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मनरेगा में पहले सिर्फ गड्ढे खोदने के काम होते थे : जेपी नड्डा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि " मनरेगा में पहले सिर्फ गड्ढे खोदने के काम होते थे

मनरेगा में पहले सिर्फ गड्ढे खोदने के काम होते थे : जेपी नड्डा
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नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि " मनरेगा में पहले सिर्फ गड्ढे खोदने के काम होते थे। अब इसके माध्यम से नौकरी देने के साथ संपत्तियों का सृजन करने का काम मोदी सरकार ने किया है। जब प्रधानमंत्री कहते थे कि जनधन योजना में खाता खोलो तो लोग मजाक बनाते थे। आज 40 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें आधे से अधिक महिलाएं हैं।"

छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल स्व. बलराम जी टंडन की स्मृति में आयोजित वर्चुअल सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें आपदा को अवसर में बदलना है और इसलिए 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा की गई। जितनी भी योजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार में सामने आई हैं, उन्होंने समाज का सामाजिक परिवर्तन और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ताकत देने का काम किया है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि" उजाला योजना से प्रधानमंत्री मोदी ने 18 हजार गांवों में समय पर बिजली पहुंचाई। 32 करोड़ एलईडी बल्ब, 71 लाख एलईडी ट्यूब, 23 लाख से ज्यादा कम बिजली की खपत वाले पंखे भी मुफ्त वितरित किए गए हैं। उज्‍जवला योजना ने अपने आप में भारत की तस्वीर और तकदीर बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। 2014 तक देश के कई गांवों में बिजली नहीं पहुंची थी"

जेपी नड्डा ने बलराम जी टंडन के बारे में कहा कि " जिस विचारधारा के लिए उन्होंने अपना जीवन दे दिया, आज उसको हम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार में साकार होते देख रहे हैं। आपातकाल के दौरान वो पहले दिन ही गिरफ्तार कर लिए गए थे, 19 महीने वो जेल में रहे। तब जब गिरफ्तारी होती थी, तो ये पता नहीं होता था कि हम जेल से बाहर आ पाएंगे या नहीं।"

जेपी नड्डा ने कहा, मैं जब भी उनसे मिला, उन्होंने हमेशा दूर²ष्टि रखने वाली बातें कहीं। वो सबको साथ लेकर चलने वाले और सबको सही सलाह देने वाले व्यक्ति थे। वे हंसते-हंसते जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान कर देते थे। टंडन का राजनीतिक जीवन काफी लंबा था। जब वो राजनीति में आए, तब पाने के लिए कुछ नहीं था, खोने के लिए सब कुछ था। वो वैचारिक पृष्ठभूमि पर हमारे बीच आए थे। एक विचारधारा के लिए जीवन लगाना और उस विचारधारा के लिए जीना, ये हमें उनसे सीखना चाहिए।


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