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कैसे गायब हो गए संरक्षित स्मारक?

सरकार का कहना है कि पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित 50 ऐतिहासिक स्मारक गायब हो गए हैं. आखिर कैसे गायब हो गए स्मारक?

कैसे गायब हो गए संरक्षित स्मारक?
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संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में संसद की एक समिति को बताया कि पूरे देश में पुरातत्व विभाग (एएसआई) द्वारा संरक्षित 3,693 ऐतिहासिक स्मारकों में से 50 गायब हो गए हैं. सवाल लाजमी है कि स्मारक गायब कैसे हो सकते हैं? आखिर क्या मतलब है स्मारकों के गायब होने का?

जवाब मंत्रालय द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी में है. मंत्रालय के मुताबिक इन 50 स्मारकों में से 14 शहरीकरण की भेंट चढ़ गए, 12 जलाशयों/बांधों के नीचे डूब गए और 24 का पता नहीं लग पा रहा है.

92 स्मारक थे लापता, 42 मिले

मंत्रालय का कहना है कि इस विषय पर पिछले 10 सालों में दरअसल कुछ सुधार हुआ है. 2013 में सीएजी ने एक रिपोर्ट दी थी जिसके मुताबिक उस समय देश में 92 स्मारक "लापता" थे. उसके बाद इन स्मारकों का पता लगाने की कई कोशिशें की गईं जिनकी वजह से कुछ का पता लगाया जा सका.

इन 92 स्मारकों में से 42 का पता लगा लिया गया है और बाकी 50 अलग अलग कारणों से खो गए. इन 50 में से जिन 24 स्मारकों का बिल्कुल पता नहीं चल पा रहा है उनमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीचोबीच स्थित बाराखंबा कब्रिस्तान और 'इंचला वाली गुमटी' भी शामिल हैं.

इनमें कुछ प्राचीन मंदिर, शैल शिलालेख और पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक किले के खंडहर भी शामिल हैं. लेकिन मंत्रालय ने 2013 के बाद यह मालूम करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया है कि जो कुल 3,693 स्मारकें एएसआई द्वारा संरक्षित हैं वो सभी सुरक्षित हैं या नहीं.

संसदीय समिति ने भी इस बात पर चिंता जताई है और अनुशंसा की है कि एएसआई तुरंत इस दिशा में कदम उठाए. एएसआई के पास संसाधनों की कमी होना इन स्मारकों के गायब हो जाने के बड़े कारणों में से एक है.

संसाधनों की कमी

सभी संरक्षित स्मारकों की निगरानी के लिए करीब 7,000 सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है, लेकिन बजट की कमी की वजह से विभाग सिर्फ 2,578 सुरक्षाकर्मी तैनात कर पाया.

और ये सुरक्षाकर्मी भी कुल 3,693 स्मारकों में से सिर्फ 248 (6.7 प्रतिशत) पर तैनात हैं. अगर स्मारकों पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं होगी तो उनका संरक्षण कैसे हो पाएगा, यह स्मारकों के भविष्य के लिए एक बड़ा सवाल है.

सरकार ने 2022-23 में संरक्षित स्मारकों के रखरखाव के लिए एएसआई को सिर्फ 3.33 करोड़ रुपए दिए थे. समिति ने सरकार से कहा है कि यह धनराशि बेहद अपर्याप्त है और इस काम के लिए आबंटन को बढ़ाया जाए.

इसके अलावा स्मारक अटेंडेंट के पद पर 2,500 लोगों की भर्ती लंबित है. इस वजह से भी इमारतों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है. समिति ने रिक्त पदों को जल्द भरने के लिए भी कहा है.


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