जाने मतलब अपहरण की श्रेणी में मामला दर्ज होता है। अपहरण के बाद बालिका से शादी नहीं करने के कारण इसमें दुष्कर्म का मामला और जुड़ जाता है। वर्ष 2016 में अपहरण व अपहरण के 40 मामले सामने आए।


