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हनीट्रैप कांड : एसआईटी से पहले कई नेताओं को मिल गए थे वीडियो

मध्यप्रदेश के हनीट्रैप कांड के खुलासे से पहले ही नेताओं ने गिरोह के लिए काम करने वाली सॉफ्टवेयर टीम के सदस्यों से वीडियो क्लिपिंग हासिल कर ली थी

हनीट्रैप कांड : एसआईटी से पहले कई नेताओं को मिल गए थे वीडियो
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भोपाल। मध्यप्रदेश के हनीट्रैप कांड के खुलासे से पहले ही नेताओं ने गिरोह के लिए काम करने वाली सॉफ्टवेयर टीम के सदस्यों से वीडियो क्लिपिंग हासिल कर ली थी। राज्य में राजनेताओं, अफसरों, ठेकेदारों व कारोबारियों को अपने जाल में फंसाने वाली पांच महिलाओं को इंदौर की पुलिस और एटीएस ने साझा कोशिश करके गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी नगर निगम के एक इंजीनियर हरभजन सिंह द्वारा ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद हुई थी। इन गिरफ्तारियों के बाद एक एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी इन महिलाओं के पास से कई सनसनीखेज दस्तावेज और वीडियो बरामद करने में सफल हुई है।

सूत्रों का दावा है कि इन महिलाओं के पास से जो वीडियो मिले हैं, उसमें से कई वीडियो राजनेताओं ने हनीट्रैप कांड की आरोपी महिलाओं के साथ मिलकर काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की टीम की मदद से पहले ही हासिल कर लिए थे।

सूत्रों का कहना है कि इन महिलाओं ने लोकसभा चुनाव के दौरान राजनेताओं से संपर्क कर वीडियो क्लिपिंग को 30 करोड़ रुपये में बेचने की कोशिश की थी, उसके बाद से ही कई राजनेता इन वीडियो क्लिपिंग को हासिल करने में लग गए थे। सौदेबाजी करने वाले गिरोहों और नेताओं के बीच हुई बातचीत में यह बात जाहिर हो गई थी कि इस काम में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का दल शामिल है। ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैदराबाद और बेंगलुरू के रहने वाले हैं।

सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही राजनेता सॉफ्टवेयर टीम के सदस्यों की तलाश में जुट गए थे और उन्होंने अपनी कोशिशों से सॉफ्टवेयर टीम के सदस्यों तक पहुंच बना ली थी। उसके बाद बड़ी संख्या में वीडियो क्लिपिंग हासिल कर ली थी।

इंदौर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और एसआईटी टीम की सदस्य रुचि वर्धन मिश्रा भी संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह स्वीकार कर चुकी हैं कि इन महिलाओं ने कई लोगों के साथ अंतरंग वीडियो बनाए थे और उसको लेकर सौदेबाजी भी की थी।

एसआईटी को जांच और पूछताछ में यह भी पता चला है कि आरोपी महिलाएं चश्मे और लिपिस्टिक की डिब्बी में कैमरा लगाकर सारे घटनाक्रम को रिकार्ड कर लेती थीं और बाद में उसे अपने सॉफ्टवेयर टीम के पास भेज देती थीं।


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