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दमोह में दिग्गजों की प्रतिष्ठा होगी दांव पर, भाजपा के राहुल लोधी को उम्मीदवार बनाए जाने पर सवाल

मध्य प्रदेश की दमोह विधानसभा सीट पर होने वाले उप-चुनाव की हार जीत से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, मगर इस उप-चुनाव में भाजपा के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा जरुर दांव पर लगने वाली है

दमोह में दिग्गजों की प्रतिष्ठा होगी दांव पर, भाजपा के राहुल लोधी को उम्मीदवार बनाए जाने पर सवाल
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भोपाल। मध्य प्रदेश की दमोह विधानसभा सीट पर होने वाले उप-चुनाव की हार जीत से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, मगर इस उप-चुनाव में भाजपा के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा जरुर दांव पर लगने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि दल-बदल करने वाले राहुल लोधी को भाजपा के उम्मीदवार घोषित कर देने के बाद से भाजपा में असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं।

राज्य में वर्ष 2018 में हुए विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर राहुल लोधी ने भाजपा के ताकतवर नेता जयंत मलैया को शिकस्त दी थी। मलैया लगातार छह बार चुनाव जीत चुके थे और राज्य की सरकार में प्रभावशाली मंत्रियों में उनकी गिनती होती थी, मगर राहुल से हार गए। कमल नाथ की सरकार गिरने के बाद राहुल ने विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद भाजपा का दामन थामा। अब दमोह में उप-चुनाव होना है और भाजपा ने राहुल लोधी को अपना उम्मीदवार घोषित भी कर दिया है।

विधानसभा सीट के इतिहास पर गौर करें तो पता चलता है कि अब तक हुए 15 चुनाव में छह बार भाजपा के जयंत मलैया जीते हैं तो वहीं दूसरी ओर सात बार कांग्रेस के उम्मीदवार और दो बार निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। भाजपा की ओर से इस बार मलैया नहीं बल्कि राहुल लोधी उम्मीदवार होंगे।

आगामी समय में होने वाला विधानसभा का उप-चुनाव राहुल से ज्यादा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए अहम माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल का संसदीय क्षेत्र है तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की अगुवाई में कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राहुल लोधी ने भाजपा की सदस्यता ली थी।

लोधी को भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से सियासी पारा चढ़ा हुआ है, यहां सोशल मीडिया पर तकरार का दौर जारी है। मलैया समर्थक पार्टी के फैसले से बहुत खुश नहीं हैं और पार्टी की चिंता का भी यही कारण है। दमोह वह विधानसभा क्षेत्र है जिसमें जैन, पिछड़ा, ब्राह्मण, दलित, अल्प संख्यक बड़ा वोट बैंक हैं। यहां अगर जैन, ब्राह्मण, अल्पसंख्यक का गठजोड़ हो जाता है तो भाजपा के लिए जीत आसान नहीं होगी।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा भी यह मानकर चल रही है कि यह चुनाव उसके लिए काफी चुनौती वाला हो सकता है। यही कारण है कि दमोह में मेडिकल कॉलेज खोले जाने का फैसला हो चुका है, मुख्यमंत्री चौहान व प्रदेशाध्यक्ष शर्मा दौरा भी कर चुके हैं। इसके साथ ही पार्टी ने उन नेताओं को क्षेत्र में सक्रिय रहने की निर्देश दिए हैं, जिन पर इस क्षेत्र में चुनाव की कमान रहने वाली है।


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