बारदानों का टोटा,फटे-पुराने की आपूर्ति
बिलासपुर ! शासन ने बारदाना सप्लाई का ठेका केन्द्र सरकार से अधिकृत दिल्ली जूट मिल कार्पोरेशन को दिया है,

बढ़ी किसानों की परेशानी,70 लाख का आर्डर,बारदाने मिले 40 लाख
अधिकृत जूट मिल में पर्याप्त उत्पादन नहीं
बिलासपुर ! शासन ने बारदाना सप्लाई का ठेका केन्द्र सरकार से अधिकृत दिल्ली जूट मिल कार्पोरेशन को दिया है, लेकिन जूट मिल से बारदाने की सप्लाई कम होने के कारण शासन ने पुराने बारदाने को ही धान खरीदी केन्द्रों में भेज रहा है। पुराने बारदाने जो खराब हो गए हैं उन्हें भी धान खरीदी केन्द्र में खपाया जा रहा है। जबकि शासन ने 70 लाख बारदाने का आर्डर दिया है। लेकिन अभी तक 40 लाख नए बारदानों की सप्लाई की गई है। लेकिन धान खरीदी का कार्य 15 नवम्बर से शुरू होने जाने के कारण नए बारदाने की सप्लाई धान खरीदी केन्द्रों में कम हुई है। बारदाने की सप्लाई नहीं होने से धान रखने की समस्या उत्पन्न हो रही है। फटे-सड़े बारदानों में धान को रखा जा रहा है। शासन ने पूरे धान खरीदी केन्द्रों में बारदानों की सप्लाई केवल 25 प्रतिशत देश के जूट मिलों में जूट की कमी होने के कारण पर्याप्त संख्या में बारदाने तैयार नहीं हो पा रहे हैं। नए बारदाने का टेण्डर किया गया है। लेकिन सप्लाई नहीं होने के कारण शासन की नींद उड़ी हुई है।
राज्य सरकार ने नया बारदाने का ठेका केन्द्र सरकार से अधिकृत दिल्ली जूट मिल कार्पोरेशन को दिया है लेकिन बारदानों की सप्लाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है जबकि 70 लाख नए बारदाने का ठेका है जिसमें से शासन को केवल 40 लाख बारदाने की मिलें हैं। धान खरीदी का कार्य 15 नवम्बर से शुरू हो चुका है। इसलिए धान खरीदी केन्द्रों में बारदाने की समस्या उत्पन्न हो गई थी इस पर शासन ने पुराने बारदानों की सप्लाई धान खरीदी केन्द्रों में की है। खाद्य विभाग ने सड़े-गले बारदाने भी खरीदी केन्द्रों में भेज दिए हैं। बारदानों के बंडल में काफी संख्या में सड़े बारदाने की होने से धान रखने की समस्या उत्पन्न हो रही है। बताया जाता है कि जूट की कमी होने की वजह से बारदाने तैयार नहीं हो पा रहे हैं। शासन द्वारा जूट मिल पर दबाव बनाया जा रहा है। शासन के पास पुराने बारदाने खत्म हो गए हैं। शासन ने अभी तक धान खरीदी केन्द्रों में केवल 25 प्रतिशत नए बारदानों की सप्लाई की है।
पुराने बारदाने काम के नहीं
खरीदी केन्द्रों में शासन अब 75 प्रतिशत पुराने बारदानों भेज रही है। 31 जनवरी तक धान खरीदी का कार्य चलेगा जब पुराने बारदाने खरीदी केन्द्रों को दिए जा रहे हैं तो नए बारदानों का होगा? क्योंकि शासन हर साल नए बारदानों की खरीदी करती है। सड़े बारदानों के कारण धान नहीं रखा जा रहा है। क्योंकि सड़े बारदाने में रखने से धान खराब होने का भय रहता है। धान का उठाव 6 महीने तक चलता है। राईस मिल धान उठाने का कार्य शुरू तो कर दिए है मगर कार्य कछुवा गति से चल रहा है। उधर विपणन संघ धान उठाव का कार्य तेजी से होने का दावा कर रहा है।
किसानों से हो रहा विवाद
धान खरीदी केन्द्रों में पुराने बारदानों को लेकर किसानों और कर्मचारियोंं के बीच विवाद हो रहा है। जिसके कारण धान खरीदने का कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। बारदानों की कमी सभी खरीदी केन्द्रों में है। प्रदेश में 18 हजार धान खरीदी केन्द्र है। सभी केन्द्रों में धान रखने की समस्या बनी हुई है। धान खरीदी केन्द्रों में बारदानें की मांग बढ़ती जा रही है।
पुराने बारदाने भेजे गए हैं
70 लाख बारदाने का ठेका दिल्ली जूट मिल कार्पोरेशन को दिया गया है। जूट मिल कार्पोरेशन केन्द्र सरकार से अधिकृत है। टेण्डर के द्वारा ठेका दिया गया है। मगर बारदाने की सप्लाई कम होने के कारण पुराने बारदाने खरीदी केन्द्रों में भेजे गए हैं।
पुन्नूलाल मोहले
खाद्य मंत्री


