इमरान खान की आर्थिक सलाहकार परिषद के दूसरे अर्थशास्त्री ने दिया इस्तीफा
प्रधानमंत्री इमरान खान की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) से आज एक दूसरे अर्थशास्त्री ने इस्तीफा दे दिया

इस्लामाबाद। प्रधानमंत्री इमरान खान की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) से आज एक दूसरे अर्थशास्त्री ने इस्तीफा दे दिया। परिषद से प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. आतिफ मियां को उनके अहमदी मजहब के लिए निकाले जाने के विरोध में अर्थशास्त्री ने इस्तीफा दिया है।
युनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. इमरान रसूल ने एक ट्वीट में कहा, "भारी दिल के साथ मैंने आज सुबह ईएसी से इस्तीफा दे दिया।"
With a heavy heart, I have resigned from the EAC this morning. The circumstances in which Atif was asked to step down are ones I profoundly disagree with. Basing decisions on religious affiliation goes against my principles, or the values I am trying to teach my children. (1/5)
— Imran Rasul (@ImranRasul3) September 8, 2018
उन्होंने कहा, "मैं कामना करता हूं कि सरकार और ईएसी अपने आगे के काम में सफल हों और निष्पक्ष, साक्ष्य आधारित सलाह देने के इच्छुक बने रहेंगे, ताकि देश के निर्माण में आर्थिक नीति को बेहतर बनाने में मदद हो सके।"
Extremely disappointed to hear this news, will be very hard to replace Atif. Pakistan needs to draw on all of its talent, based on knowledge and ability, and not irrelevant factors. I wait to see whether the idea of the EAC can live up to its promise. https://t.co/EaaQVGgOXy
— Imran Rasul (@ImranRasul3) September 7, 2018
जियो न्यूज के मुताबिक, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार द्वारा शुक्रवार को डॉ. आतिफ मियां को परिषद से बाहर किए जाने के कुछ घंटों बाद ही हॉर्वर्ड केनेडी स्कूल में अंतर्राष्ट्रीय वित्त और विकास के प्रोफेसर डॉ. आसिम एजाज ख्वाजा ने ईएसी के सदस्य के रूप में इस्तीफा दे दिया था, जिसके एक दिन बाद रसूल ने इस्तीफा दे दिया है।
प्रिंसटन विश्वविद्यालय और वूडरो विल्सन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर डॉ. आतिफ मियां को पिछले सप्ताह परिषद में नियुक्त किया गया था। मियां ने कहा कि वह इस्तीफा इसलिए दे रहे हैं, क्योंकि सरकार को उनकी नियुक्ति को लेकर धार्मिक-राजनीतिक दलों से दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने डॉ. आतिफ मियां के निष्कासन को लेकर ट्विटर पर कहा, "सरकार विद्वानों और सभी सामाजिक समूहों के साथ आगे बढ़ना चाहती है और अगर किसी एक की नियुक्ति से इसपर विपरीत प्रभाव पड़ता है तो यह अनुचित है।"


