ऑनर किलिंग: जनवादी महिला समिति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया
जनवादी महिला समिति, हरियाणा ने सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से आॅनर किलिंग की घटनाएं रोकने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का आज स्वागत किया

चंडीगढ़। जनवादी महिला समिति, हरियाणा ने सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से आॅनर किलिंग की घटनाएं रोकने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का आज स्वागत किया और कहा कि युवाओं के नागरिक अधिकारों की रक्षा करवाने की दिशा में यह बड़ा कदम है। संगठन ने यह भी मांग की है कि केन्द्र सरकार आॅनर किलिंग रोकने के लिए जल्द से जल्द कड़ा कानून लेकर आए।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव सविता व अध्यक्ष शकुन्तला जाखड़ ने यहां जारी प्रेस बयान में कहा कि उच्चतम न्यायालय का खाप पंचायतों का मर्जी के रिश्तों में हस्तक्षेप को गैर कानूनी को करार देना और आॅनर किलिंग की घटनाएं रोकने के लिए कानून बनने तक जारी किए गए दिशा-निर्देश आॅनर किलिंग के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे प्रगतिशील संगठनों की बड़ी जीत है।
उन्होंने कहा कि जनवादी महिला समिति लंबे समय से झूठी इज्जत के नाम पर होने वाले इन अपराधों को रोकने के लिए अलग से कानून बनाने की मांग करता रहा है और संगठन ने 2013 में इस कानून का ड्राफ्ट बनाकर व लाखों हस्ताक्षर देशभर से एकत्रित करके तत्कालीन कानून मंत्री को दिए थे परंतु आज तक इस पर कानून नहीं बनाया गया है।
समिति के बयान के अनुसार फिर 2015 में हस्ताक्षर देश भर से एकत्रित करके वर्तमान केंद्र सरकार को दिए गए। इस साल भी हरियाणा भर में समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों व युवाओं के हस्ताक्षर करवाए गए हैं परंतु कानून बनाने के नाम पर अब तक केंद्र, राज्य सरकार व मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियों का रुख नकारात्मक ही रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बहुत संघर्षों के बाद युवाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कपल प्रोटक्शन होम्स का बजट भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार के आने के बाद काफी घटा दिया गया है। युवतियों की सुरक्षा के नाम पर खुद राज्य मशीनरी व दक्षिणपंथी संगठन युवक-युवतियों के नागरिक अधिकारों पर हमले कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनर किलिंग की बहुत सारी घटनाओं को अपराधिक आम सहमति से दबा दिया जाता है। राज्य सरकार व मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियां भी ऐसी निर्मम घटनाओं पर मुंह नहीं खोलते हैं और प्रशासन भी ठोस कार्यवाही करने से गुरेज करता है।
उन्होंने कहा कि इस वातावरण को बदलने की दिशा में उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश कारगर साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि संगठन कड़ा कानून बनवाने व युवाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा।


